भोपाल । सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से लेकर मेडिकल कॉलेज तक में दवाओं की उपलब्धता, मांग और वितरण की वास्तविक स्थिति समय पर (रियल टाइम) मिल सकेगी। आपूर्तिकर्ता कंपनी द्वारा दवाएं सबसे पहले संभागीय स्तर पर बनाए जा रहे 10 वेयरहाउसों में पहुंचाई जाएंगी। यहां से अस्पतालों के स्टोर में पहुंचेंगी।
समीक्षा में दी योजना की जानकारी
उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला ने मंगलवार को मंत्रालय में दवाओं की आपूर्ति व्यवस्था में प्रस्तावित बदलावों की समीक्षा की। बैठक में विभाग के आयुक्त धनराजू एस ने कार्ययोजना की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वेयरहाउसों में दवाएं पहुंचने पर नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड फार लैबोरेट्रीज (एनएबीएल) मान्यता प्राप्त लैबों से जांच कराई जाएगी। इसके बाद ही दवाओं को वितरण के लिए पहुंचाया जाएगा।
मांग के आकलन पर होगा भंडारण
नई व्यवस्था से दवाओं की क्षेत्रवार, जिलावार और संस्थावार मांग का आकलन किया जा सकेगा। इस आधार पर पहले से दवाओं का पर्याप्त भंडारण किया जा सकेगा। दवाओं की खरीदी मप्र पब्लिक हेल्थ सर्विसेज कॉरपोरेशन द्वारा की जाएगी।
नई व्यवस्था में गुणवत्ता परीक्षण के बाद दवाओं का वितरण मेडिकल कॉलेजों, जिला अस्पतालों, सीएमएचओ कार्यालय के औषधि भंडार, सिविल अस्पतालों तथा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों तक किया जाएगा।
आगामी चरण में इस व्यवस्था का एकीकरण (इंटीग्रेशन) प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) तक किया जाएगा।











