मानवाधिकारों से अलग नहीं हैं सुरक्षित गर्भपात -1

मानवाधिकारों से अलग नहीं हैं सुरक्षित गर्भपात -1
विश्व स्वास्थ्य दिवस 2025 पर हमें यह पुन: आह्वान करने की आवश्यकता है कि सुरक्षित गर्भपात भी एक मानव अधिकार है और स्वास्थ्य अधिकारों में शामिल है। अनेक ऐसे वैश्विक समझौते या संधि हैं (जैसे कि CEDAW 1979, जो कानूनी रूप से बाध्य संधि है), जहाँ हमारी सरकारों ने गर्भपात अधिकार को सम्मान देते हुए प्रजनन और यौनिक स्वास्थ्य के अनेक वायदे किए हैं। परंतु, पितृसत्ता के चलते अनेक महिलाएं, सुरक्षित गर्भपात सेवाओं से वंचित रह जाती हैं। कुछ देशों में जहाँ गर्भपात ग़ैर-कानूनी है वहाँ  महिलाएं कानूनी उत्पीड़न का खतरा उठा कर असुरक्षित गर्भपात की ओर बढ़ने को मजबूर होती हैं। गर्भपात, वैश्विक स्तर पर प्रजनन स्वास्थ्य का एक सामान्य और सुरक्षित हिस्सा है, परंतु समाज में व्याप्त गर्भपात के प्रति कलंक के कारण दुनिया के अधिकांश हिस्सों में इसे एक स्वास्थ्य सेवा के रूप में नहीं देखा जाता है। गर्भपात-संबंधित सेवाएं लेने में महिलाओं को अनेक बाधाओं का सामना करना पड़ता है जिनके कारण उनके शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। गर्भपात संबंधित भेदभाव और शोषण के कारण ही वे अपने प्रजनन अधिकारों से लाभान्वित होने से वंचित रह जाती हैं। भारत सरकार ने सराहनीय कदम उठाये हैं जिससे कि जरूरतमंद और पात्र महिलाएं, कानून के अनुरूप गर्भपात सेवाओं का लाभ उठा सकें। हालांकि समस्या तब तक जटिल ही मानी जाएगी यदि एक भी गर्भपात की इच्छुक पात्र महिला इस सेवा से वंचित रह जाए या असुरक्षित विकल्प की ओर जाने के लिए विवश हो। आखिरकर, इन वैश्विक समझौतों और कानूनी-रूप से बाध्य संधिओं का क्या औचित्य है यदि एक भी महिला, गर्भपात, या किसी अन्य प्रजनन और यौनिक स्वास्थ्य सेवा से वंचित रह जाये? गर्भपात का अधिकार हमारी सरकारों द्वारा बीजिंग घोषणापत्र 1995 और कानूनी रूप से बाध्य "सीईडीएडबल्यू" (कन्वेंशन ऑन द एलिमिनेशन ऑफ़ ऑल फ़ॉर्म्स ऑफ़ डिस्क्रिमिनेशन अगेंस्ट वोमेन) तथा अन्य समझौतों और घोषणाओं में निहित वायदों का हिस्सा है, तथा लैंगिक और यौनिक समानता और मानव अधिकारों के लिए संयुक्त राष्ट्र सतत विकास लक्ष्य-5 को प्राप्त करने के लिए भी महत्वपूर्ण है, फिर भी इस पर वैश्विक प्रगति संतोषजनक नहीं है। संयुक्त राष्ट्र की स्वास्थ्य अधिकार की विशेष राजदूत डॉ. ट्लालेंग मोफोकेंग ने कहा, "हम स्वास्थ्य और जेंडर समानता के अधिकार को सबके लिए हकीकत बनाने में असफल रहे हैं। सतत विकास लक्ष्यों  के लिए एक साझा दृष्टिकोण और कार्य योजना के साथ प्रतिबद्ध होने के बावजूद, हम संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों के वायदों को पूरा करने में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर रहे हैं।" महिलाओं और लड़कियों को शारीरिक स्वायत्तता का अधिकार है - अर्थात बिना किसी दबाव या हिंसा के अपने शरीर के बारे में पूरी जानकारी और समझ के साथ स्वतंत्र निर्णय लेने का अधिकार है। हम शारीरिक स्वायत्तता का उल्लंघन तब देखते हैं जब विकल्प और निर्णय लेने की कमी के कारण अनियोजित गर्भावस्था होती है, या असुरक्षित गर्भपात होता है जो मातृ-मृत्यु और रुग्णता का एक प्रमुख (लेकिन पूरी तरह से रोकथाम योग्य) कारण है। वैश्विक स्तर पर, 10 में से 6 अनियोजित गर्भधारण, गर्भपात में समाप्त होते हैं, और इनमें से लगभग 45% गर्भपात असुरक्षित होते हैं। प्रेरित गर्भपात (इंड्यूस्ड एबॉर्शन) वास्तव में बहुत आम है - अनुमानतः