एक तो 'चोरी' और ऊपर से सीनाजोरी, शाकिब अल हसन ये बांग्लादेश प्रीमियर लीग नहीं, विश्व कप है

एक तो 'चोरी' और ऊपर से सीनाजोरी, शाकिब अल हसन ये बांग्लादेश प्रीमियर लीग नहीं, विश्व कप है
बेहतरीन स्पिन गेंदबाज, बल्लेबाजी में जोरदार, तेज तर्रार फील्डर कुल मिलाकर मैच विनर... शाकिब अल हसन में वह काबिलियत है, जो शायद ही दुनिया के किसी ऑलराउंडर में होगी। वह 2019 विश्व कप में अकेले दम पर बांग्लादेश को कई मैचों में जीत दिलाने में सफल रहे थे। 8 मैचों में गजब की बैटिंग करते हुए 86.57 की औसत से 8 मैचों में 606 रन ठोके थे। तीसरे सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज थे। 11 विकेट भी चटकाए थे। हर कोई उनकी तारीफ कर रहा था, शाबाशी दे रहा था, लेकिन 2023 विश्व कप में उन्होंने एक ऐसा फैसला किया, जिसने उनके करियर में बड़ा दाग लगा दिया। श्रीलंका के खिलाफ मैच में जीत की सनक में उन्होंने मैथ्यूज के खिलाफ टाइम आउट की अपील की और आखिरी दम तक अपने फैसले को सही साबित करने की कोशिश करते रहे। प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी तमाम उदाहरण देते नजर आए।

मैदान पर गाली-गलौच, अंपायर से भिड़ंत... शाकिब के लिए कुछ भी नया नहीं
शाकिब ने यहां तक कह दिया कि वह युद्ध क्षेत्र में थे, जबकि वह यह भूल गए कि यह क्रिकेट का मैदान था। यहां जीतना लक्ष्य होता है, लेकिन इस बात का ख्याल रखना होता है कि आप कुछ ऐसा न कर डालें, जो खेल भावना के खिलाफ हो। हर चीज की एक सीमा होती है। न केवल एक खिलाड़ी, बल्कि एक कप्तान के रूप में आपको यह सुनिश्चित करना होता है कि आप टीम में शामिल युवाओं के लिए बेहतर उदाहरण बनें। न कि एक ऐसा सनकी कप्तान, जो मैदान पर गाली-गलौच करता है। फैंस से भिड़ जाता है। अंपायर के फैसले पर बिफर पड़ता है और खुद के गुस्से पर काबू नहीं है। कुछ ऐसे ही तो हैं शाकिब अल हसन।

शाकिब क्या ऐसे बांग्लादेशी युवाओं के हीरो बनेंगे?
शाकिब खेल के दौरान भूल जाते हैं कि क्रिकेटर भी एक इंसान होता है। उसका क्रिकेटर करियर उसकी उम्र से कहीं छोटा होता है। रिटायरमेंट के बाद क्या कोई टीम ऐसे पूर्व क्रिकेटर को कोच बनाना चाहेगी, जो मैदान पर अपनी बदतमीजियों के लिए बदनाम हो। क्या विश्व कप कॉमेंट्री पैनल में उसे यह जानते हुए जगह दी जाएगी कि वह गाली बकता हो। संभवत: नहीं। शायद क्लब या फ्रेंचाइजी क्रिकेट टीम भी ऐसा न किया जाए। ऐसे सिरफिरे बदनाम क्रिकेटर पर भरोसा कर पाना किसी के लिए संभव नहीं है।

