झारखंड की सियासत मौजूदा समय में संविधान के प्रतिकूल काम कर रही है। ऑल इज वेल की बात तो दूर है। हालात ये हैं कि केंद्र सरकार यहां राष्ट्रपति शासन लागू कर दे तो कोई आश्चर्य नहीं होगा। ये कहना है जमशेदपुर पूर्वी से निर्दलीय विधायक और पूर्व मंत्री सरयू राय का।
उन्होंने कहा कि हालात ऐसे हैं कि राज्य में कानून का शासन नहीं है। संविधान के नियमों के प्रतिकूल सरकार चलाई जा रही है। ऐसे स्थिति में सरकार का बने रहना सही नहीं होगा। झारखंड में जारी सियासी उठा-पटक और ईडी की कार्रवाई पर दैनिक भास्कर ने उनसे खास बातचीत की।
सवाल- आप किस आधार पर कह रहे हैं कि राज्य में राष्ट्रपति शासन लग सकता है?
जवाब- पहले सरफराज अहमद जैसे सीनियर लीडर का इस्तीफा करा दिया गया। अब कयास लगाए जा रहे हैं कि ये सीएम की प्लानिंग का हिस्सा है। ईडी अगर उन्हें जेल भेजती है तो वे अपनी पत्नी या परिवार के किसी अन्य सदस्य को यहां से चुनाव लड़वा दें। इसीलिए ये इस्तीफा हुआ है। जैसे ही हेमंत सोरेन कुर्सी छोड़ेंगे और उनकी जगह कोई दूसरे पद ग्रहण करेंगे तो राज्यपाल उन्हें बहुमत साबित करने के लिए कहेंगे। इस बात की बहुत कम उम्मीद है कि दूसरी बनने वाली सरकार बहुमत साबित कर सके।
ऐसे में राज्यपाल कोई वैकल्पिक सरकार बनाने के लिए भाजपा को आमंत्रित करेंगे। नहीं तो राजनीतिक अस्थिरता का हवाला देकर राष्ट्रपित शासन लागू कर देंगे। विधानसभा को निलंबित कर के चाहें तो लोकसभा के बाद या लोकसभा के साथ विधानसभा का चुनाव करा सकते हैं।
सवाल- हेमंत सरकार के पास तो बहुमत है। विधायक उनका समर्थन भी कर रहे हैं?
जवाब- सीएम की कुर्सी खतरे में है। ये मैं 4-5 महीनों से कहते आ रहा हूं। सियासत का ये मतलब नहीं है कि बहुमत में हैं तो जो काम गलत हैं, होते रहे। उनसे पैसे आते रहे। विधायकों को खुश कर के रखें । अफसरों का ऐसा समूह जो भ्रष्टाचार में सरकार की मदद करे। ये सरकार प्रायोजित भ्रष्टाचार हो जाएंगे। तब संविधान और कानून के प्रावधान कहां रह जाते हैं।
ऐसे कई उदाहरण सामने आने के बाद ईडी की एंट्री हुई। लेकिन ईडी बहुत स्लो कार्रवाई कर रही है। यहां ईडी को और तेजी से कार्रवाई करने की जरूरत है। पीएमएलए (प्रिविंसन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग) एक्ट के तहत जो अधिकार ईडी को दी गई है, उसका पूरा इस्तेमाल करना चाहिए। अभी ईडी झारखंड में एक समन भेजने वाली एजेंसी बन गई है।
कोई भी जांच करने वाली संस्था समन भेजती है, जांच और पूछताछ के लिए तो उन्हें आगे की नीति और रणनीति भी तय करनी चाहिए कि इसके आगे होगा क्या? इसके आगे क्या करेंगे? ऐसे में आरोप लगने लगा कि ईडी राजनीतिक दुर्भावना से काम कर रही है।
सवाल- क्या आपको लगता है हेमंत सोरेन पर कार्रवाई करने के मामले में ईडी देरी कर रही है?
जवाब- ईडी को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए। ईडी ने अगर समय से कार्रवाई की होती तो आज यहां सरकार की तस्वीर अलग होती। जिस दिशा में ईडी की कार्रवाई हो रही है, जो सबूत उन्होंने जुटाए हैं, उससे सीएम पर कार्रवाई तय है।
सवाल- ईडी की कार्रवाई में देरी के आपको क्या कारण लगते हैं?
जवाब- जब समन भेज रहे हैं, तब कोई न कोई आधार होगा। ईडी क्यों देर कर रही है? ये समझ नहीं आ रहा है। इस देरी से ईडी की साख पर भी असर पड़ रहा है। क्या वो किसी के हाथ की कठपुतली बन गई है। क्या ईडी भी कार्रवाई से पहले राजनीतिक लाभ और हानि का आकलन कर रही है। ऐसा क्या कारण है कि भ्रष्टाचार के पुख्ता प्रमाण के बाद भी एक कदम आगे नहीं बढ़ा रही है। पीएमएलए एक्ट के अधिकार का इस्तेमाल ये अब नहीं करेंगे तो कब करेंगे।
सवाल- ईडी पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि बीजेपी के इशारे पर काम कर रही है, इसे कैसे देखते हैं?
जवाब- जो मुद्दे ईडी ने उठाए हैं। जांच के बाद भ्रष्टाचार के सबूत ईडी ने सामने लाए हैं, उस पर कोई कुछ नहीं बोल रहे हैं कि ये सही है कि गलत है। केवल आरोप लगाया जा रहा है कि बीजेपी के इशारे पर ईडी काम कर रही है। ईडी ने खनन घटाला से लेकर जमीन घोटाले की जांच की और बहुत सारे सबूत जुटाए।
सवाल- क्या बीजेपी के नेता बयानबाजी कर ईडी का काम बिगाड़ दे रहे हैं
जवाब- बीजेपी के लोगों को एक सीमा से अधिक प्रेस मीडिया में नहीं जाना चाहिए। बीजेपी के नेताओं के बोलने से ईडी की जांच तेज नहीं हो जाएगी। बल्कि भाजपा पर ही आरोप लगेंगे कि ईडी पक्षपात कर रही है।
सवाल- जब हेमंत सोरेन सीएम बने थे तब तो आपने उनका समर्थन किया था
जवाब-मैं दो साल से बड़ी गहराई से यहां की चीजों को देख रहा हूं। ये सच है शुरू में जब हेमंत सोरेन की सरकार बनी थी तो हमने इसका समर्थन किया था। धीरे-धीरे ऐसी परिस्थिति बनने लगी तो हमें आश्चर्य होने लगा कि सरकारें ऐसी ही कामों के लिए बनती है।
जिन्हें नियम बनाना और पालन कराना है, अगर वही नियम को तोड़ने-मरोड़ने लगें तो हमलोग लोकतंत्र के प्रति आस्था को कैसे कायम रख सकते हैं। मैंने सीएम से कई बार मिलकर उन्हें बताने की कोशिश की कि जो चीजें हो रही हैं सही नहीं हो रही है।
लेकिन कोई परिवर्तन नहीं हुआ है। भ्रष्टाचार इतनी तेजी से बढ़ता चला गया कि जिस सत्ता तंत्र को भ्रष्टाचार रोकना है, वही इसमें शामिल होता चला गया। इनका एक ही उद्देश्य रह गया कि योजनाओं के लिए बजट के माध्यम से जो धन मिलते हैं उनका कैसे अधिक से अधिक पॉकेट में लाया जाए। बजट से ही सरकार में शामिल लोगों को शेयर मिलने लगा।











