शव से आ रही तेज बदबू के कारण वहां खड़े कई लोगों को मजबूरन दूर भागना पड़ा, लेकिन डॉक्टरों ने संवेदनशीलता की सारी हदें पार कर दीं।
बजरिया इलाके से लाया गया था शव, नहीं हुई थी पहचान
दरअसल, बजरिया थाना क्षेत्र से पुलिस एक व्यक्ति का शव पोस्टमॉर्टम के लिए हमीदिया अस्पताल लेकर आई थी। उसकी पहचान नहीं हो पाई थी, लेकिन शव को एम्बुलेंस से उतारकर मॉर्च्युरी के अंदर ले जाने के बजाय अंदर जाने वाले रास्ते पर ही रख दिया गया।
इसके बाद दो डॉक्टरों ने बिना किसी परदे या शेड के खुलेआम नीचे स्ट्रेचर पर ही शव का पोस्टमॉर्टम (चीर-फाड़) शुरू कर दिया।
डॉक्टरों की अजीब दलील बनाम वायरल वीडियो का सच
जब इस मामले को लेकर अस्पताल प्रशासन और फॉरेंसिक विभाग से सवाल किए गए तो उनकी दलीलें वायरल वीडियो के सामने पूरी तरह झूठी साबित होती दिखीं।
मामले में गांधी मेडिकल कॉलेज के फॉरेंसिक विभाग के एचओडी डॉ. आशीष जैन ने कहा- कुछ विशेष मामलों में शवों का पोस्टमॉर्टम मॉर्च्युरी के बाहर बने शेड वाले एरिया में किया जाता है, जबकि सामान्य प्रक्रिया वाले पोस्टमॉर्टम अंदर ही होते हैं। खुले एरिया में केवल शवों की सफाई की जाती है।
दावों की खुली पोल: वीडियो और बयानों में बड़ा विरोधाभास
अस्पताल प्रशासन के दावों और मौके के वीडियो फुटेज में साफ तौर पर अंतर (विरोधाभास) देखा जा सकता है। HOD ने दावा किया कि बाहर सिर्फ शव की सफाई या कीड़े हटाए जाते हैं, लेकिन वीडियो में साफ दिख रहा है कि डॉक्टर सीधे स्ट्रेचर पर ही मुख्य पोस्टमॉर्टम (चीर-फाड़) कर रहे हैं।
दावा शेड वाले एरिया का था, जबकि शव को मॉर्च्युरी के मुख्य रास्ते पर खुले में रखा गया था, जहां से लोगों की लगातार आवाजाही हो रही थी।











