कानपुर आईआईटी के सीनियर वैज्ञानिक प्रो. समीर खांडेकर नहीं रहे। शुक्रवार को मंच पर बोलते-बोलते उनको हार्टअटैक पड़ा। वह मंच पर गिर पड़े। वहां बैठे लोगों को लगा कि वह भावुक हुए हैं। इसलिए बैठ गए। जब थोड़ी देर तक वह नहीं उठे तो लोगों ने भागकर उनको उठाया। आनन-फानन में हैलट के कॉर्डियोलाजी ले जाया गया। वहां जहां के बाद डॉक्टर्स ने मृत घोषित कर दिया।
प्रो. खांडेकर IIT कानपुर में एल्युमिनाई मीट को संबोधित कर रहे थे। वहां मौजूद लोगों ने बताया कि वह सेहत को लेकर स्पीच दे रहे थे। उनके आखिरी शब्द थे...सेहत का ध्यान रखें। यह कहते ही उनके चेहरा पसीना-पसीना हो गया। तबीयत बिगड़ी और बेहोश हो गए।
55 साल के प्रो. खांडेकर IIT कानपुर में मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के वरिष्ठ वैज्ञानिक होने के साथ ही डीन ऑफ स्टूडेंट अफेयर के पद पर भी कार्यरत थे। परिवार में माता-पिता के अलावा उनकी पत्नी प्रद्यन्या खांडेकर और उनका बेटा प्रवाह खांडेकर हैं।
प्रो. सेहत का ध्यान रखने की दे रहे थे सलाह
प्रो. खांडेकर से जुड़े लोगों ने बताया कि शुक्रवार शाम 4 बजे IIT के ऑडिटोरियम में कार्यक्रम चल रहा था। वहां एल्युमिनाई स्पीच दे रहे थे। तभी प्रो. खांडेकर का नंबर आया। वह मंच पर बोलने के लिए पहुंचे। स्पीच में सेहत का ध्यान रखने की बात कह रहे थे। तभी यह पूरी घटना हो गई।
प्रो. खांडेकर को साल-2019 में कोलेस्ट्राल की परेशानी हुई थी। उनकी दवाइयां चल रहीं थीं। प्रो. एचसी वर्मा ने बताया कि दो दिन पहले बुधवार को ही प्रो. खांडेकर सोपान आश्रम आए थे और बच्चों को विज्ञान के नियम बताए थे। प्रो. खांडेकर के निधन से उन्हें जानने वाले स्तब्ध हैं।
बेटे के आने के बाद होगा अंतिम संस्कार
प्रो. खांडेकर का बेटा प्रवाह अभी कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से पढ़ाई कर रहा है। उनके लौटने पर ही अंतिम संस्कार किया जाएगा। अभी उनका शव संस्थान के हेल्थ सेंटर में रखा गया है। वह आईआईटी कानपुर के पूर्व छात्र भी थे। प्रो. खांडेकर के नाम पर 8 पेटेंट हैं।
जबलपुर में हुआ था जन्म
प्रो. खांडेकर का जन्म 10 नवंबर 1971 को जबलपुर में हुआ था। साल 2000 में आईआईटी कानपुर से बीटेक और जर्मनी से 2004 में पीएचडी की थी। इसके बाद 2004 में आईआईटी में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर ज्वाइन किया था।
2009 में एसोसिएट प्रोफेसर, 2014 से प्रोफेसर, 2020 में मैकेनिकल इंजीनियरिंग के विभागाध्यक्ष बने। 2023 में उनको डीन ऑफ स्टूडेंट अफेयर पद की जिम्मेदारी मिली। प्रो. खांडेकर प्रो. एचसी वर्मा की ओर से चलाए जा रहे शिक्षा सोपान आश्रम से भी जुड़े हुए थे।