दिल्ली में हुआ विश्व कप 2023 का सबसे बड़ा विवाद
खैर, सबसे पहले समझते हैं कि श्रीलंका के खिलाफ मैच में दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में आखिर हुआ क्या..। दरअसल, विश्व कप के एक मुकाबले में श्रीलंका को बांग्लादेश के खिलाफ 25वें ओवर में चौथा झटका लगा। दूसरी गेंद पर शाकिब अल हसन ने समरविक्रमा को आउट किया। इसके बाद एंजेलो मैथ्यूज मैदान पर आए। वह स्टांस लेते इससे पहले हेलमेट टाइट करने के दौरान पता चला कि स्ट्रिप टूटी हुई है। इस पर वह पवेलियन की ओर इशारा करते हैं और नया हेलमेट मंगवाते हैं। इस दौरान शाकिब अल हसन टाइम आउट की अपील कर देते हैं और ड्रामे के बाद अंपायर का फैसला शाकिब के पक्ष में जाता है। इस पर क्रिकेट की दुनिया के तमाम दिग्गज शाकिब से सहमत नहीं हैं।
शाकिब को धोनी और सचिन से सीखना चाहिए
शाकिब के क्रिकेट करियर की जब भी बात होगी तो मैथ्यूज का नाम जरूर लिया जाएगा और यह उनकी छाती में आजीवन किसी तीर सी लगती रहेगी। इस पर 2011 का वह वाकया याद आ गया, जब भारत और इंग्लैंड के बीच टेस्ट मैच में इयान बेल तीन रन लेने के बाद दूसरे छोर पर खड़े हो गए थे। उन्हें लगा गेंद 4 रनों के लिए बाउंड्री पार कर गई है, लेकिन ऐसा नहीं था। प्रवीण कुमार के थ्रो पर धोनी ने रन आउट किया। हालांकि, सचिन तेंदुलकर की सलाह पर धोनी ने फैसला बदला और बेल फिर बल्लेबाजी करने मैदान पर आए। यह मैच भारत 319 रनों से हार गया था, जबकि बेल ने गजब की बैटिंग करते हुए 159 रन बनाए थे। इंग्लैंड पहली पारी के आधार पर भारत से पिछड़ा था। इतिहास में धोनी का यह फैसला दर्ज है और खेल भावना के लिए उदाहरण के तौर पर याद किया जाता है।

तब लाहिरू थिरिमाने को सचिन-सहवाग ने दिया था जीवनदार, शाकिब को पूरी जिंदगी रहेगा गिल्ट

2012 में भारतीय स्पिनर अश्विन ने लाहिरू थिरिमाने को मांकडिंग रन आउट किया। उस समय सहवाग टीम के कप्तान थे। मैदान पर सचिन तेंदुलकर भी मौजूद थे। भारतीय टीम चाहती तो थिरिमाने को पवेलियन लौटना पड़ता, लेकिन सचिन तेंदुलकर ने सहवाग से बात करके मामला रफा-दफा कर दिया। यह खेल भावना थी। इसलिए ही तो सचिन, सहवाग और धोनी को महान कहा जाता है। इसलिए आपको सालों साल याद किया जाता है और हीरो माना जाता है, लेकिन अगर आप एक गलत फैसला करते हैं तो उसकी गिल्ट के साथ पूरी जिंदगी जीना पड़ता है।

जब भी मैथ्यूज की कहानी लिखी जाएगी, शाकिब विलन रहेंगे...!
शाकिब अल हसन को यहां यह समझना चाहिए था कि यह बांग्लादेश प्रीमियर लीग नहीं है, जहां आप अपने देश में मनमाना तरीके से व्यवहार करेंगे और उसे बर्दाश्त किया जाएगा। अंपायर को गाली देंगे, स्टंप्स पर लात मारेंगे, साथी खिलाड़ी से भिड़ जाएंगे, फैंस को कूट देंगे... फेहरिस्त लंबी है। यह विश्व कप है, इंटरनेशनल क्रिकेट है या आईसीसी की किताबों में दर्ज किया गया। मैथ्यूज टाइम आउट होने वाले पहले खिलाड़ी बने। यह कहानी जब भी लिखी जाएगी तो विलन के कॉलम में शाकिब का नाम होगा। वह चाहकर भी इसे बदल नहीं सकेंगे। हालांकि, इसमें कोई शक नहीं कि वह अपनी टीम बांग्लादेश के लिए इस जीत से हीरो रहेंगे, क्योंकि अब उसकी आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी के लिए क्वॉलिफाइ करने की संभावना बढ़ गई है। हालांकि, सुनिश्चित नहीं है।
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