दूसरे चरण के कार्य 31 अगस्त तक पूरे होना मुश्किल, रूद्रसागर पर पैदल ब्रिज का निर्माण अधूरा

दूसरे चरण के कार्य 31 अगस्त तक पूरे होना मुश्किल, रूद्रसागर पर पैदल ब्रिज का निर्माण अधूरा

उज्जैन। ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर मंदिर के नवविस्तारित क्षेत्र में आकार ले रही ‘श्री महाकाल महालोक योजना- 2’ के समस्त कार्य 31 अगस्त तक पूर्ण होना मुश्किल हैं। रूद्रसागर पर पैदल ब्रिज का निर्माण कार्य तो इस साल पूरा होता दिखाई भी नहीं देता।

महाराजवाड़ा स्कूल भवन को हैरिटेज धर्मशाला में तब्दील करने, महाकाल मैदान पर बेसमेंट पार्किंग के साथ हाकर्स जोन बनाने की योजना भी पिछड़ती दिख रही है। कुल मिलाकर महीने भर पहले कलेक्टर कुमार पुरुषोत्तम ने 31 अगस्त तक योजना के सारे काम पूरे कराने के जो निर्देश उज्जैन स्मार्ट सिटी कंपनी के इंजीनियर और ठेकेदार फर्म को दिए थे, उसका पालन होता नजर नहीं आता है।

‘श्री महाकाल महालोक योजना’ के पहले चरण में बड़ा रूद्रसागर किनारे विशाल मूर्तियों के रूप में 395 करोड़ रुपये की योजना आकार ले चुकी है, जिसका लोकार्पण गत वर्ष 11 अक्टूबर 2022 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कर चुके हैं। दूसरे चरण में 779 करोड़ रुपये के स्वीकृत 22 कार्यों में से 19 कार्य वर्तमान में प्रचलित हैं।

अक्टूबर में विधानसभा चुनाव आचार संहिता लागू होने की सुगबुगाहट है, जिससे कलेक्टर कुमार पुरुषोत्तम ने सारे कार्य 31 अगस्त तक पूर्ण कराकर सितंबर में लोकार्पित कराने के निर्देश पिछले माह 15 जुलाई को दिए थे। छोटा रुद्रसागर किनारे 21 करोड़ 52 लाख रुपये के कायाकल्प योजना के निर्माण कार्य 31 जुलाई, महाराजवाड़ा बेसमेंट पार्किंग, हाकर्स जोन, नीलकंठ वन का निर्माण 15 अगस्त से पहले पूर्ण कराने के निर्देश दिए थे।

रूद्रसागर सागर किनारे बनाई ध्यान कटी का नामकरण पौराधिक आधार पर रखने को कहा था। 7 करोड़ 53 करोड़ रुपये की लागत से महाकाल मंदिर की पश्चिम दिशा में देवास धर्मशाला की ओर आपातकालीन प्रवेश द्वार का निर्माण 15 अगस्त तक पूर्ण करने के निर्देश दिए थे।

हेरिटेज धर्मशाला के रूप में बन रहे महाराजवाड़ा काम्प्लेक्स और उसके आसपास लैंड स्केपिंग का काम 10 अगस्त से पहले पूर्ण कराने को कहा था। महाकाल मंदिर पहुंच के लिए सरस्वती शिशु मंदिर वाला मार्ग, बड़ा गणेश मंदिर वाला मार्ग, गंगा गार्डन से नृसिंह घाट को जोड़ने वाला मार्ग और महाकाल चौराहे का मार्ग का निर्माण 31 जुलाई से पहले पूर्ण कराने के निर्देश दिए थे। खास बात ये है कि निर्देशों के तहत एक भी काम समय सीमा में पूर्ण नहीं हो पाया है।

दीवार पर शैल चित्र लगाने में भी देरी

नीलकंठ वन पहुंच मार्ग (आर-18) किनारे बनाई पांच मीटर ऊंची, 280 मीटर लंबी दीवार पर शैल चित्र बनाकर लगाने, रूद्र सागर पैदल पुल का निर्माण, अन्नक्षेत्र एवं प्रवचन हॉल को हटाकर वैदिक थीम पर तैयार किये जा रहे लैंडस्केपिंग एवं शिखर दर्शन का कार्य भी बहुत धीमा चला है। इन कार्यों की गति को लेकर पिछले माह कलेक्टर ने नाराजगी भी जताई थी।

वेटिंग हाल का निर्माण भी पिछड़ा

उज्जैन विकास प्राधिकरण 23 करोड़ रुपये से महाकाल मंदिर परिसर में बनाए जा रहे नए वेटिंग हाल का निर्माण भी पिछड़ा है। दावा किया गया था कि इसका निर्माण भी 31 अगस्त से पहले पूर्ण करवा लिया जाएगा। इस हाल के बनने से भीड़ प्रबंधन में मदद मिलेगी। आंतरिक निर्माण कार्यों की वजह से महाकाल मंदिर परिसर का क्षेत्रफल 25 हजार से 78 हजार वर्गफीट हो जाएगा। मंदिर में जलस्तंभ, पाथवे, क्लेडिंग, नए वेटिंग हाल से गणेश मंडपम जाने का मार्ग, टनल-1 से कार्तिकेय मंडपम तक का कार्य, नंदी हाल के रिनोवेशन का कार्य 15 अगस्त तक पूर्ण कराने का दावा था।

ये काम चालू ही न हुए

महाकाल महालोक योजना-2 में शामिल इंदौर गेट रेलवे स्टेशने महाकाल महालोक तक 209 करोड़ रुपये से रोप-वे बनाने का काम, कमल तालाब में लाइट एंड साउंड शो और बड़े रूद्रसागर में थ्री डी वाटर स्क्रीन प्रोजेक्शन शो के जरिये ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर के प्राकट्य और उज्जयिनी की गौरव गाथा सुनाने काे 32 करोड़ रुपये का काम शुरू ही न हो सका है। जबकि इस कार्य के लिए राशि मंजूर हुए कई महीने बित चुके हैं। रामघाट को पुरातन स्वरूप में निखारने पर लगी रोक भी अब तक नहीं हट सकी है। इस कारण स्वीकृत 13 करोड़ रुपये का काम ठप्प पड़ा है।

स्मार्ट सिटी के कार्यकारी निदेशक ने किया निरीक्षण

कार्यों को गति देने के लिए स्मार्ट सिटी कंपनी के कार्यकारी निदेशक रोशन कुमार सिंह ने गुरुवार को निरीक्षण किया। उन्होंने काम गुणवत्ता के साथ समय सीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए। इंजीनियराें से कहा कि निगरानी ठीक होगी तो काम तेजी से निश्चित होगा।

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