मधुबाला से कम्पेयर होती थी निगार की खूबसूरती खास सहेली के पति की तीसरी पत्नी बनीं

मधुबाला से कम्पेयर होती थी निगार की खूबसूरती खास सहेली के पति की तीसरी पत्नी बनीं

1960 में रिलीज हुई भारतीय सिनेमा की सबसे बेहतरीन फिल्म मुगल-ए-आजम को आखिर कौन भूल सकता है। इस फिल्म में मधुबाला ने अनारकली का रोल निभाकर खुद को स्टार बना लिया, लेकिन यही फिल्म एक एक्ट्रेस की बर्बादी का कारण बनी। वो एक्ट्रेस थीं, निगार सुल्ताना।

निगार ने फिल्म में मुगल दरबार की डांसर बहार का रोल निभाया गया था, जिन पर फिल्म का मशहूर गाना तेरी महफिल में किस्मत आजमा के... फिल्माया गया था। निगार इस कदर खूबसूरत थीं कि उनकी खूबसूरती की तुलना मधुबाला और वैजयंतीमाला जैसी आला दर्जे की एक्ट्रेसेस से होती थी।

पिता की मौत के बाद घर चलाने के लिए फिल्मों में आईं निगार अपने पति के खिलाफ जाकर और तलाक लेकर इस फिल्म का हिस्सा बनी थीं, लेकिन फिल्म के डायरेक्टर के. आसिफ का परफेक्शन और चार्म को देखकर वो उन्हें दिल दे बैठीं।

शूटिंग खत्म होते ही निगार सुल्ताना रंगमिजाजी के लिए मशहूर के. आसिफ की तीसरी पत्नी बन गईं और अपनी ही करीबी दोस्त सितारा देवी की सौतन बनकर उन्हीं के घर में रहने लगीं। फिल्म रिलीज भी नहीं हुई थी कि पति ने बेवफाई कर चौथी शादी करने के लिए निगार और इकलौती बेटी हिना को ठुकरा दिया।

निगार ने पति के खिलाफ कानूनी लड़ाई शुरू की, लेकिन जीत नहीं सकीं। फिल्म से कामयाबी मिलने का ख्वाब देखने वालीं निगार को इंडस्ट्री के हर शख्स ने ठुकरा दिया और वो आर्थिक तंगी में डूबती चली गईं।

सालों बाद 1991 में वो तब सुर्खियों में आईं जब उनकी इकलौती बेटी हिना ने 1993 में हुए मुंबई के बम धमाकों के आरोपी और अंडरवर्ल्ड डॉन इकबाल मिर्ची से शादी कर ली। बेटी देश छोड़कर भागी तो निगार सुल्ताना ने गुमनामी में रहते हुए दम तोड़ दिया।

21 जून 1932। निगार सुल्ताना का जन्म हैदराबाद में हुआ। 5 भाई-बहनों में सबसे छोटी निगार के पिता निजाम स्टेट आर्मी में मेजर थे। स्कूल के दिनों में निगार ड्रामा में हिस्सा लिया करती थीं। कुछ दिनों बाद ही उन्हें स्कूल से निकालकर घर में ही पढ़ाया जाने लगा, लेकिन उनका एक्टिंग का जुनून कम नहीं हुआ। जब 6 साल की उम्र में उन्होंने हम तुम और वो (1938) फिल्म देखी तो खुद भी बड़े होकर हीरोइन बनने का सपना देखने लगीं। देखने में बेहद सुंदर और बेबाक निगार अपनी बातों से हर किसी ध्यान खींच लिया करती थीं।

पिता की मौत के बाद उनके दोस्त ने दिलाई फिल्मों में जगह

जिंदगी में उथल-पुथल तब मच गई, जब 10 साल की उम्र में पिता अचानक गुजर गए। पिता के एक दोस्त जगदीश सेठी ने उनके परिवार की आर्थिक मदद करने के लिए निगार को फिल्म रंगभूमि का ऑफर दे दिया, जो वो मोहन भवनानी के साथ बना रहे थे।

