इंदौर। मप्र हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने राज्य शासन को नोटिस जारी कर पूछा है कि नगर निगम सीमा के बाहर भिक्षुओं के पुनर्वास की समस्या को लेकर प्रस्तुत याचिका को सुनवाई के लिए ग्राह्य क्यों न करें। शासन को दो सप्ताह में जवाब देना है। याचिका पर अगली सुनवाई अब चार सप्ताह बाद होगी।
हाई कोर्ट में प्रस्तुत इस जनहित याचिका में कहा है कि केंद्र सरकार ने भिक्षुओं के पुनर्वास के लिए योजना तैयार कर इसके क्रियान्वयन के लिए जिला कलेक्टरों को अधिकृत किया था। इंदौर कलेक्टर ने इस काम के लिए नगर निगम को अधिकृत कर दिया। इसका असर यह हुआ कि नगर निगम सीमा में तो भिक्षुओं के पुनर्वास का काम चल रहा है लेकिन निगम सीमा के बाहर जिले की तहसीलों में भिक्षुओं के पुनर्वास की योजना पर काम नहीं हो रहा है।
निगम सीमा के बाहर भिक्षुओं के पुनर्वास की कोई व्यवस्था नहीं होने से तहसीलों और अन्य छोटे स्थानों पर भिक्षुओं की संख्या तेजी से बढ़ रही है। एक तरफ तो नगर निगम अपनी सीमा में भिक्षुओं के पुनर्वास का इंतजाम कर उनकी संख्या नियंत्रित कर रहा है, दूसरी तरफ तहसील और अन्य छोटे स्थानों पर पुनर्वास की व्यवस्था नहीं होने से भिक्षुओं की संख्या बढ़ रही है। बुधवार को याचिका पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने शासन को नोटिस जारी कर दिए।
पूर्व में भी प्रस्तुत हुई थी याचिका
भिक्षुओं के पुनर्वास को लेकर कुछ दिन पहले भी एक याचिका हाई कोर्ट में प्रस्तुत हुई थी। हालांकि सुनवाई के दौरान ही याचिकाकर्ता ने स्वयं ही उसे वापस ले लिया था। बुधवार को न्यायमूर्ति एसए धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति प्रणय वर्मा की युगलपीठ के समक्ष याचिका की सुनवाई हुई। मामले में अगली सुनवाई सितंबर के दूसरे सप्ताह में होगी।











