मप्र में सोयाबीन की बुवाई धीमी, पिछले साल की तुलना में लगभग 1 लाख हेक्टेयर कम, सोपा ने जारी की रिपोर्ट

मप्र में सोयाबीन की बुवाई धीमी, पिछले साल की तुलना में लगभग 1 लाख हेक्टेयर कम, सोपा ने जारी की रिपोर्ट
इंदौर। मानसून के जोर पकड़ने के साथ सोयाबीन की बुवाई में सुधार हुआ है। आंकड़ो के लिहाज से अब भी बुवाई क्षेत्रफल में प्रदेश बीते साल की तुलना में पिछड़ा नजर आ रहा है। दि सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सोपा) की रिपोर्ट यह संकेत दे रही है।

सोपा ने 20 जुलाई तक के बुवाई के आंकड़े जारी किए हैं। इसके अनुसार मप्र में 49.854 लाख हेक्टेयक क्षेत्र में सोयाबीन बोया जा चुका है। बीते वर्ष इस अवधि में बुवाई 50.661 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी, उसके साथ में सोपा ने सरकार की बुवाई रिपोर्ट के आंकड़े भी प्रदर्शित किए हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार भी बुवाई पिछड़ी है। बीते साल 50.183 लाख हेक्टेयर में बुवाई सरकार की रिपोर्ट इस अवधि में बता रही थी। इस साल 40 लाख हेक्टेयर से भी कम बताया जा रहा है।

सोपा के आंकड़ों के अनुसार सोयाबीन की बुवाई कमजोर है। इसे एल-नीनो प्रभाव के कारण मानसून के थोड़ा देरी से आने का असर बताया जा रहा है। हालांकि सोपा ने कहा है कि अगले दो सप्ताह में बुवाई पूरी होने की उम्मीद है। उसके बाद के आंकड़े अंतिम कहे जा सकेंगे और निष्कर्ष देने योग्य होंगे। इसी बीच देशी-विदेशी बाजारों में खाद्य तेलों में तेजी का दौर शुरू हो गया है। इस वर्ष अगर सोयाबीन की बुवाई पिछड़ती है, तो खाद्य तेलों में तेजी को बल मिलेगा।


महाराष्ट्र में सोयाबीन की अच्छी बोवनी

सबसे बड़े सोयाबीन उत्पादक राज्य मप्र के आंकड़े तो कमजोर हैं, लेकिन महाराष्ट्र में सोयाबीन की अच्छी बोवनी बताई जा रही है। बीते साल इस अवधि में 43 लाख हेक्टेयर के मुकाबले महाराष्ट्र का आंकड़ा 44 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है। कुल मिलाकर दो सप्ताह बाद बुवाई के अंतिम आंकड़े आएंगे। इस आधार पर बाजार प्रतिक्रिया देगा।


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