बीमारी के कारण 21 साल दूर रहीं ट्रैक से, फिर भी कम नहीं हुआ एथलेटिक्स के प्रति जुनून, अब मलेशिया में तिरंगा लहराने की तैयारी

बीमारी के कारण 21 साल दूर रहीं ट्रैक से, फिर भी कम नहीं हुआ एथलेटिक्स के प्रति जुनून, अब मलेशिया में तिरंगा लहराने की तैयारी
भोपाल। कहते हैं कि खेलने की कोई उम्र नहीं होती है, उसके लिए जज्बा होना चाहिए। इस बात को भोपाल के आइटीआइ में पदस्थ निर्मला पाटिल ने सच कर दिखाया है। वह 50 वर्ष की हैं और उनका जज्बा किसी 20 वर्ष के एथलीट से कम नहीं हैं। वह लिवर की बीमारी से 21 साल बाद जंग जीतते ही मैदान में उतरीं और आठ राष्ट्रीय पदक हासिल कर लिए। अब वह मलेशिया में होने जा रहे अंतरराष्ट्रीय खेलों में भारत का परचम लहराने के लिए तैयार हैं।
निर्मला बताती हैं कि अब तक मिले पदक में एक स्वर्ण और दो सिल्वर अपने नाम कर चुकी हैं। उनके इसी प्रदर्शन की वजह से उनका मलेशिया अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए चयन हुआ है। जिसमें वह बाधा दौड़ और पैदल चाल प्रतियोगिता में भाग लेंगी।

लिवर में संक्रमण के कारण हो गई थीं मैदान से दूर

भोपाल के गोविंदपुरा आइटीआइ में सहायक ग्रेड दो के पद पर पिछले 12 साल से पदस्थ 50 वर्षीय निर्मला पाटिल ने नवदुनिया से बातचीत करते हुए बताया कि उनका जन्म पांच अप्रैल 1973 को बालाघाट जिले के छोटे से गांव खेड़ी में हुआ था। उन्होंने नौ नवंबर 1998 को जबलपुर स्थित कौशल संचालनालय में सेवा शुरू की। इसके बाद वह दो साल ही खेल सकी थीं और उनके लिवर में संक्रमण हो गया था। इस वजह से नागपुर स्थित अस्पताल में उनका आपरेशन हुआ। इस बीमारी के चलते वह शारीरिक कमजोरी के कारण 21 साल तक मैदान से दूर रहीं। जब वह पूरी तरह स्वस्थ हो गईं तो उन्होंने उन्होंने फिर से मैदान में उतरने का निर्णय लिया।

पैदल चाल में जीत चुकी हैं स्वर्ण पदक

निर्मला ने बताया कि वह 21 साल बाद जब मैदान में उतरीं तो दो साल में ही उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी छाप छोड़नी शुरू कर दी। वर्ष 2021 में हरियाणा में हुए आल इंडिया सिविल सर्विसेस खेल में पहुंचीं। यहां पदक नहीं मिला, लेकिन इसके बाद मई 2022 में तिरुवनंतपुरम में हुए नेशनल मास्टर्स में एक स्वर्ण और दो रजत पदक अपने नाम किए। यहां उन्होंने पांच हजार मीटर पैदल चाल में पहले स्थान प्राप्त करते हुए रजत पदक और 400 मीटर बाधा दौड़ में एक रजत पदक जीता। पश्चिम बंगाल के पश्चिम मिदनापुर में इंडिया मास्टर्स एथलीट्स मीट्स में उन्होंने 40-45, पांच हजार मीटर पैदल चाल में पदक जीता था। वह मिदनापुर में 10 किमी दौड़ और 1500 मीटर दौड़ में दूसरे स्थान पर रहीं। इस अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में श्रीलंका, बांग्लादेश एवं नेपाल के भी एथलीट्स शामिल हुए थे।
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