भोपाल। नगर निगम में जोन और वार्ड स्तर पर एक तरफ संबल योजना का घोटाला हुआ है तो वहीं दूसरी तरफ योजना प्रकोष्ठ में बैठे अधिकारियों,कर्मचारियों ने कई सारी फाइलें लंबित करके रखी। नतीजा संबल योजना, जाब कार्ड और बीपीएल कार्डधारी मुखिया की मौत होने पर केंद्र सरकार की राष्ट्रीय परिवार सहायता के करीब एक हजार मामले लंबित है। स्वजन की मृत्यु के दो वर्ष बाद भी परिवार के लोग राष्ट्रीय परिवार सहायता के तहत मिलने वाली 25 हजार रुपये की राशि के लिए चक्कर वार्ड व जोन कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं।
बता दें कि शहर के सभी 21 जोन में राष्ट्रीय परिवार सहायता योजना की फाइलें लंबित है। इस मामले में उपायुक्त ज्ञानेंद्र यादव ने जोन और वार्ड स्तर पर यह फाइलें लौटाई है। कई जोनल अधिकारियों का तर्क है कि इन फाइलों को लौटाने की बजाए इनका निपटारा मुख्यालय स्तर पर ही होना चाहिए था। दरअसल निगम मुख्यालय में ही इन मृत्यु प्रमाण पत्र पर मौजूद बार कोड के आधार पर इनकी सत्यता का पता लगाया जा सकता है। हालांकि ऐसा न करके फाइलों को जोन मेें भेजने से विवाद बढऩे लगे है। जिन लोगों को दो वर्ष से परिवार सहायता नहीं मिली है, वे जोन और वार्ड के अमले पर नाराजगी जता रहे है और कई मामलों में बहस भी होने लगी है।
बता दें कि शहर के सभी 21 जोन में राष्ट्रीय परिवार सहायता योजना की फाइलें लंबित है। इस मामले में उपायुक्त ज्ञानेंद्र यादव ने जोन और वार्ड स्तर पर यह फाइलें लौटाई है। कई जोनल अधिकारियों का तर्क है कि इन फाइलों को लौटाने की बजाए इनका निपटारा मुख्यालय स्तर पर ही होना चाहिए था। दरअसल निगम मुख्यालय में ही इन मृत्यु प्रमाण पत्र पर मौजूद बार कोड के आधार पर इनकी सत्यता का पता लगाया जा सकता है। हालांकि ऐसा न करके फाइलों को जोन मेें भेजने से विवाद बढऩे लगे है। जिन लोगों को दो वर्ष से परिवार सहायता नहीं मिली है, वे जोन और वार्ड के अमले पर नाराजगी जता रहे है और कई मामलों में बहस भी होने लगी है।
तीन माह समयसीमा, दो वर्ष बाद भी भुगतान नहीं
शासन के नियमानुसार राष्ट्रीय परिवार सहायता के प्रकरणों का निराकरण तीन माह में कर दिया जाना चाहिए। जिससे पीड़ित परिवार को समय से राहत राशि का भुगतान किया जा सके। लेकिन हैरानी की बात यह है कि योजना प्रकोष्ठ में दो वर्षों से इन फाइलों को लंबित रखने वाले कर्मचारी और अधिकारियों पर निगम ने कोई कार्रवाई नहीं की है।
निगम और कर्मकार मंडल के बीच भटक रहे पीड़ित
जानकारी के अनुसार संबल योजना में उन्हीं फाइलों को आगे बढ़ाया जाता था जहां से योजना प्रकोष्ठ के कर्मचारियों को ऊपर से रुपये मिलने की उम्मीदें होती थी। कई मामलों में हितग्राही को योजना प्रकोष्ठ के चक्कर सालभर लगाने के बाद भी प्रकरण का निपटारा नहीं किया जाता था। बताया जाता है कि अमला हितग्राही को यह कहकर कनफ्यूज करते थे कि उनकी फाइल निगम से अप्रुव कर कर्मकार मंडल को भेज दी है। हितग्राही जब वहां जाता था तो कहा जाता था कि निगम ने अभी तक प्रकरण को फाइनल करके नहीं भेजा है।
इनका कहना है
राष्ट्रीय परिवार सहायता योजना के तहत जो भी फाइलें आ रही हैं, उनका भुगतान कराया जा रहा है। बीते कुछ समय की फाइलें लंबित हैं। इसमें डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट को लेकर कुछ इश्यू था।
- एकता अग्रवाल, जनसंपर्क अधिकारी नगर निगम











