भोपाल । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन एवं प्रेरणा से मध्यप्रदेश में यूनेस्को द्वारा घोषित विश्व धरोहर स्थल सांची को राष्ट्र की प्रथम सोलर सिटी के रूप में विकसित किया गया है। भगवान बुद्ध की शिक्षा एवं दर्शन के अनुरूप विश्व पटल पर माननीय प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए पंचामृत के मूल मंत्र का अनुसरण कर मध्यप्रदेश नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में नित नए नवाचार कर रहा है। सांची सोलर सिटी का विकास इसी क्रम में नवीन शृंखला है। यह बात नवकरणीय ऊर्जा मंत्री हरदीप सिंह डंग ने सांची सोलर सिटी को लेकर नवदुनिया से चर्चा में कही।
नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में अच्छी पहल
मंत्री डंग ने बताया कि जलवायु परिवर्तन एवं ग्लोबल वार्मिंग वैश्विक समस्या है, जिसका समाधान ढूंढ़ने के लिए सम्पूर्ण विश्व एकजुट होकर कार्य कर रहा है। भारत विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है एवं द्रुत गति से शीर्ष अर्थव्यवस्था बनने की राह पर अग्रसर है। अतः सम्पूर्ण विश्व भारत से जलवायु परिवर्तन एवं ग्लोबल वार्मिंग जैसी समस्यायों के निदान हेतु आशान्वित है। विश्वपटल पर भारत की साख को सुदृढ़ करने, नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में नेतृत्व तथा मार्गदर्शन प्रदान करने के उद्देश्य को पूर्ण करने के लिए मध्यप्रदेश शासन जिस तत्परता एवं सजगता से कार्य कर रहा है, सांची सोलर सिटी उसी का एक अंग है।
जनभागीदारी से ग्रीन सिटी का सपना साकार
नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग मध्यप्रदेश शासन ने मध्यप्रदेश अक्षय ऊर्जा नीति 2022 का निर्माण किया है। इसमें प्रदेश में स्थित विरासत स्थलों और पर्यटन स्थलों को ग्रीन सिटी के रूप में बदलने की सराहनीय परिकल्पना की गई है। परिकल्पना को मूर्त रूप देने के लिए मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम ने अपने अथक प्रयासों से सांची को मध्य प्रदेश की पहली ग्रीन सिटी के रूप में विकसित किया है। विश्व धरोहर स्थल सांची जैसे अत्यंत महत्व के शहर को ग्रीन सिटी के रूप में बदलने के लिए मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम द्वारा संकल्पित एवं सुनियोजित कार्ययोजना में हुई अनेक पहल पर संगठित रूप से कार्य किया गया। राज्य शासन की भागीदारी के साथ जनभागीदारी भी सुनिश्चित की गई। ग्रीन सिटी की परिकल्पना को मूर्त रूप देने में जन भागीदारी को एक अत्यंत महत्वपूर्ण आधार स्तम्भ बनाया गया।
सोलर सिटी के साथ नेट जीरो कार्बन सिटी भी
सांची को राष्ट्र की प्रथम सोलर सिटी के साथ नेट जीरो कार्बन सिटी के रूप में विकसित करने हेतु पहल भी कर दी गई है। परम्परागत ऊर्जा स्रोतों को गैर.परम्परागत ऊर्जा स्रोतों से प्रतिस्थापित करने की इस अनूठी एवं क्रान्तिकारी पहल के केंद्र में जनभागीदारी को रखने के विचार की पूर्ति के लिए हर घर सौर, हर घर के लिए सौर की परिकल्पना की गई। प्रत्येक निवासी को उनके लिए ऐसे उत्पाद की उपयोगिता के आधार पर अपनी पसंद के ऑफग्रिड सौर उत्पाद के उपयोग हेतु प्रोत्साहित किया गया।
लोगों को बनाया जा रहा ऊर्जा साक्षर
ऊर्जा साक्षरता अभियान के माध्यम से सांची के प्रत्येक निवासी को ऊर्जा प्रबंधन के बारे में साक्षर बनाया जा रहा है। ऊर्जा साक्षरता अभियान के अंतर्गत वेबसाइट के माध्यम से पाठ्य सामग्री उपलब्ध कराई गई, जिसे आमजन अपनी सुविधानुसार देख एवं समझ सकते हैं। पायलट आधार पर भविष्य की तकनीकों एवं अवधारणाओं को बढ़ावा देने के लिए सांची में नए अभिनव प्रोजेक्ट स्थापित किए गए हैं। ये पायलट प्रोजेक्ट नवीकरणीय ऊर्जा के प्रति आम लोगों में जागरूकता और रुचि पैदा करेंगे। सांची को स्वच्छ और हरित शहर के रूप में बदलने के इस अभिनव प्रयोग में स्तूप पहुंच मार्ग पर हाईमास्ट सोलर लाइटए सोलर स्टड भी स्थापित किए गए हैं। विश्वपटल पर प्रधानमंत्री मोदी द्वारा किये गए आह्वान पर नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग ने मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में सांची को सोलर सिटी के रूप में विकसित किया है।
वैश्विक धरोहर स्थली को मिल रही नई पहचान
गौरतलब है कि सांची मध्यप्रदेश के रायसेन जिले में एक छोटा सा शहर है जो भोपाल से लगभग 46 किलोमीटर उत्तर पूर्व में स्थित है। सांची अपने बौद्ध धर्म से जुड़ी आस्थाओं, निहित शांति के संदेशों एवं महान स्तूपों के लिए प्रसिद्ध हैं। सांची के स्तूप भारत की सबसे पुराने पाषाण संरचनाओं में से एक है और भारतीय वास्तुकला एवं कार्यकुशलता का एक महत्वपूर्ण प्रतिबिम्ब है। इस स्थल को 1989 में यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल के रूप में घोषित किया गया है।