पीएम मोदी ने देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को दिखाई हरी झंडी, हरियाणा के जींद से हुई रवाना

पीएम मोदी ने देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को दिखाई हरी झंडी, हरियाणा के जींद से हुई रवाना
जींद: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरियाणा के जींद रेलवे स्टेशन से देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। जींद से सोनीपत के बीच में यह ट्रेन चलेगी, जिसका किराया पांच से 26 रुपये रखा गया है। इस ट्रेन से शून्य प्रदूषण होगा। वहीं, 26,000 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखेंगे और उन्हें राष्ट्र को समर्पित करेंगे। यह 'हाइड्रोजन फॉर हेरिटेज' परियोजना का हिस्सा है। इस पहल के साथ भारत हाइड्रोजन ट्रेन तकनीक अपनाने वाले चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल हो गया।

भारतीय रेल की एक बड़ी उपलब्धि

जींद और सोनीपत के बीच हाइड्रोजन ट्रेन का संचालन भारतीय रेल की एक बड़ी उपलब्धि है। यह परियोजना नवाचार, ऊर्जा दक्षता और पर्यावरण अनुकूल परिवहन के प्रति रेलवे के संकल्प को दर्शाती है। साथ ही, यह स्वच्छ ऊर्जा और नेट-जीरो कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्यों को हासिल करने में मददगार साबित होगी। जींद-सोनीपत सेक्शन को इन ऑपरेशन्स के लिए पायलट रूट के तौर पर चुना गया है। ट्रेन के लिए जींद में स्वदेशी हाइड्रोजन स्टोरेज और रीफ्यूलिंग सुविधा बनाई गई है। पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव सेफ्टी ऑर्गेनाइजेशन ने साइट पर कंप्रेस्ड हाइड्रोजन गैस के स्टोरेज और डिस्पेंसिंग के लिए जरूरी लाइसेंस दे दिया है।

चुनिंदा देशों की सूची में शामिल हुआ भारत


हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन के लॉन्च के साथ, भारत जर्मनी, जापान, चीन और अमेरिका जैसे उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल हो गया है जो साफ-सुथरे रेल ट्रांसपोर्ट के लिए हाइड्रोजन के इस्तेमाल पर काम कर रहे हैं। एक सरकारी बयान के अनुसार, टेक्नोलॉजी अभी शुरुआती दौर में है। इसलिए अभी बहुत कम देश ऐसे सिस्टम चला रहे हैं या उनका परीक्षण कर रहे हैं।

कैसे चलती है हाइड्रोजन ट्रेन

हाइड्रोजन फ्यूल सेल टेक्नोलॉजी हाइड्रोजन का इस्तेमाल करके केमिकल रिएक्शन के ज़रिए बिजली बनाती है और इसमें सिर्फ पानी की भाप निकलती है। इस वजह से यह पारंपरिक फॉसिल फ्यूल (जीवाश्म ईंधन) वाले सिस्टम का एक साफ-सुथरा विकल्प है। हाइड्रोजन-आधारित रेल सिस्टम को दुनिया भर में टिकाऊ ट्रांसपोर्ट के लिए एक अच्छे समाधान के तौर पर तेजी से पहचाना जा रहा है। रीफ्यूलिंग के काम के लिए एक हाइड्रोजन कंप्रेशन सिस्टम लगाया गया है। साथ ही, भरोसेमंद और सुरक्षित कामकाज सुनिश्चित करने के लिए ज़रूरी टेक्निकल सपोर्ट और जरूरी स्पेयर पार्ट्स भी उपलब्ध कराए गए हैं। एक स्टैंडबाय कंप्रेसर यूनिट की व्यवस्था भी की जा रही है।
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