मध्यप्रदेश में लोक निर्माण विभाग की भवन बनाने वाली इकाई पीआईयू के अतिरिक्त परियोजना संचालक सूपत लाल सूर्यवंशी को पद का दुरुपयोग करने के आरोप में अनुसूचित जाति जनजाति अधिकारी कर्मचारी संघ यानि अजाक्स के प्रांतीय महासचिव प्रशासनिक पद से बर्खास्त कर दिया गया है। संघ के प्रान्ताध्यक्ष मुकेश मौर्य ने आज भोपाल में आयोजित पत्रकार वार्ता में सूर्यवंशी पर संघ के संविधान के मुताबिक 2014 में तीन साल का कार्यकाल पूरा करने के बावजूद नौ साल से अवैध रूप से संघ पर कब्जा जमाने , संगठन में आर्थिक गड़बड़ियां करने , संगठन के कामकाज में मनमानी करने और अदालत की अवमानना करने के आरोप लगाए ।
गौरतलब है कि सूर्यवंशी 2010 में आय से अधिक संपत्ति के मामले में लोकायुक्त छापे में पकड़ाने के बाद अभी भी भोपाल की विशेष अदालत में इस मुकदमे का सामना कर रहे हैं। इस बीच सूर्यवंशी पर मुकदमें का मामला छिपाकर 2016 में पदोन्नति लेने , फर्जी जाति प्रमाणपत्र के आधार पर नौकरी पा चुके लोगो को संरक्षण देने , विभिन्न निर्माण कार्यों में जमकर भ्रष्टाचार करने, भोपाल में हमीदिया अस्पताल के भवन निर्माण में भारी अनियमितताएं करने , अजाक्स के प्रांतीय महासचिव पद के कामकाज के लिए लोक निर्माण विभाग का भवन और अन्य सरकारी संसाधनों का उपयोग करने जैसे कई गंभीर आरोप भी लगे। हालांकि अजाक्स की ताकत और पैसों की खनक के चलते आला अधिकारियों से लेकर मंत्री तक तमाम शिकायतों के बावजूद सूपत लाल सूर्यवंशी पर कोई कार्रवाई नहीं कर सके।
इस संरक्षण ने सूर्यवंशी के हौंसले इतने बढ़ा दिए कि उन्होंने मनमाने तरीके से ना केवल अजाक्स की सदस्यता राशि में दोगुनी से लेकर दस गुनी बढ़ोतरी कर दी बल्कि नियमानुसार पंजीयक कार्यालय को उसका हिसाब किताब भी देना भी मुनाशिब नहीं समझा । संघ के प्रान्ताध्यक्ष मुकेश मौर्य ने बताया कि संघ के एक लाख से ज्यादा सदस्यों से इक्कठी की गई यह राशि करोड़ों रुपए की है जिसमें गबन किया गया है।
उन्होंने सूर्यवंशी पर इतने बरसों में अनुसूचित जाति जनजाति के अधिकारियों कर्मचारियों की समस्याओं को हल करने और उनके हित संरक्षण के लिए कोई कारगर कदम नहीं उठाने का आरोप लगाया। उन्होंने सूर्यवंशी पर अदालत की अवमानना करने का आरोप भी लगाया और प्रदेश के पंजीयक से उनके खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की। उन्होंने शीघ्र ही अजाक्स का सम्मेलन आयोजित करने और आरक्षित अधिकारियों कर्मचारियों के हित में समुचित कदम उठाने को कहा।











