पंडित नेहरू के बुलाने पर भी मिलने नहीं गए पृथ्वीराज कपूर, 70 में परिवार को पाला और शुरू किया पृथ्‍वी थ‍िएटर

पंडित नेहरू के बुलाने पर भी मिलने नहीं गए पृथ्वीराज कपूर, 70 में परिवार को पाला और शुरू किया पृथ्‍वी थ‍िएटर
कपूर खानदान ने हिंदी सिनेमा में 90 साल गुजारे हैं और आज भी ये सफर जारी है। इस परिवार की पहली पीढ़ी के एक्टर पृथ्वीराज कपूर थे, जिन्होंने कपूर खानदान को विरासत में अभिनय दिया। उन्हीं की बदौलत उनके बच्चे, पोता-पोती और नाती फिल्म इंडस्ट्री में करियर की शुरुआत कर सके। चलिए पृथ्वीराज कपूर के जन्मदिन पर आपको उनके परिवार की पीढ़ियों, नेहरू परिवार से कनेक्शन और पृथ्वी थिएटर के बारे में बताते हैं।

1906 में जन्मे पृथ्वीराज कपूर की 3 नवंबर 2023 को 117वीं बर्थ एनिवर्सरी है। उनका परिवार इंडस्ट्री का सबसे बड़ा खानदान हैं जिनकी कई पीढ़ियां इस दौर को देख चुकी हैं। एक्टर के तीन बेटे हुए राज कपूर, शम्मी कपूर और शशि कपूर। इन तीनों परिवारों के बच्चों ने भी एक्टिंग करियर की शुरुआत की और खूब नाम कमाया।

पृथ्वीराज कपूर की चार पीढ़ियां

पृथ्वीराज कपूर के सबसे बड़े बेटे राज कपूर थे जिनके पांच बच्चे हुए। बॉलीवुड के पहले शो मैन के नाम से मशहूर हुए राज कपूर ने फिल्मी पर्दे पर कई साल गुजारे और शानदार फिल्में दीं। इनके पांच बच्चे हुए- रणधीर कपूर, ऋतु, ऋषि कपूर, राजीव कपूर और रीमा कपूर। रणधीर कपूर की दो बेटियां हैं- करिश्मा कपूर और करीना कपूर। वहीं ऋषि कपूर के दो बच्चे- रणबीर कपूर और रिद्धिमा कपूर। इसी तरह ऋतु नंदा के दो बच्चे हैं नताशा और निखिल। वहीं रीमा जैन के दो बच्चे हैं अरमान जैन और आदर जैन।

पृथ्वीराज कपूर का जन्म

3 नवंबर 1906 में पृथ्वीनाथ कपूर के रूप में उनका जन्म बशेश्वरनाथ कपूर के घर हुआ। ब्रिटिश इंडिया के पंजाब में जन्मे पृथ्वीराज जब तीन साल के थे तो मां गुजर गई। इस तरह बिन मां के एक्टर का बचपन बीता। पृथ्वीराज के पिता ने आगे चलकर दूसरी शादी कर ली और एक्टर के दादा उन्हें उनकी बुआ के घर ले गए। इस तरह पेशावर में वह रहने लगे और उनकी बुआ ने उनका पालन पोषण किया।

वकालत की पढ़ाई

उस जमाने में पृथ्वीराज कपूर ने ग्रेजुएशन किया और लॉ कॉलेज में एडमिशन लेकर वकालत की पढ़ाई करने लगे। हालांकि उनके मन में एक्टिंग का बीच पनपने लगा था। जब वह छोटे थे तो रामायण और महाभारत के किरदारों की नकल उतारा करते थे।

