'चीन या US नहीं, भारत से जुड़ता है पाकिस्तान का भविष्य', पूर्व पाकिस्तानी NSA ने की शहबाज से अपील

'चीन या US नहीं, भारत से जुड़ता है पाकिस्तान का भविष्य', पूर्व पाकिस्तानी NSA ने की शहबाज से अपील
इस्लामाबाद: पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) मोईद यूसुफ ने कहा है कि मल्टी-अलाइनमेंट और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी हासिल करने और एशिया में एक मजबूत 'मिडिल पावर' सहयोगी बनने के लिए पाकिस्तान को भारत के साथ संबंध सामान्य करने चाहिए। 'इन द आई ऑफ द स्टॉर्म: पाकिस्तानज बैलेंसिंग एक्ट इन द इवॉल्विंग जियोपॉलिटिकल ऑर्डर' नाम के एक पेपर में ये बातें कही हैं। मोईद यूसुफ इमरान खान के कार्यकाल में पाकिस्तान के सबसे कम उम्र के नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर बने थे हालांकि अपने कार्यकाल के दौरान वो भी भारत के खिलाफ जमकर जहर उगलते थे।

यहां तक जब जनरल बाजवा ने भारत से रिश्ते सुधारने की पहल शुरू की थी तो उन्होंने इमरान खान को ऐसा कदम उठाने से मना करने सलाह दी थी लेकिन अब मोईद यूसुफ भारत से रिश्ते सुधारने की सलाह शहबाज शरीफ की सरकार को दे रहे हैं। उन्होंने इस पेपर में तर्क दिया है कि हालांकि पाकिस्तान में दक्षिण, मध्य और पश्चिम एशिया के बीच व्यापार, ट्रांजिट और ऊर्जा के लिए एक क्षेत्रीय कनेक्टर के तौर पर काम करने बहुत ज्यादा क्षमता है लेकिन क्षेत्रीय एकीकरण की कमी के कारण उसका विकास रूका हुआ है।

'पाकिस्तान को भारत के साथ ठीक करना चाहिए रिश्ते'

मोईद यूसुफ ने लिखा है 'पाकिस्तान की क्षेत्रीय दुविधा को सुलझाने और सकारात्मक आर्थिक निर्भरता के लिए सबसे अच्छे मौके का दरवाजा खोलने का तरीका भारत के साथ उसके सबसे खराब रिश्ते को ठीक करना है।' उन्होंने आगे लिखा है 'इससे न सिर्फ पूरे दक्षिण एशियाई क्षेत्र को फायदा होगा बल्कि यह अमेरिका और चीन के बड़े रणनीतिक हितों के भी अनुकूल होगा जिससे इन दोनों बड़ी ताकतों के बीच सहयोग के मौके बन सकते हैं।'

'अमेरिका-चीन नहीं भारत से जुड़ता है पाकिस्तान का भविष्य'

उन्होंने लिखा है कि कई दशकों से पाकिस्तान की विदेश नीति का एक ही मुख्य रणनीतिक मकसद रहा है और वो है भारत के साथ अपनी प्रतिद्वंद्विता को संभालना। उन्होंने कहा कि यही मकसद देश की आर्थिक बहाली, क्षेत्रीय प्रभाव और भू-राजनीतिक अहमियत के रास्ते में सबसे बड़ी बाधा साबित हो रहा है। यूसुफ का कहना है कि पाकिस्तान का भविष्य वाशिंगटन या बीजिंग पर कम और नई दिल्ली के साथ एक अलग रिश्ते की संभावना पर ज्यादा निर्भर करता है। यह तर्क एक वरिष्ठ पूर्व पाकिस्तानी अधिकारी की तरफ से दिए गए सबसे स्पष्ट मामलों में से एक पेश करता है कि भारत के साथ सामान्यीकरण पाकिस्तान के लिए एक रणनीतिक आवश्यकता क्यों है।

'दिल्ली से जुड़कर ही पाकिस्तान बन सकता है व्यापार हब'

पूर्व NSA ने पेपर में तर्क देते हुए लिखा है कि इस्लामाबाद का क्षेत्रीय व्यापार, ट्रांजिट और ऊर्जा हब बनने का सपना भारत के साथ संबंधों में बुनियादी सुधार के बिना पूरा नहीं हो सकता। ऐसा इसलिए है क्योंकि भले ही पाकिस्तान ने चीन, अमेरिका और खाड़ी के प्रमुख देशों के साथ रणनीतिक संबंध बनाने में बरसों लगाए हों, लेकिन 'एक 'मिडल पावर' के तौर पर पाकिस्तान की असली क्षमता को सामने लाने की कुंजी उसके सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी भारत के साथ उसके संबंध ही हैं।'
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