न मुद्दे न लहर, बढ़े मत प्रतिशत के मायने तलाश रही राजनीति

न मुद्दे न लहर, बढ़े मत प्रतिशत के मायने तलाश रही राजनीति
इंदौर। एंटी इंकम्बेंसी, अपनों की बगावत, त्रिकोणीय मुकाबलों की गहमा-गहमी के बीच मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में सबसे चर्चित क्षेत्र मालवा-निमाड़ में भी क्षत्रपों के साथ प्रत्याशियों की किस्मत तीन दिसंबर तक इलेक्ट्रानिक पेटी यानि ईवीएम में बंद हो गई है। चुनाव प्रचार में सितारों की चमक और वादे और घोषणाओं की घनघोर बारिश के बाद भी इस बार न लहर नजर आई न मुद्दे प्रभावी रहे। लेकिन इसके पार्श्व में धीमे-धीमे ही सही लेकिन एक संकल्प दोहराया जाता रहा। यह संकल्प मतदान का था।

शुक्रवार को इंदौर-उज्जैन संभाग के 66 विधानसभा सीटों पर हुए मतदान का परिणाम जो भी रहे लेकिन मतदाताओं के दृढ़ संकल्प ने मतप्रतिशत बढ़ाकर इस चुनाव को विशेष बना दिया। प्रदेश की राजनीति के प्रमुख प्रतिद्वंदी भाजपा-कांग्रेस के नेता इस बढ़े मत प्रतिशत का विश्लेषण भले ही अपने-अपने अनुसार कर रहे हों लेकिन इतना तय है कि मालवा-निमाड़ क्षेत्र ने जागरुकता के पथ पर एक और मजबूत कदम बढ़ा दिया है।

मताधिकार को लेकर मतदाताओं की जागरूकता के एक से बढ़कर एक अच्छे उदाहरण भी सामने आए। आदिवासी मतदाता बहुल जिले, धार, झाबुआ, आलीराजपुर बड़वानी में मतदान प्रतिशत तो बढ़ा ही मतदाता मताधिकार का प्रयोग करने के लिए कष्टों की परवाह न करते हुए घंटो पैदल,नाव की सवारी कर मतदान केंद्र पहुंचे। आलीराजपुर का झंडाना गांव दुर्गम क्षेत्र में स्थित है।

सरदार सरोवर के बैक वाटर से घिरे इस गांव तक पहुंचने के लिए नाव की सवारी के साथ कई किलोमीटर पैदल फासला तय करना होता है। यहां के करीब 500 मतदाताओं ने इस कष्ट की परवाह किए बगैर मतदान केंद्र पहुंचकर अपना कर्तव्य निभाया। इसी तरह बड़वानी जिले के पाटी विकासखंड के गांव चेरवी, सेमलई, खारिया भागल, भऊंसा और बोरकुंज सघन वन और पहाड़ी क्षेत्र में स्थित हैं। यहां भी आवागामन का साधन पैदल यात्रा ही है। यहां पांच से सात किमी पैदल चलकर आदिवासी मतदाता मतदान केंद्रों तक पहुंचे हैं।

मालवा के आदिवासी बहुल जिलों के साथ ही पूर्वी और पश्चिमी निमाड़ के ऐसे जिले जहां बीते चुनावों में पलायन की वजह से मतदान प्रभावित होता है वहां भी इस बार उत्साहवर्धक परिणाम सामने आए। मतदान प्रतिशत में कहीं दो तो कहीं पांच प्रतिशत तक बढौतरी हुई है।
मालवा-निमाड़ में कांटे की टक्कर की बात तो चुनाव की बिसात बिछने के साथ ही कही जाने लगी थी लेकिन मतदान के दिन भी इस क्षेत्र की चर्चित सीटों की चर्चा होती रही। प्रदेशभर की निगाहें इंदौर क्षेत्र क्रमांक एक के मतदान ट्रैंड पर भी लगी रही। यहां से भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय प्रत्याशी हैं। इसी तरह निमाड़ के बुरहानपुर से पूर्व प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान के बेटे हर्ष चौहान के निर्दलीय चुनाव को लेकर दिनभर कयास लगाए जाते रहे।

त्रिकोणीय मुकाबले वाली सीटें, महू, धार, जावद, बड़नगर में भी शाम 6 बजे के बाद बूथ प्रभारियों से मिली रिपोर्ट के आधार पर बढ़त और नुकसान का आंकलन करते रहे। इधर मालवा-निमाड़ की सियासी राजधानी इंदौर की तीन अन्य सीटों पर भी प्रदेश भर की निगाहें जमी रही। यहां सांवेर और महू से प्रदेश सरकार के दो केबिनेट मंत्री मैदान में हैं तो राऊ से कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष जीतू पटवारी कड़े मुकाबले में है।

नंबर वन रहना अपना स्वभाव बना चुका यह शहर मतदान में भी नंबर वन के संकल्प के साथ ही आगे बढा। अब निगाहें तीन दिसंबर पर टिकी हैं। तब तक तर्क, वितर्क, कुर्तकों के साथ ही भांति-भांति के विश्लेषण भी नजर होंगे ही।

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