हीरोइन बनने मुंबई आई थीं मीनाक्षी थापर, एक झूठ के कारण दोस्तों ने किडनैप कर कत्ल किया

हीरोइन बनने मुंबई आई थीं मीनाक्षी थापर, एक झूठ के कारण दोस्तों ने किडनैप कर कत्ल किया

आज की अनसुनी दास्तान एक ख्वाब, संघर्ष, धोखे और कत्ल की वो भयावह कहानी है, जिसे मायानगरी में हीरोइन बनने का सपना लिए पहुंची मीनाक्षी थापर ने खुद जी है। देहरादून से हीरोइन बनने के लिए मुंबई पहुंची मीनाक्षी ने संघर्ष कर मधुर भंडारकर की फिल्म में करीना कपूर के साथ जगह बनाई थी।

ख्वाब पूरा होने को था, लेकिन अफसोस कि सुनहरा सपना पूरा होने से पहले ही उनकी जिंदगी पर विराम लग गया। एक कत्ल की साजिश ने सब कुछ बदल दिया। सिर धड़ से अलग कर दिया गया और शरीर को कई दिनों तक सेप्टिक टैंक में सड़ने के लिए छोड़ दिया गया।

एविएशन की पढ़ाई पूरी कर हीरोइन बनने मुंबई पहुंचीं

4 अक्टूबर 1984।

मीनाक्षी थापर का जन्म उत्तराखंड के देहरादून की एक मिडिल क्लास फैमिली में हुआ। देहरादून के दून स्कूल से पढ़ाई पूरी करने के बाद मीनाक्षी ने एविएशन की डिग्री ली। वो एयर होस्टेस ब्नना चाहती थीं, जबकि उनका बड़ा भाई आर्मी में भर्ती की तैयारी कर रहा था। मीनाक्षी बेहद सुंदर थीं, तो अक्सर लोग उन्हें मॉडलिंग और फिल्मों में काम करने की सलाह दिया करते थे।

देहरादून जैसे शहर में ये सपना पूरा करना मुमकिन नहीं था, इसलिए उन्होंने मुंबई जाने का फैसला किया। परिवार ने भी उन्हें भरपूर सपोर्ट किया और वो चंद रुपए लेकर हजारों नौजवानों की तरह सपनों के शहर मुंबई पहुंच गईं।

मुंबई में उन्होंने कुछ जान पहचान वालों की मदद से मॉडलिंग की दुनिया में कदम रख दिया। मुंबई शहर में उनकी जान-पहचान बढ़ने लगी और आगे बढ़ने के रास्ते खुलने लगे। कुछ कोऑर्डिनेटर्स की मदद से उन्हें सबसे पहले 2011 की हॉरर फिल्म 404 में एक छोटा सा काम मिल गया।

एविएशन की पढ़ाई पूरी कर हीरोइन बनने मुंबई पहुंचीं

4 अक्टूबर 1984।

मीनाक्षी थापर का जन्म उत्तराखंड के देहरादून की एक मिडिल क्लास फैमिली में हुआ। देहरादून के दून स्कूल से पढ़ाई पूरी करने के बाद मीनाक्षी ने एविएशन की डिग्री ली। वो एयर होस्टेस ब्नना चाहती थीं, जबकि उनका बड़ा भाई आर्मी में भर्ती की तैयारी कर रहा था। मीनाक्षी बेहद सुंदर थीं, तो अक्सर लोग उन्हें मॉडलिंग और फिल्मों में काम करने की सलाह दिया करते थे।

देहरादून जैसे शहर में ये सपना पूरा करना मुमकिन नहीं था, इसलिए उन्होंने मुंबई जाने का फैसला किया। परिवार ने भी उन्हें भरपूर सपोर्ट किया और वो चंद रुपए लेकर हजारों नौजवानों की तरह सपनों के शहर मुंबई पहुंच गईं।

मुंबई में उन्होंने कुछ जान पहचान वालों की मदद से मॉडलिंग की दुनिया में कदम रख दिया। मुंबई शहर में उनकी जान-पहचान बढ़ने लगी और आगे बढ़ने के रास्ते खुलने लगे। कुछ कोऑर्डिनेटर्स की मदद से उन्हें सबसे पहले 2011 की हॉरर फिल्म 404 में एक छोटा सा काम मिल गया।

फिल्म हीरोइन के सेट में पहुंचते ही जो पहला शख्स उन्हें मिला, उसका नाम था अमित कुमार जायसवाल। अमित फिल्म हीरोइन में एक जूनियर आर्टिस्ट के तौर पर काम कर रहा था। उसने मीनाक्षी को अपना परिचय देते हुए कहा कि वो कई बड़ी फिल्मों के कास्टिंग डायरेक्टर्स और कोऑर्डिनेटर्स को जानता है और कई लोगों को फिल्मों में काम दिलवाता है।

