10 साल से अधिक समय से प्रतिनियुक्ति पर जमे प्राचार्य व व्याख्याताओं को हटाया गया, फिर हो गई वापसी

10 साल से अधिक समय से प्रतिनियुक्ति पर जमे प्राचार्य व व्याख्याताओं को हटाया गया, फिर हो गई वापसी
भोपाल। स्कूल शिक्षा विभाग में उच्च पद के प्रभार के बाद चल रही स्थानांतरण और पदस्थापना में अनियमितता रूकने का नाम नहीं ले रही है। विभाग के कई कार्यालयों में 10 सालों से ज्यादा प्रतिनियुक्ति पर जमें प्राचार्यों को कुछ दिन पहले हटाया गया, लेकिन स्थानांतरण रुकवा कर वे वापस भी आ गए। इससे विभाग के स्थानांतरण और पदोन्नति में कई अनियमितताएं सामने आ रही है।


आठ माह से चल रही तबादले की प्रक्रिया 

दरअसल, स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से स्थानांतरण प्रक्रिया चल रही है। करीब आठ महीने से चल रही प्रक्रिया अभी तक समाप्त नहीं हो पाई है। उच्च पद के प्रभार के बाद भी मैदानी स्तर पर शिक्षक व प्राचार्यों की कमी बनी हुई है, लेकिन विभाग में प्राचार्य, व्याख्याता व शिक्षक कई साल से मुख्यालयों में जमे हैं। पाठ्यपुस्तक निगम मुख्यालय से कुछ प्राचार्य व व्याख्याता कुर्सी छोड़ना ही नहीं चाहते हैं।

 

तबादले के आठ दिन बाद ही वापस

 

 ऐसे ही एक मामले में स्कूल शिक्षा विभाग ने 14 सितंबर को एक आदेश जारी किया। जिसमें कहा गया कि पाठ्यपुस्तक निगम में पदस्थ प्राचार्य श्रद्घा श्रीवास्तव, व्याख्याता राजेश्वर नाथ पाठक व व्याख्याता संदीप शुक्ला को प्रतिनियुक्ति पर दस वर्ष से ज्यादा का समय हो गया है। इन तीनों की प्रतिनियुक्ति तत्काल प्रभाव से समाप्त करते हुए लोक शिक्षण संचालनालय भेजा गया। तीनों को तत्काल प्रभाव से मुख्यालय से रिलीव भी कर दिया गया, लेकिन आठ दिन बाद ही विभाग ने 101 प्राचार्यों, व्याख्याता व शिक्षकों के स्थानांतरण की दूसरी सूची जारी की। इस सूची में व्याख्याता राजेश्वर नाथ पाठक दोबारा पाठ्यपुस्तक निगम में पदस्थ किया गया है।


नियम का हो रहा उल्लंघन

 

बता दें, कि नियमानुसार प्रतिनियुक्ति का नियम तीन साल का है, लेकिन विभाग के कार्यालयों में एक बार आने के बाद प्राचार्य व व्याख्याता जाने का नाम नहीं लेते है। सालों से विभागीय कार्यालयों में प्राचार्य व व्याख्याता जमे हुए हैं। पाठ्यपुस्तक निगम में व्याख्याता सीमा जैन, प्राचार्य चक्रेश जैन को भी तीन से से ज्यादा समय हो चुका है। वित्त अधिकारी अंजू सिंह भी तीन साल से ज्यादा समय से जमी हुई हैं।

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