दुनिया भर में हर साल 7.3 करोड़ प्रेरित गर्भपात होते हैं। लगभग 61% (या 6 में से 1) अनियोजित गर्भधारण, प्रेरित गर्भपात में समाप्त होते हैं - इसलिए ये ऐसे गर्भधारण हैं जिनकी योजना नहीं बनाई गई थी - और वैश्विक स्तर पर सभी गर्भधारण का 29% (या 10 में से 3) गर्भपात में समाप्त होता है। इस प्रकार विश्व भर में अनियोजित और इच्छित गर्भधारण दोनों की काफी महत्वपूर्ण संख्या गर्भपात में समाप्त होती है। सुप्रसिद्ध महिला अधिकार कार्यकर्ता और स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ सुचित्रा दहलवी ने कहा था कि यह भी तो संभव है कि गर्भधारण के समय भले ही दंपति गर्भावस्था के इच्छुक रहे हों परंतु बाद में महिला इच्छुक न रहे। यदि किसी महिला की इच्छा हो तो सुरक्षित गर्भपात का विकल्प हर पात्र महिला के पास हमेशा होना चाहिए। लेकिन सबसे अधिक परेशान करने वाली बात यह है कि 45% प्रेरित गर्भपात असुरक्षित हैं। अनुमान है कि वैश्विक स्तर पर प्रति वर्ष 29,000 गर्भवती महिलाएँ असुरक्षित गर्भपात के कारण मर जाती हैं और 70 लाख असुरक्षित गर्भपात के कारण घायल या विकलांग हो जाती हैं। आधे से अधिक असुरक्षित गर्भपात एशियाई देशों में होते हैं, जिनमें से ज़्यादातर दक्षिण और मध्य एशिया में होते हैं। दक्षिण और केंद्रीय अमेरिका और अफ़्रीका के देशों में, लगभग हर 4 में से 3 (75%) गर्भपात असुरक्षित होते हैं। अफ़्रीका में, लगभग 50% गर्भपात सबसे कम सुरक्षित परिस्थितियों में हुए। असुरक्षित गर्भपात के कारण होने वाली मौतों को पूरी तरह से रोका जा सकता है। सुरक्षित, समय पर, किफ़ायती और सम्मानजनक गर्भपात-देखभाल तक पहुँच की कमी के कारण ही ये रोके जा सकने वाली मातृ-मृत्युएँ होती हैं।
लैंगिक समानता और स्वास्थ्य का अधिकार मौलिक मानवाधिकार है
संयुक्त राष्ट्र की स्वास्थ्य अधिकार की विशेष राजदूत डॉ ट्लालेंग का मानना है कि “मानवाधिकारों का उल्लंघन एक प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली है। हमें स्वास्थ्य के अधिकार पर प्रगति करने के लिए, जातिवाद-विरोधी और उपनिवेशवाद-विरोधी विचारधारा का भी उपयोग करना होगा। मानवाधिकार हम सभी को जोड़ते हैं, न कि हमें तोड़ते या विभाजित करते हैं। हमें इस गलत-धारणा का विरोध करना चाहिए (और उसे और अधिक मजबूती से दबाना चाहिए) कि 'मानवाधिकार विभाजनकारी' हैं।" डॉ ट्लालेंग का मानना है कि मानवाधिकार हमें एक आधार देते हैं कि हम कैसे इंसानों के रूप में संगठित हो कर, सबके भले के लिए एक-साथ कैसे आगे बढ़ें। स्वास्थ्य अधिकार की रक्षा के लिए, शक्ति के निरंतर विश्लेषण की आवश्यकता होती है। हममें से कोई भी व्यक्ति, शक्ति का निरंतर विश्लेषण करने की प्रतिबद्धता के बिना, सतत विकास के भविष्य की कल्पना नहीं कर सकता है। शक्ति, जो इंसानों के बीच भेद पैदा करती हैं, कैसे शक्ति आने या जाने से व्यक्तिगत या सांगठनिक रूप से प्रभाव पड़ता है, और बहुपक्षीय साझे मंचों पर प्रभाव पड़ता है - इसका हमें निरंतर मूल्यांकन करना ज़रूरी है। स्वास्थ्य के अधिकार (जिसमें सुरक्षित गर्भपात का अधिकार भी शामिल है) को अन्य मानवाधिकारों से अलग करना असंभव है। यह याद रखना भी आवश्यक है कि जब हम स्वास्थ्य के अधिकार पर प्रभावकारी कार्य करते हैं, तो हम कई अन्य मानवाधिकारों को भी सक्षम बनाते हैं। स्वास्थ्य के मानवाधिकार पर कार्य करने से हम जेंडर समानता की ओर भी कदम बढ़ाते हैं।"

-  शोभा शुक्ला, लेखिका  
– सीएनएस (सिटीज़न न्यूज़ सर्विस)


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