इंदौर शहर कांग्रेस अध्यक्ष को लेकर जिस प्रकार की खींचतान देखी गई, वैसी पहले किसी पद को लेकर नहीं मची थी। लंबी खींचतान के बाद आखिर सुरजीत सिंह चड्ढा को शहर अध्यक्ष की कमान सौंपी गई। कमान मिलते ही सुरजीत भी पूरे उत्साह से अपने काम में जुट गए हैं। एक चाय सुरजीत संग, इसी उत्साह और काम का हिस्सा है। सुरजीत के शहर कांग्रेस अध्यक्ष बनते ही घर बैठ चुके कई पुराने कांग्रेसी भी घर से निकल आए हैं। वे सुरजीत के सुर में खूब सुर तो मिला ही रहे हैं और डैडी जी (स्व. उजागर सिंह) की उदारता-महानता के पुराने किस्से भी सुना रहे हैं। एक चाय सुरजीत संग में कई ऐसे चेहरे नजर आए जो पिछले कुछ सालों से पार्टी की गतिविधि से किनारा कर चुके थे। सुरजीत के इस आयोजन की राजनीतिक गलियारों में खूब चर्चा है।
अभी से इतना बेचैन क्यों नजर आ रहा गौड़ परिवार
इन दिनों सबसे ज्यादा हलचल इंदौर की अयोध्या कही जाने वाली विधानसभा चार में दिखाई दे रही है। अयोध्या में पिछले करीब 30 साल से गौड़ परिवार का वर्चस्व रहा है। पिछले चुनाव तक चार नंबर में गौड़ परिवार के अलावा कोई भी किसी प्रकार का आयोजन नहीं करता था। अब हालात यह है कि जिसे भी मौका मिल रहा है, वो चार नंबर में आयोजन करवा रहा है। अपने क्षेत्र में अन्य नेताओं के बढ़ते दखल ने गौड़ परिवार को बेचैन कर दिया है। इस बेचैनी में वे या उनके समर्थक पिछले दिनों कई बार अपना आपा भी खो चुके हैं। नगर-निगम चुनाव के समय से शुरू हुआ मारपीट के मामलों का सिलसिला अभी भी जारी है। इन मामलों की शिकायतें भोपाल से लेकर दिल्ली तक हो चुकी है। विधानसभा चुनाव को अभी समय है, पर गौड़ खेमा अभी से बेचैन नजर आ रहा है।
रुद्राभिषेक में दिलाया जा रहा कांग्रेस को वोट देने का संकल्प
राजनीति और धर्म एक ही सिक्के के दो पहलू माने जाते हैं। धर्म की आड़ में राजनीति अब भाजपा के साथ कांग्रेस भी करने लगी है। इन दिनों सबसे ज्यादा धार्मिक आयोजन कांग्रेस के नेता और विधायक ही करवा रहे हैं। इंदौर के एक नंबर विधानसभा के विधायक संजय शुक्ला ने भी 21 दिवसीय रुद्राभिषेक महोत्सव का आयोजन किया। इस आयोजन के तहत उन्होंने अपनी विधानसभा के कई वार्डों के मतदाताओं से रुद्राभिषेक करवाया। इस दौरान श्रद्धालुओं से कांग्रेस को वोट देने का संकल्प भी दिलवाया गया। एरोड्रम क्षेत्र में कई महिलाओं ने संकल्प लेने से मना भी कर दिया। महिलाओं का कहना था कि विधायक धर्म की आड़ में अपने वोट पक्के कर रहे हैं। अब संजय शुक्ला 30 जुलाई को अपने इस आयोजन में पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ को भी बुला रहे हैं।
जिन्हें मिला वो फूले नहीं समा रहे, जिन्हें नहीं मिला वो मुंह फुला रहे...
मध्य प्रदेश साहित्य अकादमी ने पिछले दिनों भोपाल के रवींद्र भवन में भव्य अलंकरण समारोह का आयोजन किया था। जिसमें विगत चार वर्षों से लंबित पुरस्कार बांटे गए और कुल 121 रचनाकार सम्मानित हुए। इस सम्मान समारोह की साहित्य जगत में व्यापक चर्चा है। जिनको ये पुरस्कार मिल गया वे फूले नहीं समा रहे हैं और जिनको पुरस्कार नहीं मिला वे मुंह फुला रहे हैं। कुछ साहित्यकार बोल रहे हैं कि कुछ साल पहले तक जो लोग संघ और मोदी के खिलाफ कलम चलाते थे, उन्हें भी पुरस्कृत कर दिया गया। इससे राष्ट्रवाद की अलख जगाने वाले लेखकों और साहित्यकारों की भृकुटी तनी हुई है। उनका कहना है कि ऐसे हृदय परिवर्तन करने वालों को पुरस्कार देने के पहले साहित्य अकादमी को विचार करना चाहिए था। जो भी हो इस बार के पुरस्कारों का वितरण तो हो गया है, अब विरोध करने से कुछ होने वाला नहीं है।











