ऐसे की शुरुआत
बचपन की एक घटना से तिलक को बिजनेस शुरू करने का आइडिया आया था। दरअसल ऑफिस से लौटने के बाद जब कभी तिलक अपने पिता को बाजार से स्टेशनरी का सामान लाने के लिए कहते, तो बहुत ज्यादा थकान के चलते उनके पिता मना कर दिया करते थे। ऐसे में तिलक मेहता को किताबों की होम डिलीवरी करने का आइडिया आया। उन्होंने अपने बिजनेस प्लान पिता को बताया। तिलक ने कूरियर सर्विस की शुरू करने का पूरा प्लान तैयार कर लिया। पिता ने उन्हें शुरुआती फंड दिया, उनकी मुलाकात बैंक अधिकारी घनश्याम पारेख से करवाई, जिन्होंने तिलक के बिजनेस में निवेश किया। तिलक का आइडिया सुनकर उन्होंने बैंक की नौकरी छोड़कर बिजनेस ज्वाइन कर लिया। दोनों ने मिलकर पेपर एन पार्सल नाम की कुरियर सर्विस शुरू की।
क्या करती है कंपनी
साल 2006 में गुजरात में पैदा हुए तिलक मेहता पेपर एन पार्सल के फाउंडर हैं। पेपर्स एन पार्सल एक ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म है, जो शिपिंग और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी सेवाएं देता है। इसके लिए कंपनी के पास एक बड़ी टीम है। यह कंपनी अपने मोबाइल ऐप के जरिए लोगों को डोरस्टेप सर्विस देती है। उनकी कंपनी के साथ 200 कर्मचारी और 300 से ज्यादा डिब्बा वाले जुड़े हैं। इन कर्मचारियों के जरिए कंपनी हर रोज हजारों पार्सल डिलीवर करती है और इसके लिए करीब 40 से 180 रुपये तक का चार्ज करती है।
