भोपाल। आयुष्मान योजना के तहत इलाज करने वाले प्रदेश के निजी अस्पतालों की अब प्रत्येक तीन महीने में रैकिंग होगी। अस्पताल में मरीजों को जो भी सुविधाएं दी जाएंगी, जैसा इलाज दिया जाएगा, उस हिसाब से रैंक मिलेगी। इसे मरीजों की प्रतिक्रियाओं के आधार पर निकाला जाएगा। इसका फायदा यह होगा अस्पतालों में व्यवस्थाएं और अधिक बेहतर हो जाएंगी।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का दावा है कि ऐसा करने वाला मध्य प्रदेश पहला राज्य बनने जा रहा है। यह व्यवस्था सितंबर से शुरू होगी। रैकिंग मिलने से मरीजों के लिए यह तय करना भी आसान हो जाएगा कि कौन-सा अस्पताल सबसे बढ़िया है और उन्हें किस अस्पताल में अपना इलाज करवाना है। उधर, जिन अस्पतालों की रैकिंग अच्छी नहीं रहेगी उन पर सुधार के लिए आयुष्मान के अधिकारी दिशा-निर्देश देंगे।
दरअसल आयुष्मान भारत से जुड़े निजी अस्पतालों की रैंकिंग करने के लिए कुछ मापदंड तय किए गए हैं। रैंकिंग होने के कुछ दिन बाद अस्पतालों को इसकी जानकारी दी जाएगी। इस प्रतिस्पर्धा को 150 अंक के आधार पर तय किया जाएगा। जिसमें पिछले तीन महीने के डेटा का आकलन कर सूची जारी की जाएगी।
पहली सूची सितंबर में आएगी। इस रैंकिंग में प्रथम तीन स्थानों पर रहने वाले अस्पतालों को पुरस्कृत किया जाएगा। आयुष्मान भारत की सीईओ आदिती गर्ग ने बताया कि इसे लेकर काम शुरू कर दिया गया है। इससे मरीजों को अस्पताल में उपचार कराने के पहले निर्णय लेने में भी आसानी होगी और अस्पताल को बेहतर इलाज एवं सेवाएं देने के लिए प्रेरित किया जा सकेगा।
इन मापदंड पर होगी तय होगी रैंकिंग
- अस्पताल द्वारा भेजे गए क्लेम में से मंजूर क्लेम का प्रतिशत।
- अस्पताल में भर्ती कुल मरीजों में से कितनों ने शिकायत की।
- भर्ती होने वाले मरीजों की तरफ से नेशनल एंटी फ्राड यूनिट और स्टेट एंटी फ्राड यूनिट की ओर से मिली फीडबैक।
- काल सेंटर पर मरीजों का दिया जाने वाला फीडबैक।
- अस्पताल में जरूरी साधन और संसाधनों की उपलब्धता।











