आरोपी को किसी भी तरह जेल में रखना है, इसके लिए नहीं हो सकता पीएमएलए के प्रावधानों का इस्तेमाल: सुप्रीम कोर्ट

आरोपी को किसी भी तरह जेल में रखना है, इसके लिए नहीं हो सकता पीएमएलए के प्रावधानों का इस्तेमाल: सुप्रीम कोर्ट
नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि PMLA (प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग ऐक्ट) का गलत इस्तेमाल नहीं होना चाहिए। किसी को सिर्फ जेल में रखने के लिए PMLA का इस्तेमाल नहीं हो सकता। छत्तीसगढ़ के शराब घोटाले में फंसे एक IAS अफसर को जमानत देते हुए जस्टिस अभय ओका और उज्ज्वल भुयान की बेंच ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि PMLA का मकसद किसी को जेल में रखना नहीं है। सुप्रीम कोर्ट पहले भी अलग-अलग मामलों में इस तरह की टिप्पणी कर चुका है।

बेंच ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के वकील से कहा, 'मैं आपको साफ-साफ बताता हूं, कई केस देखने के बाद... देखिए 498A (शादीशुदा महिलाओं पर अत्याचार) के केस में क्या हुआ, अगर ED का यही रवैया रहा... अगर किसी को जबरदस्ती जेल में रखने की कोशिश की जाएगी, वो भी तब जब संज्ञान रद्द हो चुका हो, तो क्या कहा जा सकता है?'

बेंच ने गौर किया कि आरोपी को 8 अगस्त को हिरासत में लिया गया था और तब से वह जेल में है। हालांकि हाई कोर्ट ने सेशन कोर्ट के संज्ञान लेने के आदेश को रद्द कर दिया था। ED के वकील ने बेंच को बताया कि संज्ञान लेने का आदेश इसलिए रद्द हुआ क्योंकि सरकार से मंजूरी नहीं ली गई थी, न कि इसलिए कि अपराध साबित नहीं हुआ।

जस्टिस ओका ने कहा, 'हम किस तरह का संदेश दे रहे हैं? संज्ञान लेने का आदेश रद्द हो गया है - चाहे किसी भी आधार पर, और वह व्यक्ति अगस्त 2024 से हिरासत में है। यह सब क्या है?' बेंच ने आरोपी को जमानत देते हुए कहा कि संज्ञान आदेश रद्द होने के बाद उसे हिरासत में नहीं रखा जा सकता।

यह मामला छत्तीसगढ़ के शराब घोटाले से जुड़ा है, जिसमें एक IAS अधिकारी पर PMLA के तहत आरोप लगे थे। ईडी ने कोर्ट में पुरजोर तरीके से ये दलील रखने की कोशिश कि वे शातिर लोग जो देश को नुकसान पहुंचा रहे हैं, उनकी रक्षा नहीं होनी चाहिए। हालांकि, उसकी ये दलील नहीं चली। शीर्ष अदालत ने दो टूक कहा कि पीएमएलए के प्रावधानों का इस्तेमाल किसी आरोपी को जैसे भी हो, बस जेल में डाले रखने के लिए नहीं किया जा सकता।
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