तेलंगाना में जातिगत सर्वेक्षण का प्रस्ताव पारित : CM रेवंत रेड्डी ने कहा कांग्रेस का इतिहास कमजोर वर्ग और अल्पसंख्यकों का कल्याण

तेलंगाना में जातिगत सर्वेक्षण का प्रस्ताव पारित : CM रेवंत रेड्डी ने कहा कांग्रेस का इतिहास कमजोर वर्ग और अल्पसंख्यकों का कल्याण

तेलंगाना विधानसभा ने राज्य में घर-घर जाकर जातिगत सर्वेक्षण करने को लेकर शुक्रवार (16 फरवरी) को प्रस्ताव पारित किया। इसका उद्देश्य OBC,SC-ST और अन्य कमजोर वर्गों के विकास के लिए विभिन्न योजनाएं तैयार करना और उन्हें लागू करना है।

तेलंगाना सरकार में पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री पोन्नम प्रभाकर की ओर से सदन में प्रस्ताव पेश किया गया और बहस के बाद इस पर सहमति बनी। इस प्रस्ताव को हाल ही में हुई राज्य कैबिनेट की बैठक के निर्णय के तहत पारित किया गया है।

मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने कहा- कांग्रेस का कमजोर वर्गों और अल्पसंख्यकों के कल्याण के लिए काम करने का इतिहास है। यूपीए-1 सरकार ने मुस्लिम अल्पसंख्यकों के कल्याण के लिए न्यायमूर्ति राजिंदर सच्चर के नेतृत्व में एक पैनल नियुक्त किया था और उसके अनुसार कदम उठाए थे।

उन्होंने कहा कि हमारी सरकार राहुल गांधी के वादे को पूरा कर रही है। राज्य में समाज के सभी वर्गों का डेटा एकत्र करते हुए पिछड़े वर्गों को आर्थिक, राजनीतिक, रोजगार और शैक्षिक क्षेत्रों में प्रगति लाने का प्रयास कर रही है।

अल्पसंख्यकों के लाभ के लिए व्यापक योजनाएं और नीतियां वैज्ञानिक तरीके से तैयार की जाएंगी, जैसा कि सच्चर पैनल के अनुसार कांग्रेस ने पहले किया था।

BRS सरकार ने गहन घरेलू सर्वेक्षण की जानकारी सार्वजनिक नहीं की
CM रेवंत रेड्डी ने कहा कि राज्य में पिछली BRS सरकार ने साल 2014 में सत्ता में आने पर किए गए 'गहन घरेलू सर्वेक्षण' की जानकारी सार्वजनिक नहीं किया था, लेकिन हमारी सरकार ऐसा नहीं करेगी।

रेड्डी ने कहा- हमारा मुख्य उद्देश्य पिछड़े वर्गों को मजबूत करना है। पिछड़े वर्गों को शासक बनाना है। हमारी सरकार का इरादा वर्गों की आबादी को ध्यान में रखते हुए आर्थिक रूप से मजबूत करना है।

सर्वेक्षण में राज्य के सभी घरों, जातियों को शामिल किया जाएगा
डिप्टी सीएम मल्लू भट्टी विक्रमार्का ने कहा कि राहुल गांधी ने कहा था कि देश में धन और राजनीतिक शक्ति को कुछ लोगों के हाथों में केंद्रित किए बिना जनसंख्या के अनुपात में समान रूप से वितरित किया जाना चाहिए। हमारी सरकार का यह प्रस्ताव ऐतिहासिक है। सर्वेक्षण में राज्य के सभी घरों, जातियों को शामिल किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि यह सर्वेक्षण देश में सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक बदलाव के लिए एक बड़ा आधार बनेगा। सर्वेक्षण को अंतिम रूप देते समय कानून विभाग और बुद्धिजीवियों से परामर्श करेगी और यह सुनिश्चित करेगी कि उसे किसी कानूनी समस्या का सामना न करना पड़े।

विपक्ष ने किया प्रस्ताव का स्वागत
वहीं, विपक्षी दल BRS के कार्यकारी अध्यक्ष और विधायक केटी रामा राव ने प्रस्ताव का स्वागत किया है, लेकिन सर्वेक्षण के लिए न्यायिक आयोग नियुक्त किया जाने या विधानसभा में एक विधेयक पारित किए जाने की मांग की है।

जातीय गणना के आंकड़े जारी करने वाला पहला राज्य बना बिहार

अक्टूबर 2023 में बिहार सरकार ने जातीय गणना के आंकड़े जारी किए थे। वह ऐसा करने वाला देश का पहला राज्य बना। बिहार की आबादी में करीब 82 फीसदी हिंदू और 17.7 फीसदी मुसलमान हैं। बिहार में 2011 से 2022 के बीच हिंदुओं की आबादी घटी है। 2011 की जनगणना के अनुसार हिंदू आबादी 82.7% और मुस्लिम आबादी 16.9% थी।

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