खुद को रॉयल फैमिली की सदस्य बताती थीं मीनाक्षी

मीनाक्षी नहीं चाहती थीं कि अमित जैसे काम के आदमी के आगे उनकी एक स्ट्रगलर की इमेज बने तो उन्होंने कह दिया कि वो नेपाल की एक रॉयल फैमिली से ताल्लुक रखती हैं और काम की तलाश में मुंबई आई हैं। देखने में भी मीनाक्षी रईस खानदान की मालूम पड़ती थीं, तो अमित ने भी उन पर भरोसा कर लिया। दोनों ने ही अपना झूठा परिचय देकर बात आगे बढ़ाई।

कुछ समय बाद अमित ने मीनाक्षी की मुलाकात अपनी गर्लफ्रेंड प्रीति सरीन से करवाई। प्रीति सरीन भी फिल्म हीरोइन का हिस्सा थी और उसने भी अमित की बताई कहानी दोहरानी शुरू कर दी कि वो दोनों कई बड़े कोऑर्डिनेटर्स को जानते हैं। अपनी बात पर यकीन दिलाने के लिए अमित ने तुरंत मीनाक्षी से पूछ लिया कि क्या वो फिल्म हीरोइन में काम करेंगी। जाहिर है कि मीनाक्षी झट से राजी हो गईं। पहली मुलाकात में ही अमित ने उन्हें फिल्म में काम दिला दिया तो मीनाक्षी उन पर भरोसा करने लगीं।

34 साल का अमित जायसवाल इलाहाबाद (अब प्रयागराज) का रहने वाला था, जो फिल्मों में काम करने मुंबई आया था। उसकी गर्लफ्रेंड प्रीति सरीन भी इलाहाबाद की रहने वाली थी, जिसकी उम्र 26 साल थी। फिल्म हीरोइन में साथ काम करते हुए तीनों की दोस्ती गहरी होती चली गई। वो अक्सर सेट में साथ समय बिताते थे और काम पर डिस्कस करते थे।

पहली मुलाकात में बोले गए मीनाक्षी के झूठ को अमित और प्रीति सच मान बैठे। उन्हें लगता था कि मीनाक्षी अमीर घराने की हैं और उसके पैसों से वो अपने लिए फिल्में प्रोड्यूस करवा सकेंगे। मीनाक्षी अक्सर उनके सामने रॉयल परिवार की झूठी कहानियां भी सुनाया करती थीं।

मीनाक्षी को फंसाने के लिए दोस्तों ने बनाया प्लान

मार्च 2012 की बात है, जब अमित और प्रीति के पास कोई काम नहीं था। घर चलाना मुश्किल हुआ तो उन्होंने एक प्लान बनाया। प्लान था मीनाक्षी की किडनैपिंग कर उनके परिवार से फिरौती मांगना।

इस प्लान में मीनाक्षी को फंसाने के लिए अमित ने 13 मार्च 2012 को मीनाक्षी को कॉल कर बताया कि एक बड़ी भोजपुरी फिल्म में लीडिंग एक्ट्रेस की तलाश है। अगर वो हीरोइन बनना चाहती हैं तो साथ में इलाहाबाद चले। शुरुआत में मीनाक्षी ने ये कहते हुए इनकार कर दिया कि वो सिर्फ हिंदी फिल्मों में काम करना चाहती हैं, लेकिन फिर भी अमित और प्रीति उन पर दबाव बनाते रहे।

आखिरकार वो साथ चलने के लिए राजी हो गईं। मीनाक्षी के एक दोस्त ने उन्हें मुंबई स्टेशन तक ड्रॉप किया और तीनों ट्रेन की टिकट लेकर मुंबई से इलाहाबाद (अब प्रयागराज) पहुंच गए। इलाहाबाद पहुंचते ही मीनाक्षी ने अपनी मां को कॉल कर बताया कि वो एक भोजपुरी फिल्म में काम करने के लिए अमित और प्रीति के साथ इलाहाबाद आई है।

14 मार्च को भी मीनाक्षी ने कॉल पर अपनी मां से बात की, लेकिन 15 मार्च से मीनाक्षी ने मां से संपर्क करना बंद कर दिया। 16 मार्च को मां ने कई कॉल किए, लेकिन मीनाक्षी ने किसी कॉल का जवाब नहीं दिया।

