पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने वाशिंगटन में एक सेमिनार को संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने तीन-सूत्रीय तरीका बताया जिसमें 1960 की संधि को पूरी तरह से लागू करने और परमाणु हथियार रखने वाले इन पड़ोसी देशों के बीच विवादों को सुलझाने के लिए संधि में तय तरीकों का इस्तेमाल करने की बात कही। सेमिनार को वर्चुअली संबोधित करते हुए डार ने कहा 'पाकिस्तान और भारत को संधि के अनुसार तकनीकी बातचीत, पारदर्शिता और डेटा साझा करने की प्रक्रिया को फिर से शुरू और मजबूत करना चाहिए।'
भारत ने कर दिया है सिंधु जल संधि को स्थगित
इशाक डार ने आगे कहा 'ये कोई अनुचित मांगें नहीं हैं। ये दो संप्रभु देशों के बीच गंभीरता से किए गए और छह दशकों से अधिक समय से चले आ रहे समझौते की जरूरतें हैं।' भारत ने अप्रैल 2025 में विश्व बैंक की मध्यस्थता वाली इस संधि को अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद स्थगित कर दिया था। इसमें पाकिस्तानी आतंकियों ने धर्म पूछकर 26 हिंदू पर्यटकों की हत्या कर दी थी। भारत ने साफ कर रखा है कि 'खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते हैं।'इशाक डार ने शुक्रवार को कहा कि समझौता 'वैध, बाध्यकारी और पूरी तरह से लागू' है। उन्होंने तर्क दिया कि छह दशकों से ज्यादा समय में युद्धों, सैन्य संकटों और राजनयिक संबंधों के टूटने के बावजूद इस संधि का बने रहना यह दिखाता है कि साझा जल संसाधनों को राजनीतिक तनाव से अलग रखना कितना महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि यह विवाद और भी जरूरी हो गया है क्योंकि जलवायु परिवर्तन के कारण पाकिस्तान में पानी की आपूर्ति पर दबाव बढ़ गया है जबकि पाकिस्तान पहले से ही दुनिया के सबसे अधिक जल-संकट वाले देशों में से एक है।
