नदियों के प्रति हमें अपनी जवाबदेही समझनी होगी
भोपाल। जल गंगा संवर्धन अभियान अंतर्गत सदानीरा समागम में प्रवाह फिल्म समारोह के दूसरे दिन झेलम नदी पर केन्द्रित फिल्म व्येथ इस प्राचीन नदी की गाथा को व्यक्त करने वाली थी। प्राचीन भारतीय नदियों में जिनको सप्तसिंधु भी कहा जाता है उनमें झेलम(वितस्ता) प्रमुख पौराणिक नदी रही है। हिमालय से निकलने वाली यह नदी ने भारतीय नदी संस्कृति में अपनी एक विशेष स्थाान रखती है। समारोह में अमरकंटक, महाकुंभ, केरल की नदियाँ, नदी की कहानी, गणगौर गाथा, कृष्णा नदी, त्रिवेणी व पिंडारी यात्रा जैसी 24 फिल्मों को बढ़ी संख्या में दर्शकों ने देखा। तीन दिवसीय इस फिल्म समारोह के अंतिम दिन 20 से अधिक लघु फिल्मों का प्रदर्शन होगा।
समारोह के समन्वयक देवेन्द्र खंडेलवाल का कहना है कि आज नदी, जलस्रोत, पर्यावरण पर भारी संकट का दौर है ऐसे में मध्यप्रदेश सरकार का जल गंगा संवर्धन अभियान महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यह अभियान आमजन और अन्य राज्यों के लिए प्रेरणा स्रोत भी बन गया है। इसी क्रम में सदानीरा समागम अंतर्गत फिल्म समारोह एक महत्वपूर्ण भूमिका में है।
समारोह को लेकर ऑलिएंटल कॉलेज के छात्र अभिषेक सिंह ने कहा कि इन फिल्मों को देखकर हम एक तरह से नदी और जल के प्रति संवेदना को बरकरार रखने का प्रयास करते है। हम इन फिल्मों को देखकर नदियों, तालाबों और पर्यावरण के प्रति जागरूक होते है। सरकार के प्रयास अपनी जगह है मगर हमें भी अपनी जवाबदेही का निर्वाहन करना पड़ेगा।











