विदेश मंत्रालय की तरफ से साफ कहा गया है कि विदेश मंत्री का ये दौरा SCO शिखर सम्मेलन के लिए है और इसे शांति पहल के रूप में नहीं देखा जा सकता है। यह फैसला भारत की एससीओ के प्रति प्रतिबद्धता दिखाता है। एससीओ क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण संगठन है। भारत एससीओ को बहुत गंभीरता से लेता है।
2019 से है पाकिस्तान के साथ तनाव भरे हालात
वहीं भारत के आखिरी उच्चायुक्त अजय बिसारिया ने कहा कि अब गेंद पूरी तरह से पाकिस्तान के पाले में है क्योंकि जयशंकर को भेजकर भारत ने एक साहसिक कदम उठाया है, जो इस परेशान रिश्ते को स्थिर करने की अपनी इच्छा का संकेत देता है। पाकिस्तान को इस अवसर का लाभ उठाना चाहिए और मेजबान के रूप में SCO के मौके पर एक सार्थक द्विपक्षीय बातचीत का प्रस्ताव रखना चाहिए।