कॉल न उठाने पर मां ने की भाई से शिकायत

जब कई कोशिशों के बाद भी मीनाक्षी से संपर्क नहीं हो सका, तो उनकी मां घबरा गईं। उन्होंने अपने बेटे को कॉल किया जो आर्मी में था। मां ने पता लगाने को कहा तो मीनाक्षी के भाई ने मुंबई में कुछ दोस्तों की मदद ली और फिर ये मान लिया कि शायद वो शूटिंग में व्यस्त होंगी।

अमित और प्रीति, मीनाक्षी को प्रयागराज के गुलाटी बंगले में ले गए। वो बंगला कई सालों से खाली था, जिसका मालिक दूसरे शहर में रहता था। बंगले की पहरेदारी की जिम्मेदारी प्रीति के पिता के पास थी, जो पेशे से एक गार्ड थे। प्रीति जानती थी कि उसके पिता कुछ दिनों के लिए गांव गए हैं, तो बंगला कुछ दिनों तक पूरी तरह खाली है।

17 मार्च 2012 की बात है। मीनाक्षी की मां उनके कॉल के इंतजार में थीं कि तभी उनके मोबाइल में एक मैसेज आया। मैसेज में लिखा था, अगर अपनी बेटी को जिंदा देखना है तो 15 लाख रुपए का इंतजाम करो। मां डर गईं और उन्होंने तुरंत बेटे को कॉल लगाया। मीनाक्षी का भाई तुरंत उनकी तलाश के लिए छुट्टी लेकर मुंबई पहुंच जाता है।

कुछ देर में मां के पास दूसरा मैसेज पहुंचा, अगर इस बात की खबर पुलिस को दी, तो तुम्हारी बेटी की अश्लील फिल्में बनाकर इंटरनेट पर डाल देंगे। इस बार मां समझ गई थीं कि मीनाक्षी वाकई मुसीबत में हैं।

घर में मीनाक्षी के लिए फिक्रमंद हो रहीं मां को कुछ न सूझा और उन्होंने दिए गए अकाउंट नंबर पर 60 हजार रुपए ट्रांसफर कर दिए। उनके पास सिर्फ उतने ही रुपए थे। उनके पास कई और मैसेज आए, जिसमें साफ लिखा था कि 15 लाख रुपए मिलने के बाद ही वो मीनाक्षी को लौटाएंगे।

वहीं मुंबई पहुंच चुके मीनक्षी के भाई ने उस दोस्त से संपर्क किया, जो मीनाक्षी को इलाहाबाद स्टेशन छोड़ने गया था। जब उस दोस्त से कोई सटीक जानकारी नहीं मिली तो भाई ने अंबोली पुलिस स्टेशन में अपनी बहन की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाते हुए बता दिया कि उनकी मां के नंबर पर कुछ फिरौती के मैसेज आए हैं।

पुलिस ने मामले को संजीदगी से लेते हुए तलाश शुरू कर दी और मीनाक्षी के सभी दोस्तों को पूछताछ के लिए बुलाया। पूछताछ में मीनाक्षी के दोस्त ने बताया कि जब वो अमित और प्रीति के साथ इलाहाबाद निकल रही थी, तो उसने उन्हें स्टेशन छोड़ा था।

पुलिस ने जब अमित और प्रीति की तलाश शुरू की, तो पता चला कि वो पिछले कुछ दिनों से मुंबई में नहीं हैं। अब पुलिस का शक दोनों पर था। पुलिस ने खबरी नेटवर्क्स को एक्टिव कर दोनों की तलाश शुरू कर दी। आखिरकार अप्रैल के पहले हफ्ते में पुलिस को एक मुखबिर से जानकारी मिली कि दोनों लखनऊ में हैं। पता लगते ही लखनऊ पुलिस ने 12 अप्रैल को दोनों को गिरफ्तार कर लिया। फिर बाद में मुंबई लाकर दोनों से पूछताछ शुरू कर दी गई।

शुरुआत में तो अमित और प्रीति पुलिस को गुमराह करते रहे, लेकिन फिर सख्ती करने पर दोनों ने जो बताया वो सुनकर हर कोई हैरान रह गया। पुलिस दोनों को लेकर प्रयागराज के उसी गुलाटी बंगले में पहुंचती है, जहां दोनों ने मीनाक्षी को रखा था। सालों से खाली पड़े बंगले में उत्तर प्रदेश पुलिस, मुंबई पुलिस और कुछ मजदूरों को दाखिल होते देख पूरा एरिया हैरान हो गया था। अमित और प्रीति की निशानदेही पर मजदूरों ने घर के पीछे के हिस्से में खुदाई करनी शुरू की। कुछ देर खुदाई के बाद पुलिस को एक सेप्टिक टैंक दिखा।

