नीरज ने टैक्सी से भाला भिजवाया था
टाइम्स ऑफ इंडिया से बात करते हुए रोहित यादव ने कहा, 'एशियन गेम्स के लिए मेरे पास अपना भाला नहीं था। मेरा फेवरेट भाला खराब हो गया था और मुड़ गया था। 10 सितंबर को इंडियन एथलेटिक्स फाइनल सीरीज के लिए पटियाला से दिल्ली आते समय मैंने नीरज भाई से बात की। हम लगातार कॉन्टैक्ट में रहते हैं। मुझे पता था कि वह चोट से उबरने के लिए भारत लौट आए हैं। मैंने उन्हें बताया कि एशियन गेम्स के लिए मेरे पास अपना भाला नहीं है। उन्होंने तुरंत मेरी मदद की और अपना ऑटोग्राफ किया हुआ भाला निजी टैक्सी के जरिए जेएलएन स्टेडियम भिजवा दिया।'दिल्ली में इस्तेमाल नहीं कर पाए भाला
नीरज चोपड़ा के मिले भाले के साथ एक समस्या भी थी। दिल्ली में रोहित इसका इस्तेमाल नहीं कर सकते थे, क्योंकि जांच के लिए इसे टेक्निकल इन्फॉर्मेशन सेंटर (टीआईसी) में रजिस्टर नहीं कराया गया था। ऐसे में उन्होंने दिल्ली की प्रतियोगिता के लिए दूसरे रजिस्टर्ड भाले का इस्तेमाल किया और नीरज के दिए भाले को संभालकर जापान ले गए।रोहित यादव ने बताया, 'एशियन गेम्स में मैंने टीआईसी के पास दो भाले रजिस्टर कराए थे, लेकिन मैंने नीरज भाई का दिया हुआ भाला इस्तेमाल किया। उस पर मेरी पकड़ अच्छी थी और मैं उसके साथ सहज महसूस कर रहा था। इसी भाले से मैंने अपना बेस्ट थ्रो किया और 84.35 मीटर के प्रदर्शन के साथ ब्रॉन्ज मेडल जीता। मैं नीरज भाई का हमेशा आभारी रहूंगा। मैंने उस भाले को अपने पास संभालकर रखा है और आगे के इवेंट में भी इसका इस्तेमाल करूंगा।'
