'कश्‍मीर फाइल्‍स' को एकता-अखंडता मजबूत करने के लिए नेशनल अवॉर्ड, जरा 58 साल का इतिहास टटोलिए

'कश्‍मीर फाइल्‍स' को एकता-अखंडता मजबूत करने के लिए नेशनल अवॉर्ड, जरा 58 साल का इतिहास टटोलिए
24 अगस्त को 69वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों की घोषणा की गई, जिसमें 'द कश्मीर फाइल्स' को राष्ट्रीय एकता और अखंडता बनाए रखने के लिए नरगिस दत्त अवॉर्ड दिया गया। राष्ट्रीय एकता और अखंडता के लिए 'द कश्मीर फाइल्स' को अवॉर्ड? यह सुनकर लोगों की त्योंरियां चढ़ गईं। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री से लेकर जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री भी हैरान रह गए। फिल्म को मिले नरगिस दत्त अवॉर्ड पर सवाल उठाए जा रहे हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि जब मार्च 2022 में 'द कश्मीर फाइल्स' रिलीज हुई थी, तो देश में कैसा माहौल था, सभी ने देखा। दो समुदाय के लोग आपस में भिड़ गए थे। यहां तक कि फिल्म को बैन करने की मांग तक उठी थी। और अब उसी फिल्म को देश में राष्ट्रीय एकता और अखंडता के लिए नरगिस दत्त अवॉर्ड दे दिया गया।
मात्र 15-12 करोड़ के बजट में बनी The Kashmir Files में 1990 में कश्मीरी पंडितों के नरसंहार और उनके पलायन की कहानी को दिखाया गया था। इस कहानी को जहां कुछ लोगों ने पसंद किया, तो कुछ की भौंहें तन गईं। डायरेक्टर Vivek Agnihotri से लेकर फिल्म की कास्ट के खिलाफ देशभर में जगह-जगह विरोध-प्रदर्शन विरोध शुरू हो गया। असम के धुबरी से सांसद बदरुद्दीन अजमल ने सांप्रदायिक घटनाएं बढ़ने की चेतावनी तक दे डाली थी। वहीं इजरायली फिल्ममेकर नदव लैपिड तक ने 'द कश्मीर फाइल्स' को 'वल्गर और प्रोपेगैंडा' वाली फिल्म कह दिया था। ऐसे में यह सवाल उठना लाजमी है कि आखिर 'द कश्मीर फाइल्स' को नरगिस दत्त अवॉर्ड कैसे?

सोशल मीडिया पर बहस, उठ रहे सवाल

सोशल मीडिया पर इसी बात पर बहस छिड़ी है। ट्विटर पर लोग गुस्सा जाहिर कर रहे है कि जिस फिल्म को देखने के बाद देशभर में बवाल मचा, नफरत का बीज फूटने लगा था, वह कैसे राष्ट्रीय एकता बनाए रखने के योग्य हो सकती है?

बॉक्स ऑफिस पर हुंकार, माहौल तो कुछ और ही था

बेशक, 'द कश्मीर फाइल्स' ने बॉक्स ऑफिस पर 250.06 करोड़ का कलेक्शन किया, लेकिन तब सिनेमाघरों के अंदर का माहौल कुछ और ही बयां कर रहा था। एक तरफ फिल्म की बल्क बुकिंग का दावा किया जा रहा था, वहीं दूसरी ओर दो विशेष समुदायों के बीच तनातनी देखने को मिल रही थी। अगर फिल्म वास्तव में देश में एकता और अखंडता बनाए रखने के योग्य आंकी गई है, तो फिर विवेक अग्निहोत्री क्यों इंटरव्यू बीच में छोड़कर भाग जाते हैं? क्यों वह फिल्म को मिले खास लोगों के सपोर्ट से इनकार कर देते हैं?

58 साल में 48 फिल्मों को नरगिस दत्त अवॉर्ड का इतिहास

नरगिस दत्त अवॉर्ड की शुरुआत साल 1965 में हुई थी। तब से लेकर अब तक बीते 58 साल के इतिहास को अगर खंगालेंगे, तो पाएंगे कि यह अवॉर्ड जिन भी फिल्मों को दिया गया, वो भाईचारे और एकता का संदेश देने में सफल रही थीं। उन फिल्मों को देख लोगों के अंदर एकता और देशभक्ति की भावना जागृत हुई थी। फिर चाहे वह 1965 में आई 'शहीद' हो, 'सात हिंदुस्तानी' हो, 'दो बूंद पानी' हो, या फिर 'जख्म' और 'पुकार'। लेकिन 'द कश्मीर फाइल्स' देखने के बाद तो दो खास समुदायों का खून खौल उठा था। वो तो एक-दूसरे के खिलाफ खड़े हो गए थे। हैरानी होती है कि जिस 'द कश्मीर फाइल्स' को 'प्रोपेगैंडा' वाली और 'सांप्रदायिक दंगों' को बढ़ावा देने वाली फिल्म बताया गया...जिसे बैन करने की मांग उठी...उसे ही राष्ट्रीय एकता बनाए रखने वाली फिल्म बताकर सम्मानित कर दिया गया।
बीते 58 साल में अब तक 48 ऐसी फिल्में रही हैं, जिन्हें देश में राष्ट्रीय एकता और अखंडता बनाए रखने के योग्य मानते हुए नरगिस दत्त अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। ये रही उनकी लिस्ट:

सालफिल्म का नाम
1965शहीद
1966सुभाष चंद्र
1968जन्मभूमि
1969सात हिंदुस्तानी
1970Thurakkatha Vathil
1971दो बूंद पानी
1972Achanum Bappayum
1973गरम हवा
1974परिणय
1978ग्रहण
197922 जून 1897
1980Bhavni Bhavai
1981सप्तपड़ी
1982Aaroodam
1983सूखा
1984आदमी और औरत
1985Sree Narayana Guru
1987तमस
1988रुद्रवीणा
1989Santha Shishunala Sharifa
1991Aadi Mimansa
1992रोजा
1993सरदार
1994मुक्ता
1995बॉम्बे
1996Kaanaakkinaavu
1997बॉर्डर
1998जख्म
1999शहीद ऊधम सिंह
2000पुकार
2001बब
2002मिस्टर एंड मिसेज अय्यर
2003पिंजर
2004नेताजी सुभाषचंद्र बोस: द फॉरगॉटन हीरो
2005Daivanamathil
2006Kallarali Hoovagi
2007धरम
2008Aai Kot Nai
2009दिल्ली 6
2010Moner Manush
2012Thanichalla Njan
2013Thalaimuraigal
2015नानक शाह फकीर
2016Dikchow Banat Palaax
2017धप्पा
2018Ondalla Eradalla
2019ताज महल
2023द कश्मीर फाइल्स

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