ऋषि कांत ने बताया कि पहली किशोरी पश्चिम बंगाल की रहने वाली है जिसकी उम्र महज 14 साल है। उसने बच्ची ने बताया कि सोशल मीडिया पर चैट करना उसके लिए बुरा सपना साबित हुआ है। उसने बताया कि वो लगभग एक साल पहले अनजाने में एक तस्कर से ऑनलाइन जुड़ गई थी। धीरे-धीरे, तस्कर ने उसका विश्वास जीता और उसे व्यक्तिगत रूप से मिलने के लिए मना लिया, जिससे वह दिल्ली ले जाई गई। किशोरी काफी दिनों से तस्करी के बाद दिल्ली में फंसी हुई थी।
प्रेम के जाल में फंसा रहे तस्कर
वहीं एक और पश्चिम बंगाल की अन्य किशोरी जिसकी उम्र 16 साल थी उसके साथ ही कुछ ऐसा हुआ। उसने बताया कि वह भी सोशल मीडिया के माध्यम से तस्करों द्वारा लालच दी गई थी और फिर फंस गई थी। दोनों ही मामलों में किशोरियों तस्करों ने पहले प्रेम के जाल में फंसाया फिर उनसे शादी का वादा किया। हालांकि जब उन वादों को पूरा नहीं किया गया, तो पीड़ितों को पता चला कि वे कई अन्य लड़कियों में से एक थीं जो उसी तरीके से उन तस्करों के जाल से फंसी थी।कई सालों से हो रही मानव तस्करी
शक्ति वाहिनी कार्यकर्ताओं का दावा है कि मानव तस्करी कई वर्षों से चल रही है, लेकिन अब इसका इस्तेमाल करने के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल किया जा रहा है। बता दें कि आमतौर पर छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और असम से बहुत सी महिलाओं और लड़कियों को राजधानी में तस्करी की जाती है। कुछ को ईंट भट्टों या अन्य निर्माण गतिविधियों में काम करने जैसे तुच्छ कार्यों के लिए तस्करी की जाती है। कई को वेश्यावृत्ति में धकेल दिया जाता है।











