भोपाल। मुंबई के प्रतिष्ठित छत्रपति शिवाजी महाराज वास्तु संग्रहालय में आयोजित होने जा रही अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी के लिए विदिशा के जिला संग्रहालय में प्रदर्शित भगवान विष्णु की यज्ञ वराह प्रतिमा (कलाकृति) को चुना गया है। संग्रहालय की ओर से विश्व भर से प्रतिमाओं के मास्टर पीस मंगाए गए थे, जिनमें से भारत से दो कलाकृतियां चयनित हुई हैं। दूसरी कृति दिल्ली स्थित संग्रहालय की है।
सोनारी गांव में मिली थी प्रतिमा
11वीं शताब्दी की यह प्रतिमा विदिशा जिले के सोनारी गांव में केवटन नदी से मिली थी, जो आंशिक क्षतिग्रस्त है। विदिशा से प्रतिमा मुंबई पहुंच चुकी है, जहां वह 11 माह तक प्रदर्शित रहेगी और देश-विदेश के लोग इसे देख सकेंगे। विदिशा के जिला संग्रहालय की क्यूरेटर नम्रता यादव ने बताया कि छत्रपति शिवाजी महाराज वास्तु संग्रहालय में पहली बार मानवता के इतिहास पर केंद्रित प्रदर्शनी एशियंट स्कल्पचर : इंडिया, इजिप्ट, सीरिया, ग्रीस एंड रोम का आयोजन एक दिसंबर 2023 से एक अक्टूबर 2024 तक किया जा रहा है। सृष्टि में मानव जाति के उदय को दर्शाती इस प्रदर्शनी में दुनिया के सबसे प्राचीन सभ्यता वाले पांच देशों की उत्कृष्ट प्रतिमाएं संजोई जाएंगी, जिसमें से भारत से दो कलाकृतियों का चयन किया गया है।
पांच देशों की प्रतिमाएं प्रदर्शित होंगी
प्रदर्शनी में शामिल होने वाले सभी पांच देशों की कुल 20 कलाकृतियां मुंबई पहुंच चुकी हैं। प्रदर्शनी का शुभारंभ एक दिसंबर को होगा। इस दौरान देश दुनिया के ख्याति प्राप्त पुरातत्वविद मौजूद रहेंगे। प्रदर्शनी के शुभारंभ अवसर पर पुरातत्व, अभिलेखागार और संग्रहालय की आयुक्त उर्मिला शुक्ला को भी आमंत्रित किया गया है। गौरव के इस क्षण का गवाह बनने वह मुंबई जा रही हैं।
रेत खनन के दौरान मिली थी
विदिशा जिले में भगवान विष्णु के वराह अवतार की यह चयनित प्रतिमा केवटन नदी में रेत खनन के दौरान ग्रामीणों को मिली थी, जिसे बाद में पुरातत्व विभाग को सौंपा गया। प्रतिमा पर नक्काशी का अद्भुत कार्य प्राचीन कला का वैभव दर्शाता है। भगवान विष्णु के तीसरे अवतार वराह पर आधारित यह प्रतिमा बलुआ पत्थर पर उकेरी गई है। प्रतिमा पर पृथ्वी, नौ ग्रह, शेषनाग और अनेक देवी-देवताओं का अंकन इसे सुंदरता प्रदान करता है।











