एच एन आंकरे ने निमाड़ी में कुछ ठप्पे सुनाते हुए सौंदर्य रस की कविता पेश की I
टी आर बामने ने बाबासाहेब पर स्वलिखित कविता प्रस्तुति की I
रजनी गंगोरे जी ने स्वलिखित "अच्छो पाठ पढ़ाय गयो रे बाबा जी आंबेडकर" कविता लय में प्रस्तुत की I
पेंशनर्स की फरमाइश पर एम एल गंगोरे जी ने "ये रेशमी जुल्फें और चांदी जैसा रंग" गज़ल गाकर मंत्रमुग्ध किया I
आर एस अहिरवार जी ने 'तुम अगर साथ देने का वादा करो' को स्वर ताल में गाया I
भोजन व्यवस्था में जी के राठौड़ की महत्वपूर्ण भूमिका रही वहीं, लालचंद मंडराई ने सभी पेंशनर्स का आभार जताया I











