भोपाल। केंद्र सरकार की ओर से 15 अगस्त से शुरू हुआ मेरी माटी, मेरा देश अभियान अब संपूर्णता की ओर है। इसका समापन 31 अक्टूबर को नई दिल्ली में समारोह पूर्वक होगा। अभियान अंतर्गत अमृत कलश यात्रा के राष्ट्रीय समापन कार्यक्रम के लिए मध्य प्रदेश के विभिन्न संभागों, जिलों से अमृत कलश लेकर आए लगभग आठ सौ प्रतिभागी शनिवार को शौर्य स्मारक में दिल्ली जाने के लिए एकत्रित हुए। यहां मुक्ताकाश मंच पर प्रदर्शित कलशों पर पुष्पांजिल अर्पित की गई और देश भक्ति गीतों की प्रस्तुति हुई। इसके बाद राष्ट्र भक्ति की भावना को अभिव्यक्त करने के लिए मध्य प्रदेश के 313 ब्लाक और 413 नगरीय निकायों से लाए गए 726 अमृत कलश विशेष ट्रेन से दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय कार्यक्रम के लिए प्रतिभागियों के साथ रवाना किए गए। मेरी माटी, मेरा देश, आजादी का अमृत महोत्सव की परिणति की ओर ले जाने वाला अभियान है।
रवानगी से पहले हुआ विशेष कार्यक्रम
मातृभूमि को श्रृद्धांजलि और देश के वीर-वीरांगनाओं के बलिदान को स्मरण करने के उद्देश्य से आयोजित राज्य स्तरीय समारोह में गायिका आकृति मेहरा एवं साथी अरुण द्वारा देशभक्ति गीतों की प्रस्तुति दी गई। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में प्रमुख सचिव संस्कृति शिवशेखर शुक्ला, विशिष्ट अतिथि के रूप में अपर सचिव संस्कृति उर्मिला शुक्ला,अपर आयुक्त नगरीय प्रशासन मयंक वर्मा, नेहरू युवा केंद्र के राज्य निदेशक सुरेंद्र शुक्ला सहित वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति रही। कार्यक्रम में सेना, पुलिस के प्रतिनिधि, स्कूल और कालेजों के छात्रों के अलावा एनएसएस, एनवायके और एनसीसी के युवाओं की भागीदारी रही। संस्कृति विभाग इस अभियान की नोडल एजेंसी है।
बताई माटी की महिमा
इस मौके शिवशेखर शुक्ला ने माटी का महत्व निरूपित करते हुए कि हम सभी इस माटी से जन्में हैं और इसी माटी में मिल जाना है। भारत देश की माटी महान है। आज जब अनेक देशों के बीच वैमनस्यता चरम पर है, हमारे देश में शांति और सौहार्द्र, माटी की ही महिमा है। 75 वर्षों की विकास यात्रा और बलिदानियों को याद करना इस यात्रा का मकसद था।
प्रदेश भर में तैयार हुए हैं 726 'अमृत कलश'
स्वराज संस्थान संचालनालय के उप संचालक प्रो संतोष कुमार वर्मा ने बताया कि अभियान के तहत एक से 30 सितंबर तक प्रदेश के लगभग 52 हजार गांवों से निकाली गई अमृत कलश यात्रा के दौरान मिट्टी और चावल एकत्र कर संबंधित ग्राम पंचायतों में लाया गया, जिनकी संख्या 23 हजार है। ग्राम पंचायत से मिट्टी संबंधित ब्लाक मुख्यालय तक पहुंची और 313 ब्लाकों में एक 'अमृत कलश' तैयार किया गया है। इसी तरह शहरों और कस्बों में मिट्टी और चावल एकत्रीकरण का कार्य एक अक्टूबर से आरंभ होकर 13 अक्टूबर तक चला। प्रत्येक नगरीय निकाय के लिए एक कलश तैयार किया गया है।











