जय श्रीराम के उद्घोष के बीच हुआ रावण का अंत, रंगारंग आतिशबाजी से जगमगाया आसमान

जय श्रीराम के उद्घोष के बीच हुआ रावण का अंत, रंगारंग आतिशबाजी से जगमगाया आसमान
भोपाल। राजधानी में मंगलवार को विजयादशमी का पर्व हर्ष और उल्लास के साथ मनाया गया। इस मौके पर पुराने शहर से परंपरागत विजय जुलूस निकाला गया। विजय भूमि छोला दशहरा मैदान सहित शहर के विभिन्न मैदानों में राम-रावण युद्ध के मंचन के साथ रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन किया गया। इसके साथ ही जय-जय श्री राम के उद्घोष से आसमान गूंजने लगा। आसमान में रंगारंग आतिशबाजी का नजारा दिखाई दिया, जिससे लोग रोमांचित हो उठे। विशेषकर माता-पिता के रावण दहन देखने पहुंचे बच्चों में विशेष उत्साह दिखा। शहर में 30 से अधिक स्थानों पर दशहरा उत्सव मनाया गया। दशहरा मैदान पर राम-रावण युद्ध का मंचन किया गया,।जहां अच्छाई रूपी राम के द्वारा बुराई के प्रतीक रावण, मेघनाथ और कुंभकर्ण का वध किया गया।

चल समारोह में नृत्य करते घोड़े रहे आकर्षण का केंद्र

श्री हिन्दू उत्सव समिति द्वारा आयोजित चल समारोह बांके बिहारी मंदिर से प्रारंभ हुआ। समिति के महामंत्री सुबोध जैन ने बताया कि लगभग एक किलोमीटर लंबे इस जुलूस में ढोल, बैंड, पुलिस बैंड, घुड़सवार, नृत्यरत घोड़े, ध्वज, पताकाएं, गणेशजी की झांकी, मेघनाथ, कुंभकर्ण, महाराजा रावण अपने दलों के साथ चल रहे थे। भगवान श्रीराम का रथ पुलिस बैंड के साथ चल समारोह की शोभा बढ़ा रहा था। चल समारोह में नृत्य करते घोड़े सभी का मन मोह रहे थे। मालवा की नृत्य मंडली भी आकर्षण का केंद्र बनी हुई थी। इसमें अशोक वाटिका में सीता माता की मौजूदगी वाली झांकी भी दर्शनीय थी।

अखाड़ों ने दिखाए करतब

चल समारोह में सबसे आगे शहर के लगभग डेढ़ दर्जन अखाड़े कतारबद्ध प्रदर्शन करते हुए चल रहे थे। प्रमुख अखाड़ों में राम बजरंग अखाड़ा-बरखेड़ी, लवकुश अखाड़ा-टीला जमालपुरा, खेड़ापति हनुमान अखाड़ा, श्रीकृष्ण अर्जुन अखाड़ा-बरखेड़ी, मुकुटबन्द महाराणा प्रताप अखाड़ा-इब्राहिमपुरा, श्रीपवनपुत्र हनुमान अखाड़ा-छोला नाका सहित लगभग डेढ़ दर्जन अखाड़े शानदार करतब करते हुए चल समारोह की शोभा बढ़ा रहे थे। स्वागत मंच पर उनके प्रदर्शन को देखकर उन्हें शील्ड देकर पुरस्कृत भी किया गया। जुलूस रात करीब साढ़े नौ बजे छोला दशहरा मैदान पहुंचा, जहां उसका भव्य स्वागत किया गया।

Advertisement