भोपाल। आगामी 15 अक्टूबर से शुरू होने वाली नौ दिवसीय नवरात्र में शहर के कई सामाजिक- सांस्कृतिक संगठन विभिन्न स्थानों पर गरबा का आयोजन करने के लिए तैयार हैं। इस बीच शहर के कई गरबा आयोजकों ने मुस्लिम पुरुषों को प्रवेश की अनुमति नहीं देने का निर्णय लिया है। गरबा आयोजकों का कहना है कि यह एक धार्मिक उत्सव है और पूर्व में कई जगहों पर युवतियों से छेड़छाड़ के मामले सामने आ चुके हैं, ऐसे में महिलाओं की सुरक्षा के लिए यह निर्णय लिया गया है। नवदुनिया ने गरबा आयोजकों से नियमों के बारे में जाना।
सदस्यता और आधार कार्ड से होगी एंट्री
प्रदेश अग्रवाल महिला महासभा की अध्यक्ष रश्मि अग्रवाल ने बताया कि संगठन 2016 से गरबा कार्यक्रम आयोजित कर रहा है। इस वर्ष यह आयोजन शिवाजी नगर स्थित नर्मदा मंदिर में होगा। महासभा के 200 आजीवन सदस्यों व सभी महिलाओं को निश्शुल्क प्रवेश मिलेगा। वे अपने सदस्यता कार्ड का उपयोग कर सकते हैं। गैर अग्रवालों को आधार कार्ड स्कैन कर प्रवेश दिया जाएगा। किसी भी मुस्लिम को अनुमति नहीं दी जाएगी।
उन्होंने कहा कि हम विवादों से बचना चाहते हैं। यह आयोजन 17-18 अक्टूबर को आयोजित किया जाएगा। आमंत्रितों को ही प्रवेश की अनुमति देते हैं और सभी का आधार कार्ड चेक करते हैं। मंदिर परिसर होने के नाते दूसरे धर्म के लोगों को अनुमति का सवाल ही नहीं है।
सेवा प्रदाता भी हिंदू ही होंगे
गुफा मंदिर परिसर स्थित मानस उद्यान में सांभवी गरबा महोत्सव की आयोजक रेखा शर्मा का कहना है कि कार्यक्रम में प्रवेश केवल 500 प्रशिक्षुओं को उनके द्वारा जारी आइडी के माध्यम से होगा। समूह यह सुनिश्चित कर रहा है कि टेंट और लाइट वालों, कोरियोग्राफर और विभिन्न सेवाएं प्रदान करने वाले लोगों में कोई मुस्लिम नहीं है। उन्होंने कहा कि हम पिछले एक महीने से तैयारी कर रहे हैं और प्रदर्शन 17-19 अक्टूबर तक निर्धारित है।
रेखा ने बताया कि हमारा कार्यक्रम मंदिर परिसर में होता है और आस्था का केंद्र है। शुभारंभ अवसर पर महंतजी पूजा- अर्चना करते हैं। इसलिए किसी दूसरे धर्म के व्यक्ति के आने का सवाल ही नहीं है। प्रतिभागी काफी पहले पंजीकृत हो जाते हैं, जो महिला और बच्चे ही होते हैं।
महिलाओं के लिए पाबंदी नहीं
कोलार रोड पर दानिश हिल्स में दिवा क्लब द्वारा आयोजित किया जा रहा गरबा कार्यक्रम अनुभूति भी मुसलमानों के लिए नहीं होगा। समूह 15 सितंबर से तैयारी कर रहा है और यह कार्यक्रम 16-17 अक्टूबर के लिए निर्धारित है। क्लब की माया राजपूत ने बताया कि हम जान-पहचान वाली मुस्लिम महिलाओं को अनुमति दे सकते हैं, लेकिन मुस्लिम पुरुषों प्रतिभागियों या सेवा प्रदाताओं को प्रवेश का कोई प्रविधान नहीं है। ऐसा इसलिए किया गया है कि गरबा धार्मिक गतिविधि है, मनोरंजन का माध्यम नहीं। हम किसी असहज करने वाली स्थिति से बचना चाहते हैं।