निगार ऑफर मिलते ही झट से राजी हो गईं। 1946 में फिल्म रंगभूमि रिलीज हुई। फिल्म तो कोई खास कमाल न दिखा सकी, लेकिन महज 14 साल की निगार ने अपने हुनर की बदौलत हर किसी का ध्यान खींच लिया। निगार पर नजरें टिकाने वालों में शोमैन राज कपूर भी शामिल थे, जिन्होंने उन्हें अपनी फिल्म का ऑफर दिया।

खूबसूरती देख राज कपूर ने अपनी डेब्यू फिल्म में रोल दिया

1948 में निगार राज कपूर की बतौर निर्देशक और प्रोड्यूसर डेब्यू फिल्म आग में निर्मला के किरदार में नजर आईं। फिल्म में राज कपूर, नरगिस और कामिनी कौशल जैसे किरदार होने के बावजूद निगार के किरदार को लोगों ने खूब पसंद किया।

ये फिल्म निगार के करियर के लिए टर्निंग पॉइंट साबित हुई और उनकी खूबसूरती की चर्चा फिल्मी गलियारों में शुरू हो गई। आगे उन्हें बाजार, पतंगा, शीश महल, दमन, मिर्जा गालिब जैसी कई बेहतरीन फिल्में मिलीं और फिल्मी दुनिया में निगार की पॉपुलैरिटी बढ़ती चली गई।

पाकिस्तान के मशहूर डायरेक्टर से की थी पहली शादी

50 के दशक तक निगार सुल्ताना फिल्म इंडस्ट्री में पकड़ बना चुकी थीं। इसी बीच उनकी मुलाकात मशहूर निर्देशक और प्रोड्यूसर एस.एम.यूसुफ से हुई। चंद मुलाकातों के बाद ही निगार ने उनसे शादी करने का मन बना लिया। करियर की परवाह किए बिना निगार सुल्ताना ने उनसे शादी कर ली।

हालांकि हिंदी सिनेमा के इतिहास में दोनों की शादी की तारीख का कहीं जिक्र नहीं मिलता है। शादी के बावजूद निगार की पॉपुलैरिटी और फेम में कोई कमी नहीं आई और उन्हें लगातार सरदार, यहूदी जैसी आला फिल्में मिलती रहीं।

के. आसिफ ने पत्नी सितारा देवी के कहने पर निगार को दिया मुगल-ए-आजम में काम

निगार सुल्ताना, उस जमाने की मशहूर कथक क्वीन सितारा देवी की करीबी दोस्त हुआ करती थीं। सितारा देवी के पति मशहूर फिल्ममेकर के.आसिफ 50 के दशक के आखिर में अपनी हिस्टॉरिकल ड्रामा फिल्म मुगल-ए-आजम की तैयारी कर रहे थे। फिल्म में अनारकली के रोल के लिए नूतन और सुरैया इनकार कर चुकी थीं, जिसके बाद मधुबाला को वो रोल दिया गया। शहजादे सलीम के लीड रोल में दिलीप कुमार चुने जा चुके थे और उनके पिता अकबर के रोल में पृथ्वीराज कपूर और जोधा बाई के रोल के लिए दुर्गा खोटे की कास्टिंग हो चुकी थी।

अब के. आसिफ को सिर्फ मुगल दरबार की डांसर बहार के रोल के लिए एक सुंदर एक्ट्रेस की तलाश थी। जब उन्हें इस रोल के लिए कोई दूसरी एक्ट्रेस नहीं मिली, तो उनकी पत्नी सितारा देवी ने अपनी सहेली निगार के नाम का सुझाव दिया। एक मीटिंग में निगार की खूबसूरती से इंप्रेस होकर के.आसिफ ने तुरंत ही उन्हें मुगल-ए-आजम में साइन कर लिया।

पति नहीं चाहते थे के. आसिफ के साथ काम करें निगार

ये वो दौर था, जब के.आसिफ की रंगीन मिजाजी के किस्से फिल्मी गलियारों में काफी मशहूर हुआ करते थे। निगार के पति एस.एम. यूसुफ भी के. आसिफ के मिजाज से वाकिफ थे, लिहाजा उन्होंने निगार को साफ कह दिया कि वो इस फिल्म में काम नहीं करेंगी। निगार को फिल्म में अपना रोल काफी पसंद आया था, उन्हें लगता था कि के.आसिफ जैसे बड़े फिल्ममेकर की फिल्म कर उनके करियर को नई उड़ान मिलेगी। ऐसे में वो फिल्म करने पर अड़ी रहीं।

