CAQM पर बढ़ा एक्शन लेने का दबाव
सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब और हरियाणा सरकारों को भी फटकार लगाते हुए कहा कि दोनों राज्यों ने पराली जलाने वाले किसानों से बहुत मामूली जुर्माना वसूला है। कोर्ट ने केंद्र और CAQM को इस मामले में एक सप्ताह के भीतर हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 16 अक्टूबर को होगी। हाल के दिनों में दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते वायु प्रदूषण पर चिंता जताई जा रही है। पराली जलाने से मामला और भी गंभीर हो जाता है। सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद CAQM पर कड़ी कार्रवाई और जवाबदेही तय करने का दबाव बढ़ गया है।
सुप्रीम कोर्ट पहले भी लगा चुका है फटकार
27 सितंबर को भी सुप्रीम कोर्ट ने पराली जलाने पर रोक लगाने में नाकाम रहने पर CAQM को फटकार लगाई थी। कोर्ट ने कहा था कि दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए CAQM को ज्यादा सक्रिय होने की जरूरत है। कोर्ट ने प्रदूषण नियंत्रण के लिए उठाए गए कदमों पर नाखुशी जाहिर करते हुए कहा था कि CAQM को दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता प्रबंधन अधिनियम, 2021 के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करना चाहिए।
सर्दियों में क्या होगा हाल
सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि पराली जलाने के विकल्प के तौर पर मौजूद उपकरणों का इस्तेमाल जमीनी स्तर पर सुनिश्चित करने की जरूरत है। सुप्रीम कोर्ट ने ने CAQM को निर्देश दिया था कि वह यह सुनिश्चित करे कि केंद्र सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए उपकरणों का इस्तेमाल किसान कर रहे हैं या नहीं। कोर्ट ने CAQM से बेहतर रिपोर्ट दाखिल करने को कहा था। सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी कहा था कि सर्दियों में दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण बढ़ने का एक बड़ा कारण पराली जलाना है। कोर्ट ने CAQM से पूछा था कि वह सर्दियों में बढ़ने वाले प्रदूषण और पराली जलाने की समस्या से कैसे निपटेगा।











