जमीन को आवासी घोषित न किया तो विकास में पिछड़ जाएगा संत हिरदाराम नगर

जमीन को आवासी घोषित न किया तो विकास में पिछड़ जाएगा संत हिरदाराम नगर

भोपाल। शहर के मास्टर प्लान ड्राफ्ट में संत हिरदाराम नगर (बैरागढ़) के सीहोर नाका एवं इससे लगी रोड की जमीन को कैचमेंट के दायरे में लाने का यहां के संगठनों ने कड़ा विरोध किया है। संगठनों ने तय समयसीमा में आपत्ति भी दर्ज कराई, लेकिन अभी तक इनका निराकरण नहीं हो सका है। किसान भी कैचमेंट का दायरा बढ़ाने का विरोध कर रहे हैं।

मास्टर प्लान 2031 के लिए पूज्य सिंधी पंचायत ने सीहोर नाके से भैंसाखेड़ी तक के क्षेत्र को आवासीय एवं व्यवसायिक करने का सुझाव दिया था। यह जमीन अभी कृषि है, लेकिन डायवर्सन कराने के बाद यहां व्यवसायिक गतिविधियां शुरू भी हो चुकी हैं। मास्टर प्लान जारी नहीं होने से मामला अटक गया। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता त्रिलोक दीपानी का कहना है कि बैरागढ़ के विकास के लिए सबसे जरूरी है सीहोर नाका एवं इसके बाद की जमीन पर निर्माण की अनुमति दी जाए। प्रशासन बड़े तालाब के फुल टैंक लेवल से 50 मीटर दूरी पर भी निर्माण की अनुमति नहीं दे रहा है। इस कारण विकास की गति थम गई है। लोग अवैध निर्माण करने पर मजबूर हैं। यदि प्रशासन मैरिज गार्डन, मनोरंजन क्षेत्र एवं होटल आदि की विधिवत अनुमति दे तो शासन को भी राजस्व मिलेगा और इलाके का सुंदरीकरण भी होगा।

विकास के लिए भू उपयोग बदलें

पंचायत के पदाधिकारी हरीश मेहरचंदानी का कहना है कि बैरागढ़ के आसपास के जमीनों को आवासीय घोषित किया जाना चाहिए। कुछ जमीन ग्रीन बेल्ट में है। कुछ जमीन कैचमेंट में है। इस कारण बैरागढ़ का समुचित विकास नहीं हो पा रहा है। पंचायत ने वैकल्पिक मार्ग बनाने का सुझाव भी दिया है। जिला योजना समिति के पूर्व सदस्य नरेश ज्ञानचंदानी ने बैरागढ़ से ग्राम भौंरी तक के क्षेत्र को मिसरोद रोड की तरह विकसित करने का सुझाव दिया है। उन्होंने किसानों की आपत्तियों को निराकरण वीडियो कांफ्रेंसिंग के बजाय गांवों में जाकर करने का आग्रह किया है। इस संबंध में उन्होंने नगर एवं ग्राम निवेश विभाग के अधिकारियों को पत्र भी लिखा है।

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