पृथ्वीराज कपूर को किसने दी सलाह

कॉलेज के दौरान पृथ्वीराज कपूर को ये नहीं समझ आ रहा था कि एक्टिंग में आखिर करियर कैसे शुरू करते हैं। वह कैसे इसी क्षेत्र में करियर संवार सकते हैं। तब उनके प्रोफेसर जय दलाल ने थिएटर से उन्हें परिचय करवाया। उन्होंने समझाया कि कैसे वह सीढ़ी दर सीढ़ी इस क्षेत्र में आगे बढ़ सकते हैं। फिर एक्टर ने ऐसा ही किया भी। वह थिएटर करने लगे और फिर मुंबई आने का मन बनाया।

पृथ्वीराज कपूर की पत्नी

वहीं निजी जिंदगी में भी काफी कुछ बदल गया था। मुंबई जाने से पहले एक्टर की 17 साल की उम्र में शादी हो गई थी। पृथ्वीराज कपूर की पत्नी का नाम रामसरणी मेहरा से हुई। तीन बच्चे हुए। लेकिन उनकी पत्नी का बीमारी के चलते निधन हो गया था।

कब बना था पृथ्वी थिएटर

मुंबई आने के बाद इंपीरियल फिल्म स्टूडियो से उन्होंने करियर की शुरुआत की। इस कंपनी में काम करने के लिए उन्हें 70 रुपये मिला करते थे। आगे चलकर फिल्म सिनेमा गर्ल में काम कर उनका करियर शुरू हुआ। साल 1931 में पृथ्वीराज कपूर ने देश की पहली बोलती फिल्म आलम आराम में खलनायक की भूमिका निभाई थी। आगे चलकर साल 1944 में उन्होंने खुद का कमर्शियल थिएटर पृथ्वी की स्थापना की।

जब थिएटर के बाहर झोली लेकर खड़ा हो जाया करते थे पृथ्वीराज

पृथ्वी थिएटर को खड़ा करने के लिए पृथ्वीराज ने अपना सबकुछ लगा दिया था। लेकिन इससे वह इतना भी पैसा नहीं कमा पाते थे कि वह इसे गुजारा कर सकते। आपको ये किस्सा जानकर हैरानी होगी कि जब लोग थिएटर से शो देखने के बाद निकलते थे तो खुद पृथ्वीराज झोली लेकर खड़े हो जाते थे और चंद रुपयों को लेकर थिएटर का ही कामकाज करवाया करते थे।

पृथ्वी थिएटर का इतिहास और रेनोवेशन

पृथ्वी थिएटर करीब 16 साल तक रहा। ढाई हजार से ज्यादा यहा परफॉर्मेंस हुई। लेकिन साल 1950 में आते आते फाइनेंशियल दिक्कतों के चलते इसे बंद करना पड़ा। लेकिन पृथ्वीराज ने ये दिमाग लगाया था कि इस थिएटर में वह फिल्में रिलीज किया करेंगे। फिर उनकी बहू और शशि कपूर की पत्नी जेनिफर केंडल ने इस थिएटर की मरम्मत करवाई और 5 नवंबर 1978 में इसका दोबारा से इनॉगरेशन हुआ।

पंडित नेहरू और पृथ्वीराज कपूर की दोस्ती

पृथ्वीराज कपूर के पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू एक दूसरे से खूब परिचित थे। पहली बार साल 1952 में राज्यसभा में उन्हें मनोनीत सदस्य भी बनाया गया था। ये पहला मौका था जब किसी एक्टर को राज्यसभा सदस्य के रूप में चुना गया था। इस तरह पृथ्वीराज कपूर ने 8 साल तक इस रूप में भी काम किया था। दोनों का एक किस्सा ये भी बड़ा मशहूर है जब जवाहर लाल नेहरू ने पृथ्वीराज से मिलने के लिए कहा और उन्होंने मना कर दिया। इसलिए कहा जाता है कि पृथ्वीराज ऐसे इंसान थे जिनमें पंडित नेहरू को भी ना कहने की हिम्मत थी। लेकिन बाद में दोनों डिनर पर मिले थे।

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