सेप्टिक टैंक से बरामद हुई मीनाक्षी की सिर कटी लाश

जैसे ही वो सेप्टिंक टैंक खोला गया तो गंध से हर कोई समझ चुका था कि वो गंध टैंक या गंदगी की नहीं बल्कि एक सड़ी हुई लाश की है। कई दिनों से टैंक में पड़ी हुई लाश बुरी तरह सड़ चुकी थी, जब लाश को निकाला गया तो सिर्फ धड़ ही निकला, सिर अब भी गायब था।

इसके बाद पुलिस अमित और प्रीति के साथ सिर की तलाश में लखनऊ से वाराणसी के रास्ते में निकल पड़ती है। कई घंटों की तलाश के बाद वाराणसी से ठीक पहले एक सुनसान इलाके में पन्नी में सिर मिल जाता है।

अब पुलिस के सामने साफ था कि किडनैपिंग की प्लानिंग करने वाले अमित और प्रीति ने मीनाक्षी का कत्ल किया है। सिर और धड़ का मुंबई लाकर पोस्टमॉर्टम किया गया। वहीं दूसरी तरफ दोनों आरोपियों से सख्ती के साथ पूछताछ शुरू हुई। अमित ने रोते हुए इकबाल-ए-जुर्म कर लिया। उसने अपनी कहानी 12 मार्च से शुरू की, जब उन्होंने मीनाक्षी की किडनैपिंग का प्लान बनाया था।

अमित के बयान के अनुसार, वो और प्रीति काम की तलाश करते हुए थक चुके थे, जब उन्हें काम मिलना बंद हो गया तो उन्होंने मीनाक्षी की किडनैपिंग का प्लान बनाया, जो उनके अनुसार एक रॉयल परिवार से थी। उन्होंने पहले मीनाक्षी को भोजपुरी फिल्म का लालच दिया और इलाहाबाद ले गए। प्रयागराज पहुंचने के 2 दिन बाद ही मीनाक्षी समझ चुकी थी कि यहां कोई फिल्म नहीं बनने वाली, जब उसने भागने की कोशिश की तो दोनों बुरी तरह डर गए थे। जब मीनाक्षी भागने के लिए शोर मचाने लगी तो अमित ने उसका गला दबाया, जिसमें प्रीति ने उसकी मदद की। कुछ समय में ही मीनाक्षी की आवाज बंद हो गई और उसकी सांसें भी रुक गईं।

फिरौती का मैसेज करने से पहले ही की जा चुकी थी मीनाक्षी की हत्या

जिस समय 16 मार्च को मीनाक्षी की मां के पास फिरौती का पहला मैसेज गया, वो उससे पहले ही मर चुकी थी। दोनों ने कई दिनों तक लाश गुलाटी बंगले में ही रखी और लगातार मीनाक्षी की मां को मैसेज करते रहे। कुछ समय बाद दोनों ने बाजार से एक धारदार हथियार खरीदा और मीनाक्षी की पहचान मिटाने के लिए उनका सिर धड़ से अलग कर दिया। दोनों ने घर के पीछे बने सेप्टिक टैंक में उनकी सिर कटी लाश डाली और ऊपर से उसे ढंक दिया।

सिर को ठिकाने लगाना अब भी बाकी था तो दोनों मुसाफिरों से भरी एक बस में चढ़ गए, जो प्रयागराज से वाराणसी जा रही थी। जैसे ही अंधेरा हुआ तो दोनों ने एक सुनसान जगह देखकर थैली में रखा हुआ सिर बस की खिड़की से बाहर फेंक दिया। वो जान चुके थे कि मुंबई पुलिस उनकी तलाश कर रही है, तो दोनों ने मुंबई लौटने की जगह अंडरग्राउंड होना बेहतर समझा।

कुछ दिनों के लिए रोकी गई थी फिल्म हीरोइन की शूटिंग

मधुर भंडारकर की फिल्म हीरोइन की जूनियर आर्टिस्ट मीनाक्षी की हत्या के बाद फिल्म की शूटिंग कुछ दिनों तक रोक दी गई। वहीं जब सच्चाई सामने आई तो हर कोई ये जानकर हैरान था कि जिन दोस्तों के साथ मीनाक्षी सेट पर समय बिताती थी, उन्हीं दोस्तों ने उनकी हत्या की है।

मीनाक्षी के हत्यारों को हुई उम्रकैद

9 मई 2018- साउथ मुंबई के सेशन कोर्ट ने अमित जयसवाल और प्रीति सरीन को मीनाक्षी थापर के कत्ल का दोषी पाया। सेशन कोर्ट के जज एस.जी. शेटे ने दोनों को इंडियन पीनल कोर्ट की धारा 302 हत्या और 364 अपहरण के तहत उम्र कैद की सजा सुनाई।


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