भोपाल पहुंचे बॉलीवुड अभिनेता और रंगकर्मी अखिलेंद्र मिश्रा ने महाकुंभ मेले की व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए कहा, "60-70 करोड़ लोग स्नान कर चुके हैं, यह कोई छोटी बात नहीं है। इतनी बड़ी व्यवस्था के बावजूद लोग सिर्फ भगदड़ की चर्चा कर रहे हैं, लेकिन व्यवस्थाओं की तारीफ भी होनी चाहिए। मैं देख रहा हूं कि भारत में लोग अब सरकार की आलोचना करने लगे हैं, जो सही नहीं है।"
उन्होंने आगे बताया कि फिलहाल वे कुंभ में नहीं गए हैं, लेकिन जल्द ही वहां जाने की योजना है। बता दें कि अखिलेंद्र मिश्रा अपनी आने वाली फिल्म 'किस किस को प्यार करूं-2' की शूटिंग के लिए भोपाल पहुंचे हैं।
'बॉलीवुड में विक्की कौशल ने खुद को साबित किया'
अखिलेंद्र मिश्रा ने कहा कि, भारतीय सिनेमा में एक बहुत बड़ा सितारा तब आता है। जब वह अपनी कड़ी मेहनत, प्रतिभा और दृढ़ निश्चय से खुद को साबित करता है। विक्की कौशल ने भी यही किया है। ‘छावा’ की सफलता इस बात का प्रमाण है कि, वह एक शानदार अभिनेता हैं।
मैंने उनकी कई फिल्में देखी हैं और हर बार वे एक नए अंदाज में नजर आते हैं। ‘उरी’ अब ‘छावा’ जैसी फिल्मों में उन्होंने जो प्रदर्शन दिया है, वह सराहनीय है। मुझे लगता है कि भारतीय फिल्म उद्योग को एक बड़ा और दमदार सितारा मिल चुका है। आप छावा को देखें, यह फिल्म 250 करोड़ का बिजनेस कर चुकी है।
बॉलीवुड में सिर्फ दो एक्टर हैं- अखिलेंद्र मिश्रा
अखिलेंद्र मिश्रा कहते हैं कि, कलाकार की अपनी यात्रा होती है। तीनों खानों ने भारतीय सिनेमा में अमिट छाप छोड़ी है और आज भी अपनी जगह बनाए हुए हैं। मगर मैं एक्टर की बात करूं तो वह सिर्फ दो ही हैं। एक हैं दिलीप कुमार और दूसरे अमिताभ बच्चन।
'कलाकारों के लिए पेंशन की व्यवस्था होनी चाहिए'
थिएटर कलाकार जिंदगी भर काम करते हैं, लेकिन जब उम्र बढ़ती है, तो बहुत सारे कलाकार गुमनामी के अंधेरे में खो जाते हैं। यह केवल अभिनेताओं की ही बात नहीं है, बल्कि टेक्नीशियंस, लाइट डिजाइनर्स, साउंड इंजीनियर्स, मेकअप आर्टिस्ट, ये सभी लोग फिल्म और थिएटर इंडस्ट्री की रीढ़ की हड्डी हैं। लेकिन इनको वो पहचान और सम्मान नहीं मिलता, जो मिलना चाहिए।
मैंने कई ऐसे रंगकर्मियों की कहानियां पढ़ी हैं, जो बुढ़ापे में संघर्ष करते नजर आते हैं। मुझे लगता है कि, सरकार को थिएटर कलाकारों के लिए एक पेंशन योजना शुरू करनी चाहिए, जिससे कि वे आर्थिक रूप से सुरक्षित महसूस कर सकें।
अखिलेंद्र मिश्रा बोले- अभी भी मैं थिएटर करता हूं
थिएटर मेरा पहला और सबसे सच्चा प्यार है। मैं थिएटर से आया हूं और आज भी इससे जुड़ा हुआ हूं। हाल ही में मैंने स्वामी विवेकानंद पर आधारित एक सोलो परफॉर्मेंस ‘स्वामी विवेकानंद का पुनर्पाठ’ किया था। देशभर में इसके कई शो हो चुके हैं और यह अब तक का सबसे लंबा सोलो प्ले माना जा रहा है। थिएटर की सबसे खूबसूरत बात यह है कि, इसमें हर बार एक नया अनुभव मिलता है। यह अभिनेता को गहराई से निखरता है और उसे अनुशासन सिखाता है।











