मां शैलपुत्री का ऐसा है स्वरूप
मां शैलपुत्री का स्वरूप बेहद शांत, सुशील, सरल और दया से पूर्ण होता है। माता के दाएं हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल का पुष्प शोभायमान है। ये माता रानी के अद्भुत और शक्ति से भरे स्वरूप का प्रतीक होता है। शैलपुत्री माता की सवारी वृषभ होने के कारण उन्हें वृषभारूढ़ा भी कहा जाता है। उनका तपस्वी रूप बहुत ही प्रेरणादायक नजर आता है। माता ने घोर तपस्या की, जो समस्त जीवों की रक्षिका हैं। नवरात्रि के पहले दिन इनकी पूजा और व्रत करने से माता विशेष रूप से कष्टों से मुक्ति दिलाती हैं। कोई भी विपत्ति पड़ने पर मां शैलपुत्री भक्तों की रक्षा करती हैं और उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण कर देती हैं। मां शैलपुत्री साधक के मूलाधार चक्र को जागृत करने में भी सहायता करती हैं। यह चक्र हमारे शरीर का ऐसा ऊर्जा केंद्र है दो हमें स्थिरता, सुरक्षा और मानसिक शांति दिलाता है।
नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा विधि
माता की पूजन विधि का वर्णन भागवत पुराण में भी मिलता है। शारदीय नवरात्रि के पहले दिन शैलपुत्री मां की पूजा करने के लिए सबसे पहले सुबह जल्दी उठें क्योंकि उनकी पूजा का आरंभ ब्रह्म मुहूर्त में होता है।
ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करके शुद्ध व साफ वस्त्र धारण करें। इसके बाद, एक चौकी पर गंगाजल छिड़ककर उसे शुद्ध कर लें।अब मां शैलपुत्री प्रतिमा या मूर्ति चौकी पर स्थापित करें और पूरे परिवार के साथ विधि-पूर्वक कलश की स्थापना कर लें। इसके बाद, मां शैलपुत्री के ध्यान मंत्र का उच्चारण करें।











