आज शाम को डोंगरगढ़ आएंगे मुनि समय सागर महाराज:दमोह के कुंडलपुर में 30 मार्च को सौंपी जाएगी आचार्य की गद्दी

आज शाम को डोंगरगढ़ आएंगे मुनि समय सागर महाराज:दमोह के कुंडलपुर में 30 मार्च को सौंपी जाएगी आचार्य की गद्दी

आचार्य विद्यासागर जी महाराज के उत्तराधिकारी मुनि समय सागर जी महाराज दरकेसा से बोरतालाब पहुंच गए हैं। वे आज (22 फरवरी) शाम को डोंगरगढ़ के चंद्रगिरि तीर्थ पहुंचेंगे। समय सागर जी के लिए अलग आसन बनवाया गया है।

30 मार्च को मध्यप्रदेश के दमोह जिले के कुंडलपुर जैन तीर्थ क्षेत्र में 30 मार्च को उन्हें आचार्य पद की गद्दी सौंपी जाएगी। आचार्य विद्यासागर जी महाराज ने 6 फरवरी को मुनि योग सागर जी से चर्चा करने के बाद आचार्य पद का त्याग किया था। उन्होंने मुनि समय सागर जी महाराज को आचार्य पद देने की घोषणा की थी।

आचार्य विद्यासागर महाराज का अस्थि कलश चंद्रगिरि में उसी जगह पर रखा गया है, जहां वे ब्रह्मलीन हुए थे। देशभर से अनुयायी और श्रद्धालु कलश के दर्शन करने आ रहे हैं।

आज डोंगरगढ़ पहुंचेंगे समय सागर महाराज

विद्यासागर जी के उत्तराधिकारी बनाए गए मुनि समय सागर महाराज महाराष्ट्र के गोंदिया साल्हेकसा से निकले हैं। वे 43 संतों के साथ पैदल यात्रा कर आज शाम तक डोंगरगढ़ पहुंचेंगे। यहां उन्हें विधिवत रूप से आचार्य की गद्दी सौंपी जाएगी।

आचार्य विद्यासागर जी महाराज ने 6 फरवरी को मुनि योग सागर जी से चर्चा करने के बाद आचार्य पद का त्याग किया था। उन्होंने मुनि समय सागर जी महाराज को आचार्य पद देने की घोषणा की थी।

25 फरवरी को देश भर में सामूहिक विनयांजलि

आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज की अस्थियों का मंगलवार को संकलन करने के बाद कलश समाधि कक्ष में उनकी तस्वीर के सामने रखा गया है। इसी कक्ष में आचार्य श्री महा समाधि में लीन हुए थे। 25 फरवरी को पूरे देश में सामूहिक गुरु विनयांजलि का आह्वान किया गया है।

प्रज्ञा गिरि तीर्थ क्षेत्र में रोजाना बड़ी संख्या में आचार्यश्री के शिष्यों के अलावा अनुयायियों की संख्या बढ़ रही है। आगामी आयोजनों की भी तैयारी की जा रही है। इस दौरान जनप्रतिनिधि, जैन-जैनेतर, गणमान्य नागरिकों समेत सर्वधर्म के लोग मौजूद रहेंगे। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दोपहर 1 बजे से अपने-अपने नगर के तय प्रमुख स्थल पर कार्यक्रम को भव्यता पूर्वक आयोजित करेंगे।

चंद्रगिरि तीर्थ में ली थी अंतिम सांस

आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज ने 17 फरवरी को छत्तीसगढ़ के डोंगरगढ़ स्थित चंद्रगिरि तीर्थ में अंतिम सांस ली थी। उन्होंने 3 दिन से उपवास धारण कर रखा था। महासमाधि से पहले सिर्फ ‘ॐ’ शब्द कहा। सिर हल्का सा झुका और ब्रह्मलीन हो गए।

ये बात 20 साल से आखिरी क्षण तक आचार्यश्री के साथ रहे बाल ब्रह्मचारी विनय भैया ने बताई। इससे पहले 6 फरवरी को उन्होंने मुनि योग सागर जी से चर्चा करने के बाद आचार्य पद का त्याग कर दिया था। उन्होंने मुनि समय सागर जी महाराज को आचार्य पद देने की घोषणा भी कर दी थी।

गुरु प्रेम: माथे पर लगा रहे समाधि स्थल की भभूत

चंद्रगिरि तीर्थ पहुंच रहे अनुयायी समाधि स्थल की भभूत माथे से लगाकर अपने साथ ले जा रहे हैं। संघ के प्रज्ञा गिरि तीर्थ के प्रकाश जैन ने बताया कि यह क्रिया 22 फरवरी तक होगी। आज ही भावी आचार्य श्री समय सागर जी महाराज के आने के बाद आगे के कार्यक्रम निर्धारित किए जाएंगे।

1946 में कर्नाटक में जन्म, 1972 में अजमेर में दीक्षा

आचार्य विद्यासागर महाराज का जन्म 10 अक्टूबर 1946 को शरद पूर्णिमा को कर्नाटक के बेलगाम जिले के सद्लगा ग्राम में हुआ था। उन्हें आचार्य श्री ज्ञान सागर महाराज ने 22 नवंबर 1972 को राजस्थान के अजमेर में आचार्य पद की दीक्षा दी थी।

आचार्य बनने के बाद पहली दीक्षा भाई को दी थी

आचार्य बनने के बाद विद्यासागर जी ने 8 मार्च 1980 को छतरपुर में मुनि श्री समय सागर महाराज को पहली दीक्षा दी। इसके बाद सागर जिले में योग सागर और नियम सागर महाराज को दीक्षित किया। समय सागर और योग सागर उनके गृहस्थ जीवन के भाई हैं। आचार्यश्री की दो बहनें शांता और सुवर्णा भी दीक्षा ले चुकी हैं।


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