केस 1: रायसेन के रहने वाले ललित यादव की बहन दिव्यांग हैं। वह जिले के सिरसोदा के प्रायमरी स्कूल में पदस्थ थीं, हाल ही में उनका तबादला इमलिया गांव के स्कूल में किया गया है। ये गांव मुख्य सड़क से पांच किलोमीटर अंदर है। वहां तक जाने का कोई साधन भी नहीं है।
केस 2: इटारसी के पथरोटा में पदस्थ मिडिल स्कूल टीचर रवि जैन ने भी तबादले के लिए आवेदन किया था। उन्होंने विकल्प के कॉलम में इटारसी के 12 स्कूलों के नाम भरे थे। उनका ट्रांसफर ऐसे स्कूल में हुआ, जो विकल्प में नहीं था। वहां पद भी खाली नहीं है।
ये सिर्फ दो मामले नहीं हैं। हाल ही में स्कूल शिक्षा विभाग ने जो तबादले किए हैं, उसमें अपनी ही नीति के नियमों को दरकिनार कर दिया है। जिसे जरूरत थी, उसका तबादला नहीं हुआ और जिन्हें इसकी जरूरत नहीं थी, उनका ट्रांसफर कर दिया गया। ट्रांसफर में हुई गड़बड़ियों को दुरुस्त कराने के लिए टीचर्स लोक शिक्षण संचालनालय के चक्कर काट रहे हैं।
इन्हें संचालनालय के अफसर जवाब दे रहे हैं कि अब प्रक्रिया खत्म हो चुकी है। भास्कर ने जब स्कूल शिक्षा मंत्री से बात की तो उन्होंने कहा कि कोई तकनीकी गड़बड़ी नहीं है। इतना बड़ा अमला जिस विभाग में हो तो वहां 100-50 विसंगतियां देखने को मिलती हैं, सरकार उसका निराकरण भी करती है। पढ़िए, किस तरह से स्कूल शिक्षा विभाग ने अपनी ही तबादला प्रक्रिया का पालन नहीं किया...
जिस पद के लिए तबादला, वो खाली नहीं इटारसी के शिक्षक रवि जैन ने ऑनलाइन तबादला प्रक्रिया के दौरान 12 स्कूलों को विकल्प के तौर पर भरा था, लेकिन उनका ट्रांसफर उस स्कूल में कर दिया गया जिसका नाम उन्होंने विकल्प में भरा ही नहीं था। हैरानी की बात यह है कि जिस पद के लिए रवि का तबादला हुआ है, वह पद उस स्कूल में खाली ही नहीं है।
रवि जब स्कूल में जॉइन करने गए तो स्कूल के प्राचार्य ने लिखित में दे दिया कि जिस पद पर उन्हें भेजा गया है, वह भरा हुआ है और वे उन्हें जॉइन नहीं करा सकते। जब रवि डीईओ कार्यालय पहुंचे तो जवाब मिला, ‘सारी प्रक्रिया ऑनलाइन है, हम कुछ नहीं कर सकते। अब तो डीपीआई ही कुछ कर सकता है।’ अब रवि लगातार डीपीआई के चक्कर काट रहे हैं।
दिव्यांग के साथ हार्ट और किडनी पेशेंट भी हैं सविता ललित यादव अपनी बहन सविता के तबादले को निरस्त करवाने के लिए डीपीआई कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं। उनकी 55 वर्षीय बहन प्राथमिक शिक्षक हैं। वह न सिर्फ दिव्यांग हैं, बल्कि उम्र के इस पड़ाव में दिल और किडनी की बीमारी से भी जूझ रही हैं। उनका स्वैच्छिक तबादला रायसेन के इमलिया गांव के प्रायमरी स्कूल में कर दिया गया है।
ये गांव मुख्य सड़क से करीब 5 किलोमीटर अंदर है। यहां तक पहुंचने के लिए कोई परिवहन सुविधा उपलब्ध नहीं है। ललित ने बताया कि वे सभी मेडिकल दस्तावेज लेकर डीपीआई पहुंचे तो कोई रिस्पॉन्स नहीं मिला। वे कहते हैं,











