भोपाल। प्रदेश में करीब 10 वर्ष से श्रीराम वन गमन पथ विकसित करने की तैयारी चल रही है। मुख्यमंत्री बनने के बाद डॉ मोहन यादव ने इस पर तेजी से काम करने के लिए कहा था। उनकी अध्यक्षता में लगभग दो वर्ष पहले चित्रकूट में इसके लिए गठित न्यास की बैठक हुई, लेकिन उसके बाद आज तक कोई बैठक नहीं हुई। राम वन गमन पथ के स्थल चिह्नित करने का काम अंतिम चरण में है।
राज्य सरकार ने इस मामले के जानकार डॉ रामअवतार शर्मा को स्थल चिह्नित करने की जिम्मेदारी थी। उन्होंने अलग-अलग जिलों के स्थलों की सूची संस्कृति विभाग को सौंप दी है। अब विभाग ने संबंधित जिलों के कलेक्टरों सत्यापन के लिए इसे भेजा है। प्रदेश में श्रीराम वन गमन पथ निर्माण पर 160 करोड़ रुपए के काम कराए जा रहे हैं। ओरछा में भगवान श्री राम राजा लोक एकदम नए स्वरूप में छह नई थीम पर तैयार किया जा रहा है।
इसी तरह से कृष्ण पाथेय बनाने के लिए करीब छह माह पहले न्यास तो गठित हो गया, लेकिन अभी तक एक भी बैठक नहीं हुई है। मुख्यमंत्री की तरफ से उज्जैन का प्रतिनिधिमंडल राजस्थान भेजा गया था, जिसने वहां कृष्ण पाथेय को लेकर कराए गए काम को देखा है।
प्रतिनिधिमंडल के सुझाव भी पाथेय बनाने में सम्मिलित किए जाएंगे। श्रीकृष्ण पाथेय विकसित करने के संबंध में अन्य राज्यों से समन्वय के लिए प्राधिकरण बनाने पर भी विचार चल रहा है। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में प्रस्तावित न्यास की बैठक होने पर स्थल चयन, प्राधिकरण गठन सहित कई कार्यों को गति मिल जाएगी।
पहले चरण में इन स्थलों को किया गया चिह्नित
सतना जिले के चित्रकूट में स्फटिक शिला, गुप्त गोदावरी, अत्रि आश्रम, शरभंग आश्रम, अश्वमुनि आश्रम, सिलहा गांव में सुतीक्ष्ण आश्रम, सिद्धा पहाड़, रक्सेला गांव में सीता रसोई और रामसेल। पन्ना में पहाड़ी खेरा गांव में बृहस्पति कुंड, सारंगधर गांव में सुतीक्ष्ण आश्रम, बड़े गांव में अग्निजिह्वा आश्रम और सलेहा में अगस्त्य आश्रम, मैहर जिले में राम जानकी मंदिर, कटनी जिले के भरभरा में शिव मंदिर, जबलपुर जिले में पिपरिया के पास रामघाट, नर्मदापुरम में पासी घाट और माच्छा के राम मंदिर, बालाघाट जिले में राम पायली, मंडला में सीता रपटन, उमरिया जिले में राम मंदिर दशरथ घाट और मार्कंडेय आश्रम, शहडोल के गंधिया और अनूपपुर के कनवाई में स्थित सीतामढ़ी।











