याचिका की ओर से पेश वकील विष्णु शंकर जैन ने बिना किसी नियमन या जांच के ओटीटी प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया पर प्रसारित होने वाले कंटेंट के मुद्दे को उजागर किया। केंद्र का प्रतिनिधित्व कर रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि कुछ रोज के कार्यक्रमों में भी अश्लील कंटेंट मौजूद थे।
मेहता ने कहा कि सेंसरशिप नहीं होनी चाहिए, लेकिन कुछ हद तक विनियमन आवश्यक है। उन्होंने आगे कहा, 'कुछ विनियमन मौजूद हैं, कुछ विचाराधीन हैं।' पीठ ने अपने आदेश में कहा, 'यह याचिका ओटीटी प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया पर कई आपत्तिजनक, अश्लील और अशिष्ट कंटेंट के प्रदर्शन के संबंध में एक महत्वपूर्ण चिंता दिखाती है।' सॉलिसिटर जनरल ने कहा है कि अश्लील कंटेंट हद पार कर जाते हैं। उन्होंने कहा कि इस बारे में नोटिस जारी करें।
सोशल मीडिया और OTT पर अश्लील कंटेंट होंगे बैन, सुप्रीट कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर दिखाई सख्ती
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र, ओटीटी और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को एक जनहित याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसमें अश्लील कंटेंट की स्ट्रीमिंग पर रोक लगाने के लिए उचित कदम उठाने का निर्देश देने की मांग की गई। जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस एजी मसीह की पीठ ने देखा कि याचिका में चिंता का मुद्दा उठाया गया है और ओटीटी प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया पर अश्लील कंटेंट के नियमन की मांग वाली जनहित याचिका पर नेटफ्लिक्स, अमेजन प्राइम, ऑल्ट बालाजी, उल्लू, एएलटीटी, एक्स, मेटा इंक, गूगल, मुबी, एप्पल और बाकियों से जवाब मांगा है।











