शारदीय नवरात्रि: चौथे दिवस होती है मां कूष्माण्डा की पूजा, जानें विधि...

शारदीय नवरात्रि: चौथे दिवस होती है मां कूष्माण्डा की पूजा, जानें विधि...
नवरात्रि के चौथे दिन माता कूष्माण्डा की पूजा होती है, इन्हें सृष्टि की रचयिता माना जाता है. मान्यता के अनुसार, भक्त इस दिन व्रत-पूजन कर मां को प्रसन्न करते हैं और विशेष भोग अर्पित कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं. नवरात्रि का चौथा दिन मां दुर्गा के चौथे स्वरूप देवी कूष्माण्डा को समर्पित है. 26 सितंबर को माता कूष्माण्डा की पूजा-अर्चना की जाएगी. ऐसा माना जाता है कि देवी कूष्माण्डा ने अपनी मंद मुस्कान से ही इस ब्रह्मांड की रचना की थी, इसलिए उन्हें ‘सृष्टि की आदिस्वरूपा’ भी कहा जाता है. मां कूष्माण्डा को अष्टभुजा देवी के नाम से भी जाना जाता है. उनकी आठ भुजाओं में कमंडल, धनुष, बाण, अमृत से भरा कलश, चक्र, गदा, जपमाला और कमल का फूल सुशोभित है. मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा और सही भोग लगाने से माता शीघ्र प्रसन्न होती हैं और अपने भक्तों को आयु, यश, बल और आरोग्य का आशीर्वाद देती हैं.
महत्व : मां कूष्मांडा की पूजा करने से असाध्य रोगों से मुक्ति मिलती है. परिवार में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है. साधक की मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं और जीवन के संकट दूर हो जाते हैं.
पूजा विधि - प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थल को शुद्ध करें. माता की प्रतिमा या चित्र को स्थापित कर गंगाजल से शुद्ध करें. कलश स्थापना करें और दीपक जलाएं. माता को लाल फूल, सिंदूर, चंदन, धूप और दीप अर्पित करें. भोग के रूप में मालपुए, मीठा प्रसाद और फल अर्पित करें. ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः मंत्र का 108 बार जाप करें. अंत में मां की आरती करें और परिवार की मंगलकामना करें.
मां कूष्मांडा मंत्र  ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः॥ इस मंत्र के जाप से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और जीवन में सकारात्मकता का संचार होता है.
मां कूष्मांडा देवी की आरती : 
कूष्मांडा जय जग सुखदानी। मुझ पर दया करो महारानी॥
पिगंला ज्वालामुखी निराली। शाकंबरी माँ भोली भाली॥लाखों नाम निराले तेरे । भक्त कई मतवाले तेरे॥
भीमा पर्वत पर है डेरा। स्वीकारो प्रणाम ये मेरा॥
सबकी सुनती हो जगदंबे। सुख पहुँचती हो माँ अंबे॥
तेरे दर्शन का मैं प्यासा। पूर्ण कर दो मेरी आशा॥
माँ के मन में ममता भारी। क्यों ना सुनेगी अरज हमारी॥
तेरे दर पर किया है डेरा। दूर करो माँ संकट मेरा॥
मेरे कारज पूरे कर दो। मेरे तुम भंडारे भर दो॥
तेरा दास तुझे ही ध्याए। भक्त तेरे दर शीश झुकाए॥

मां कूष्माण्डा को अति प्रिय हैं ये भोग : देवी कूष्माण्डा को प्रसन्न करने के लिए विशेष रूप से मालपुए का भोग लगाया जाता है. यह भोग माता को बहुत ही प्रिय है. मालपुआ: नवरात्रि के चौथे दिन भक्त श्रद्धापूर्वक घर में मालपुआ बनाकर माता को अर्पित करते हैं. 
सफेद पेठा: मां कूष्माण्डा को सफेद पेठा भी अर्पित किया जाता है, जिसका एक नाम कूष्माण्ड भी है, इसीलिए माता का नाम ‘कूष्माण्डा’ पड़ा. आप चाहें तो पेठे की मिठाई या पेठे से बनी अन्य सात्विक चीज़ें भी भोग में शामिल कर सकते हैं.
पीले रंग की मिठाइयां: चूंकि मां कूष्माण्डा को पीला रंग प्रिय है, इसलिए भोग में पीले रंग की मिठाई, जैसे- केसर पेठा या केसरिया हलवा भी शामिल करना शुभ माना जाता है.
दही और हलवा: कई स्थानों पर मालपुआ के साथ दही और हलवा का भोग लगाने की भी परंपरा है, विशेषकर विवाहित महिलाओं को भोजन कराते समय.
भोग लगाने का महत्व : धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कूष्माण्डा को मालपुए का भोग लगाने और फिर उस प्रसाद को किसी ब्राह्मण या गरीब को दान करने से बुद्धि का विकास होता है और निर्णय लेने की क्षमता में सुधार आता है. यह उपाय कुंडली में बुध ग्रह की कमजोर स्थिति को सुधारने में भी अत्यंत लाभकारी माना जाता है.
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