पति के लाख समझाने पर भी जब निगार नहीं मानीं तो दोनों के बीच झगड़े बढ़ने लगे। जब निगार फिल्म करने की जिद पर अड़ी रहीं तो पति ने उन्हें दो रास्ते दिए, या तो शादी बचाओ या फिल्म में काम करो। निगार ने पति और फिल्म मुगल-ए-आजम के बीच फिल्म को ही चुना।


पति के खिलाफ जाकर निगार ने फिल्म में काम किया, लेकिन हुआ वही जिसका उनके पति को डर था। सेट पर के.आसिफ का परफेक्शन और उनका अंदाज देखकर निगार सुल्ताना उन्हें पसंद करने लगीं, जबकि वो उनकी करीबी दोस्त सितारा के पति थे। के. आसिफ भी निगार की खूबसूरती से पहले ही प्रभावित थे। दोनों फिल्म की शूटिंग के समय नजदीक आने लगे, जिससे सितारा देवी बेहद नाराज हुईं।

पाकिस्तानी एक्टर से अफेयर की खबरें उड़ीं तो कर डाली प्रेस कॉन्फ्रेंस

1959 में के. आसिफ से बढ़ती नजदीकियों के बीच ही खबर उड़ी कि निगार सुल्ताना ने पाकिस्तान के लेडी किलर कहे जाने वाले एक्टर दर्पण कुमार से सीक्रेट शादी कर ली है। दर्पण कुमार ने निगार के पूर्व पति एस.एम.यूसुफ के निर्देशन में काम किया था।

निगार को ये खबरें इतनी नागवार गुजरीं कि उन्होंने 13 जून 1959 को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई और सबके सामने साफ किया कि उनका दर्पण कुमार से कोई रिश्ता नहीं है। किसी अफवाह की सफाई देने के लिए रखी गई ये अपनी तरह की पहली कॉन्फ्रेंस थी।

के. आसिफ से शादी कर अपनी ही दोस्त की सौतन बनीं

मुगल-ए-आजम फिल्म की शूटिंग खत्म होते ही निगार सुल्ताना ने डायरेक्टर के.आसिफ से शादी कर ली। के. आसिफ उन्हें अपने साथ घर ले आए, जहां पहले ही सितारा देवी रहा करती थीं। सितारा देवी भी के.आसिफ की दूसरी पत्नी थीं। अपनी ही दोस्त निगार को अपने ही घर में सौतन बनी देख सितारा देवी को जोरदार धक्का लगा, लेकिन उन्होंने शादी नहीं तोड़ी।

निगार सुल्ताना, के. आसिफ की दूसरी पत्नी सितारा देवी के साथ एक ही घर में रहा करती थीं। सितारा देवी ने भी निगार से दोस्ती बरकरार रखी। इस शादी से निगार ने बेटी हिना कौसर को जन्म दिया।

पति ने तीसरी शादी की तो कोर्ट तक घसीट लाईं निगार

बेटी के जन्म के कुछ समय बाद ही के.आसिफ ने दिलीप कुमार की छोटी बहन अख्तर से शादी कर ली। दिलीप कुमार इस कदर नाराज रहे कि मुगल-ए-आजम के प्रीमियर तक में नहीं पहुंचे। इस बार निगार और सितारा दोनों के सब्र का बांध भी टूट गया। सितारा देवी ने के. आसिफ का घर छोड़ते हुए उन्हें शाप दिया कि तुम बेमौत मरोगे, वहीं निगार सुल्ताना ने के. आसिफ के खिलाफ कानूनी लड़ाई शुरू कर दी।

अपनी दलील में निगार ने कहा- के. आसिफ ने सितारा के रहते हुए बिना उनकी इजाजत लिए मुझसे शादी की और फिर मेरे रहते हुए अख्तर से। उन्होंने दोनों बार बिना किसी की इजाजत से शादी की है, जो गैरकानूनी है।

कोर्ट में मामला पहुंचते ही के. आसिफ ने भी बिना झिझक निगार सुल्ताना को तलाक दे दिया। ऐसे में निगार ने अकेले ही अपनी बेटी की परवरिश की और साथ-ही-साथ कोर्ट के चक्कर भी काटती रहीं।

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