कार्यक्रम की शुरुआत विशाखा के तूने ओ रंगीले कैसा जादू किया,,,गीत से हुई। ऋषिकेश और कीर्ति के गाए सुरीले दोगाने ,,इस प्यार से मेरी तरफ न देखो,,, ने सभी की खूब तालियां बटोरी। कार्यक्रम की अगली प्रस्तुतियों के रूप में योगिता एवम प्रमोदजी ने बड़े अरमानों से रखा है सनम तेरी कसम,प्रशांत एवम बबिता ने कभी भुला कभी याद किया,,,अजय और कीर्ति ने धीरे धीरे से मेरी जिंदगी में आना गीत गाए।
इस संगीत संध्या में एक के बाद कई सेमी क्लासिकल ,गजल और सुगम संगीत पर आधारित सुरीले फिल्मी सोलो और डुएट गीत गाए गए।
ग्रुप के मेंटर श्री प्रशांत राखे एक बैंक अधिकारी के साथ साथ संगीत में खासी रुचि रखते हैं , उनके अनुपम प्रयास से ही मधुवन समूह संगीत प्रेमियों का एक ऐसा अनूठा समूह बन गया है ,जिसमे शहर के कई एडवोकेट, डॉक्टर्स,इंजीनियर्स,प्रोफेसर,पुलिस अधिकारी ,बैंक अधिकारी सभी मिलकर फिल्मी गीतों के गायन का नियमित अभ्यास करते हैं,और अपनी व्यस्त दैनिक चर्या में संगीत के माध्यम से सुकून और आनंद का अनुभव करते हैं।इस समूह की लोकप्रियता को देखते हुए संगीत में रुचि रखने वाले कई रिटायर वरिष्ठ जन भी यहां आकर गीतों के अभ्यास से खुद को सक्रिय और व्यस्त रखते हैं।श्री प्रशांत राखे ने हमे बताया कि कई वरिष्ठ जन जिन्हे पहले उच्च रक्तचाप और अनिद्रा जैसी स्वास्थ संबंधी शिकायतें थी, वो संगीत के नियमित अभ्यास से अपने आप को स्वस्थ और ऊर्जावान महसूस करने लगे हैं।समूह के लगभग 50 सदस्य मिलकर 3 महीने में एक बार एक स्थान पर अपने परिवार के साथ एकत्र होकर संगीत के मनोरंजक कार्यक्रम का आयोजन करते हैं,जिसमे पुराने कलाकारों के अलावा नए सदस्यों को भी मंच प्रदान किया जाता है।मंच पर निरंतर अभ्यास से सदस्यों का स्टेज फियर भी दूर होता है।और उन्हें गीत गाने में कॉन्फिडेंस भी आता है।











