पत्र में लगाया गंभीर आरोप
संसदीय समिति के सदस्य निशिकांत दुबे ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखा। उन्होंने पत्र में लिखा कि के सी वेणुगोपाल पीएसी के अधिकार क्षेत्र को दरकिनार कर और अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने के लिए "टूल किट" के हिस्से के रूप में काम कर रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार, पीएसी ने 4 अक्टूबर को बुच को 24 अक्टूबर को गवाही के लिए बुलाने का फैसला किया। हालांकि, एक सदस्य ने दावा किया कि 4 अक्टूबर को हुई पीएसी बैठक के दौरान इस पर चर्चा नहीं की गई और रिपोर्टों के अनुसार, पीएसी अध्यक्ष, कांग्रेस के महासचिव ने "एकतरफा" निर्णय लिया है।
बैठकें हंगामेदार होंगी
निशिकांत दुबे के कड़े शब्दों वाले संवाद से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि समिति में बहुमत वाली भाजपा की अगुवाई वाली एनडीए, वेणुगोपाल द्वारा नियामक को मुश्किल में डालने के किसी भी कदम का विरोध करेगी। इससे संकेत मिलता है कि इस मुद्दे पर उनकी बैठकें हंगामेदार होंगी। अन्य विपक्षी दल क्या रुख अपनाते हैं, यह देखना दिलचस्प होगा। इससे पहले, पीएसी की एक बैठक में दुबे ने अमेरिका स्थित शॉर्ट सेलर हिंडनबर्ग रिसर्च द्वारा लगाए गए आरोपों के संबंध में बुच को बुलाने की योजना पर आपत्ति जताते हुए कहा था कि सेबी के मामले में पीएसी का कार्य बाजार नियामक द्वारा केंद्रीय निधियों के उपयोग की जांच करने तक सीमित है और इसके निर्णयों की जांच तक विस्तारित नहीं है।











