रमेश कुमार ने अपने पत्र में सवाल उठाया है कि जब वे अकेले पूरे मरवाही तहसील के अधिकांश कामकाज संभाल रहे थे और उन्हें 15 में से मात्र दो हल्कों में सीमित कर दिया गया था। तब यही प्रशासनिक सेवा संघ उनके साथ न्याय के लिए खड़ा क्यों नहीं हुआ।
उन्होंने लिखा, "मैं पिछले10 सालों से शपथपूर्वक और निष्ठा से अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर रहा हूं। जब मुझे मरवाही में 15 में से मात्र 2 हल्कों की पदस्थापना दी गई और बाकी कार्यों का भार भी मुझ पर ही रहा, तब संघ ने मेरे 'न्याय पक्ष' में क्या किया?"
दोपहर 12:30 बजे मिली हड़ताल की सूचना
रमेश कुमार ने बताया कि उन्हें हड़ताल की सूचना 28 जुलाई को दोपहर 12:30 बजे मिली। उनका स्पष्ट मत है कि इस प्रकार की हड़तालें न केवल शासकीय दायित्वों के विरुद्ध हैं, बल्कि इनमें व्यक्तिगत स्वार्थ भी झलकता है। इसीलिए उन्होंने इस हड़ताल से स्वयं को पूरी तरह से अलग कर लिया है।











