भोपाल में मानसून बना सांस के मरीजों की मुसीबत, अस्थमा और एलर्जी के केस बढ़े

भोपाल में मानसून बना सांस के मरीजों की मुसीबत, अस्थमा और एलर्जी के केस  बढ़े

भोपाल। विश्व एलर्जी सप्ताह के बीच शहर में सांस के मरीजों की संख्या अचानक बढ़ गई है। टीबी अस्पताल के चेस्ट ओपीडी में रोज 120 से ज्यादा मरीज खांसी, छींक और सांस फूलने की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं। पिछले महीने ये आंकड़ा 80 के आसपास था। यानी जून में अस्थमा और एलर्जिक राइनाइटिस के मरीज 40% तक बढ़ गए हैं।

जीएमसी के श्वास रोग विशेषज्ञ डा. पराग शर्मा ने बताया कि सीजन बदल गया है और हवा भी बदल गई है। ये वाली हवा भारी हो गई है। भारी हवा फेफड़ों को नुकसान करती है। सांस लेने में तकलीफ होने लगती है। मानसून में हवा में नमी 80% से ऊपर चली जाती है। इस नमी में घर की दीवारों, पर्दों और बिस्तर में फंगस यानी मोल्ड पनपने लगता है। साथ ही काकरोच और धूल के बारीक कण एलर्जन बनकर सांस के जरिए फेफड़ों तक पहुंचते हैं।

पराग कण और आम से भी परेशानी

डा. शर्मा के मुताबिक इस मौसम में कई पौधों के पराग कण हवा में आ जाते हैं। जिन लोगों को एलर्जी है उन्हें छींक, नाक बहना और आंखों में खुजली शुरू हो जाती है। कुछ लोगों को गर्मी में आम के सीजन में भी तकलीफ होती है। आम की महक और रस से भी एलर्जी ट्रिगर हो जाती है।

बिस्तर का दुश्मन-हाउस डस्ट माइट

डा. शर्मा ने बताया कि 12 महीने एलर्जी करने वाला सबसे बड़ा कारण हाउस डस्ट माइट है। यह बिस्तर में रहने वाला छोटा सा कीड़ा है जो आंखों से नहीं दिखता। दुनिया में सबसे ज्यादा एलर्जी इसी से होती है। यह इस सीजन में ज्यादा बढ़ जाता है। लोग कपड़े-बिस्तर को धूप में नहीं सुखाते, इससे माइट और बढ़ते हैं।

लक्षण दिखने पर तुरंत कराएं जांच

  • डॉ. शर्मा ने बताया कि मानसून में इन्फ्लूएंजा वायरस के केस बढ़ते हैं। बच्चों में आरएसवी वायरस इस सीजन में कामन होता है। इससे खांसी, बुखार और सांस की नली में सूजन आ जाती है।
  • लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं। लापरवाही से अस्थमा अटैक का खतरा बढ़ जाता है। इनहेलर से डरें नहीं। यह आदत नहीं डालता। अस्थमा कंट्रोल करने का सबसे सुरक्षित तरीका इनहेलर ही है। सुबह उठते ही लगातार छींक, नाक बहना, सूखी खांसी या सीने में घरघराहट हो तो जांच जरूर कराएं।
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