श्रवण नक्षत्र में शुरू हुआ सावन: आयुष्मान योग और चार शुभ राजयोगों का दुर्लभ संयोग, शिवालयों में उमड़ी श्रद्धा

श्रवण नक्षत्र में शुरू हुआ सावन: आयुष्मान योग और चार शुभ राजयोगों का दुर्लभ संयोग, शिवालयों में उमड़ी श्रद्धा

रायपुर। श्रावण मास की पावन शुरुआत गुरुवार, 30 जुलाई से श्रवण नक्षत्र में हुई। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार श्रवण नक्षत्र देवगण नक्षत्र माना जाता है और इस नक्षत्र में किए गए मंत्र जाप, ध्यान, रुद्राभिषेक और व्रत का विशेष फल प्राप्त होता है। इस वर्ष सावन के पहले दिन आयुष्मान योग के साथ शश महापुरुष राजयोग, हंस राजयोग और गुरु-आदित्य राजयोग जैसे शुभ संयोग भी बन रहे हैं, जिससे धार्मिक दृष्टि से इस दिन का महत्व और बढ़ गया है।

23 साल बाद सोमवार को पड़ेगी नाग पंचमी

इस वर्ष सावन में एक और दुर्लभ संयोग बन रहा है। करीब 23 वर्षों बाद नाग पंचमी सोमवार के दिन मनाई जाएगी। भगवान शिव के प्रिय दिन सोमवार और नाग पंचमी का एक साथ पड़ना श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत शुभ माना जा रहा है। वहीं सावन के प्रत्येक मंगलवार को सुहागिन महिलाएं मंगला गौरी व्रत रखकर अखंड सौभाग्य और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करेंगी।

हाटकेश्वरनाथ मंदिर में सुबह 4 बजे हुई प्रथम आरती

राजधानी रायपुर के महादेव घाट स्थित हाटकेश्वरनाथ मंदिर में श्रावण मास की पहली आरती गुरुवार तड़के सुबह 4 बजे संपन्न हुई। आरती से पहले भगवान शिव का जलाभिषेक और विशेष श्रृंगार किया गया। मंदिर के पट प्रतिदिन सुबह से रात 10 बजे तक श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खुले रहेंगे। शहर के अन्य प्रमुख शिवालयों में भी सावन को लेकर विशेष पूजा-अर्चना और व्यवस्थाएं की गई हैं।

गोधूलि बेला से पहले करें जलाभिषेक

कवर्धा स्थित भोरमदेव मंदिर के पंडित आशीष शास्त्री ने बताया कि भगवान शिव को जल अत्यंत प्रिय है। ब्रह्म मुहूर्त से लेकर गोधूलि बेला से पूर्व तक किया गया जलाभिषेक विशेष पुण्यदायी माना जाता है।

पूरा सावन भगवान शिव को समर्पित

महादेव घाट स्थित हाटकेश्वरनाथ मंदिर के महंत पंडित सुरेश गिरी ने बताया कि श्रावण मास का प्रत्येक दिन भगवान शिव की आराधना के लिए शुभ होता है। उन्होंने कहा कि यदि कोई विशेष मुहूर्त या योग न भी हो, तब भी सावन में श्रद्धापूर्वक किया गया शिव पूजन, रुद्राभिषेक और जलाभिषेक अनंत पुण्य और मनोकामनाओं की पूर्ति का फल प्रदान करता है।

सावन के पहले दिन प्रदेशभर के शिव मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं। भक्तों ने जल, बेलपत्र, धतूरा और पुष्प अर्पित कर भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त किया।


Advertisement